सद्गुरू हमें सीधा भगवान से मिला देते है: दीनबंधुदास

प्रिया प्रियतम महोत्सव के दूसरे दिन बताई सद्गुरू की महिमा

By: anil rawat

Updated: 27 May 2020, 10:50 PM IST

ओरछा. यदि हमें सच्चे गुरू मिल जाए तो समझो भगवान भी दूर नहीं है, लेकिन इसके जरूरी है कि हम अपने गुरूदेव के बताएं मार्ग का अनुशरण करें। तभी हमारा कल्याण होगा। अपने गुरू के वचनों पर विश्वास करके ही सबरी ने भगवान श्रीराम के दर्शन किए थे। यह बात कनक भवन मंदिर में चल रहे प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव के दूसरे दिन वृंदावनधाम से पधारे दीनबंधुदास महाराज ने कहीं।


प्रिया प्रियतम महोत्सव के दूसरे दिन कनक भवन में उपस्थित संतों ने भक्तमाल का सश्वर पाठ किया। इसके बाद शाम को दीनबंधुदास महाराज ने कथा प्रारंभ की। उन्होंने कहा कि भक्तमाली महाराज भगवत प्राप्त संत थे। जो उन्होंने कहा और जिसने उसे माना उसका जीवन ही बदल गया। ऐसे कई भक्त आज भी अपने संस्मरण मलूकपीठाधीश्वर महाराज को सुनते है।

 

 

शबरी की कथा सुनाते हुए उन्होंने ने कहा कि शबरी भील जाती में पैदा हुई, लेकिन जब उसे सच्चे गुरु मिले तो उसे भगवान ने स्वयं आकर दर्शन दिएं। यह शबरी की गुरु के वचनों में सच्ची श्रद्धा का ही परिणाम था, जिसका उसने जीवन पर्यंत पालन किया। महाराज ने कहा कि जब शबरी छोटी थी, तब उसके घर मे शिकार कर घर वाले लाते थे, जिससे उसको बहुत पीड़ा होती थी।

 

एक दिन वह घर से भाग कर संतों के आश्रम में पहुंच जाती। जहां वह संतों की सेवा बिना बताऐ करती है। जिसे देख संतों को आश्चर्य हुआ और एकदिन काम करते हए उन्होंने छोटी सी शबरी को देख लिया। बस यहीं से शबरी का जीवन बदल गया। गुरू की शरणागत होकर दिनभर संतसेवा में मगन रहने लगी। जब गुरू का अंतिम समय आया तो सबरी ने पूछा कि अब मेरा क्या होगा। इस पर गुरू ने कहा कि तुम्हे यहीं साधना करनी है, एक दिन भगवान श्रीराम आकर तुम्हें दर्शन देंगे। अपने गुरू के इन वचनों का पूरे जीवन पालन कर सबरी ने अंत में भगवान के दर्शन कर बैकुंठ धाम में जगह पाई। इस अवसर पर महंत रामानंददास, गंगादास महाराज, महंत अनुरुद्ध दास, राजेश गंगेले, द्वारिका मिश्रा, कमलेश मिश्रा, बबलू पस्तोर, रोहित रिछारिया सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

anil rawat Reporting
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