अनूठी पहल: थकाऊ साबित हो रही थी ऑनलाइन पढ़ाई, एक आइडिया ने बदली सोच, अब बच्चे खुद कर रहे हैं पढ़ाई

ऑनलाइन पढ़ाई से बोरियत तो घर में ही बनवा दिए ब्लैक बोर्ड

By: Pawan Tiwari

Published: 10 Oct 2020, 09:48 AM IST

टीकमगढ़/शहडोल. कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई थकाऊ साबित हो रही थी। ऐसे में टीकमगढ़ जिले के जतारा ब्लॉक के खराई खिरक गांव में की गई अनूठी पहल ने बच्चों के लिए यह पढ़ाई मनोरंजक बना दी है। राज्य शिक्षा केंद्र के साथ काम कर रही संस्था ने गांव में बच्चों के घर के बाहर ब्लैक बोर्ड क्या बनवाया पूरे गांव में ही कक्षाएं शुरू हो गईं।

असरकारक नहीं थी ऑनलाइन पढ़ाई
मोबाइल, टीवी और रेडियो के माध्यम से कराई जा रही पढ़ाई ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ खास असर कारक नहीं दिख रही थी। ऐसे में राज्य शिक्षा केंद्र के साथ जीके (जनरल नॉलेज) विषय पर काम कर रही संस्था प्रथम के कार्यकर्ताओं ने जब ग्रामीण क्षेत्रों में यह देखा तो उन्होंने कुछ अलग करने का विचार किया।

स्कूल जैसा अनुभव
संस्था के क्लक्टर आशीष त्रिपाठी ने बताया, भोपाल में राज्य शिक्षा केंद्र के साथ बैठक में बच्चों को पढ़ाई को जोड़ने के लिए नवाचार पर चर्चा हुई थी। इसके बाद उन्होंने गांव में माध्यमिक स्कूलों तक के बच्चों के घरों के बाहर ब्लैक बोर्ड बनवाना शुरू किया। अब बच्चों को घर में ही स्कूल का अनुभव हो रहा है। लगभग रोजाना पढ़ाई चलती है। कई जगह स्कूल-स्कूल खेला जाने लगा है। कभी कोई बच्चा शिक्षक बन अंग्रेजी पढ़ाता है तो कोई चित्रकला करने लगता है।

प्रवासी मजदूरों को दिया काम
वहीं, दूसरी तरफ शहडोल जिले में लॉकडाउन के कारण फोटोकॉपी का काम छूटा तो ब्यौहारी के गांव झरिया में रहने वाली सुधा कुशवाहा ने एक लाख रुपये तक का कर्ज लेकर चप्पल बनाने की यूनिट लगा ली। सुधा अब रोजाना तीन सौ से चार सौ चप्पलें तैयार करती हैं। उनकी रोज की आमदनी तीन से चार हजार रुपये है। इसके साथ-साथ ही सुधा अब प्रवासी मजदूरों को रोजगार भी दे रही हैं।

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