scriptOrganic farming is visible only in announcements | - 7 साल पहले शुरू हुई पीकेव्हीवाई योजना भी एक खेत में भी शुरू नहीं करा सकी पारंपरिक खेती | Patrika News

- 7 साल पहले शुरू हुई पीकेव्हीवाई योजना भी एक खेत में भी शुरू नहीं करा सकी पारंपरिक खेती

- खेती की लागत कम करने एवं लोगों के स्वास्थ्य को लेकर किया जा रहा जैविक खेती बढ़ाने का प्रयास

टीकमगढ़

Updated: March 28, 2022 08:23:42 pm

टीकमगढ़. खेती की लागत कम करने एवं लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार एक बार फिर से जैविक खेती को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। सालों से इसके लिए कृषि विभाग द्वारा तमाम योजनाओं के माध्यम से प्रयास तो किया जा रहा है, लेकिन अब तक जिले में एक भी खेत में इस खेती को शुरू नहीं किया जा सका है।

Organic farming is visible only in announcements
Organic farming is visible only in announcements


रासायनिक खाद एवं तमाम कीटनाशकों के उपयोग से अब हमारी फसलें भी जहरीली होती जा रही है। इसका असर तमाम नई बीमारियों के रुप में सामने आ रहा है। कम उम्र में ब्लड प्रेशर, शुगर के साथ ही देश में बढ़ रही किडनी एवं कैंसर रोगों को के लिए भी बहुत हद तक रासायनिक खेती को जिम्मेदार बताया जा रहा है। ऐसे में सरकार अब किसानों को फिर से जैविक खेती की ओर मोडऩे के लिए तमाम प्रयास कर रही है। ऐसे में शासन द्वारा आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से सात साल पूर्व वर्ष 2015-16 में परपरागत कृषि विकास योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत इंदौर के एक एनजीओ को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन पिछले सात साल में जैविक खेती करने वाले एक भी खेत तैयार नहीं हो सके है।

हल ब्लॉक में बने थे कलस्टर
इसके लिए पहले चरण में कृषि विभाग की मदद से एनजीओ ने हर ब्लॉक में कुछ गांव का चयन कर कलस्टर तैयार किए थे। योजना के तहत किसानों को जैविक खेती के लिए तैयार करना था। किसानों द्वारा इसके लिए अपना पंजीयन कराना था और तीन वर्षों तक लगातार जैविक खेती करनी थी। इसके लिए उसे विभाग द्वारा हर साल जैविक खेती करने का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाना था। तीन साल तक लगातार जैविक खेती करने के बाद उस किसान को पूरी तरह से परंपरागत खेती करने का प्रमाण-पत्र दिया जाता और उसकी उपज को भी रासायनिक खेती की उपज से अच्छी कीमत में खरीदा जाता। लेकिन अब तक जिले में एक भी ऐसा किसान विभाग के रेकार्ड में दर्ज नहीं हो सका है, जो पूरी तरह से पारंपरिक खेती करता हो।


बन रही दूसरी योजना
इस मामले में कृषि विभाग के प्रभारी अधिकारी एडीए निदेश जाटव का कहना है कि एनजीओ द्वारा कुछ किसानों को एक वर्ष का तो कुछ को दूसरे वर्ष का प्रमाण-पत्र दिया गया था, इसके बाद काम बंद हो गया है। उनका कहना है कि अब तक किसी किसान का इसके लिए रजिस्ट्रेशन तो नहीं है, लेकिन जिले में कई किसान है, जिन्हें विभाग की तरफ से योजनाओं की जानकारी देकर पारंपरिक खेती कराई जा रही है। उनका कहना है कि इसके लिए अब केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा दूसरी योजना बनाई जा रही है। उसके आने पर इस दिशा में बड़ा काम किया जाएगा।

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