इस बार वन विभाग नहीं रोपेगा एक भी पौधा, नहीं मिला लक्ष्य

शासन स्तर से जिले को नहीं दिया गया लक्ष्य, अब तक कारण नहीं आया सामने

By: anil rawat

Published: 22 Jun 2020, 11:44 AM IST

टीकमगढ़. बारिश का मौसम प्रकृति के श्रंगार और पर्यावरण को समृद्ध करने का समय होता है। लेकिन इस बार वन विभाग एक भी पौधा नहीं रोपेगा। इसका कारण विभाग को शासन स्तर से लक्ष्य न दिया जाना बताया जा रहा है। वहीं वन विभाग की नर्सरी में तैयार किए गए लाखों पौधे छतरपुर, पन्ना एवं सागर जिले में रोपने के लिए भेजे जा रहे है।


एक ओर पूरे देश के साथ ही जिले में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चल रही है, तो दूसरी और पर्यावरण संरक्षण का जिम्मा निभाने वाले वन विभाग को इस वर्ष पौधा-रोपण का लक्ष्य नहीं मिला है। विदित हो कि हर साल जिले में को 4 से 5 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य दिया जाता था। लेकिन इस बार विभाग को कोई लक्ष्य नहीं दिया गया है। इसके लिए शासन स्तर से बजट भी स्वीकृत नहीं किया गया है। इस बार बारिश के मौसम में विभाग द्वारा कोई पौधा-रोपण नहीं किया जाएगा।

 

बजट की कमी या स्थल चयन
जिले को लक्ष्य न मिलने के पीछे विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस बार बजट की कमी या सही स्थल चयन न किया जाना कारण बता रहे है। विभागीय सूत्रों की माने तो या तो पौधा-रोपण के लिए बजट का अभाव है या फिर विभाग द्वारा भेजे गए प्लान में सही तरीके से स्थल चयन नहीं किया गया होगा, इसलिए पौधा-रोपण की स्वीकृति नहीं दी गई है।


एक साल पहले दी जाती है प्लानिंग
विभाग की माने तो बारिश के समय में होने वाले पौधा-रोपण की प्लानिंग विभाग द्वारा एक वर्ष पूर्व तैयार कर शासन के पास भेजी जाती है। जिले से फरवरी से अप्रैल के बीच पूरी प्लानिंग कर शासन के पास भेजी जाती है। भोपाल स्तर पर इस प्लानिंग की समीक्षा की जाती है और इसके बाद बजट अलॉट किया जाता है। सूत्रों की माने तो पिछले वर्ष भी यह प्लानिंग भेजी गई थी।


10 लाख पौध तैयार
इस वर्ष भी जिले में पौधारोपण करने के लिए वन विभाग की नर्सरी में 10 लाख 1 हजार पौध तैयार की गई है। बरीघाट स्थित नर्सरी में यह पौध पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। इस बार भी वन विभाग ने जिले में पौधारोपण करने के लिए लगभग 1 लाख पौधे शीशम के, 1 लाख करंज के, डेढ़ लाख चिरौल के साथ ही बड़ी संख्या में आंवला, हर्रा, बहेड़ा, पापड़ा, कैंथ, हल्दू सहित अन्य पौधे तैयार किए थे। लेकिन अब जिले में लक्ष्य न होने के कारण इन्हें लगाने के लिए छतरपुर, सागर एवं पन्ना भेजा जा रहा है।

 

anil rawat Reporting
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