बुंदेलखण्ड के बंधा जी में पंच ऋ षिराजों का हुआ चातुर्मास, हुई मंगल कलश स्थापना

बुंदेलखंड के अति प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में आचार्यश्री विद्यासागर के मंगल आशीष से पंच ऋ षिराजो का मंगलमय चातुर्मास हो रहा है।

By: akhilesh lodhi

Published: 24 Jul 2021, 08:47 PM IST

टीकमगढ़.बुंदेलखंड के अति प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में आचार्यश्री विद्यासागर के मंगल आशीष से पंच ऋ षिराजो का मंगलमय चातुर्मास हो रहा है। सिद्धचक्र महामंडल विधान का विश्व शांति महायज्ञ एवं हवन के साथ समापन होगा। शनिवार को सिद्धचक्र विधान में 1024 अघ्र्य मुख्य पात्रों एवं विधान में शामिल सभी इंद्र इंद्राणी द्वारा मंडल पर समर्पित किए गए।
मुनिश्री विमल सागर महाराज ने विधान के समापन अवसर पर कहा कि भव्य आत्माओं आज 1024 अघ्र्य चढ़ा करके सिद्धचक्र विधान को पूरा कर दिया। रविवार को विश्व शांति महायज्ञ हवन के साथ विधान का निष्ठापन होगा। मुनिश्री विमल सागर महाराज ने सभी भक्तों को गुरु पूर्णिमा पर दोनों हाथों से आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा जो ज्ञान और दर्शन के नायक होते हैं। वह चारित्र रूपी समुद्र के समान गंभीर होते हैं। मुनिश्री ने कहा हमारा परम सौभाग्य है कि हम ऐसे कलिकाल में पैदा हुए हैं। जहां आचार्य भगवन विद्यासागर महामुनि राज का परम आशीष हम लोगों को प्राप्त हो रहा है।
प्रदीप जैन ने बताया कि रविवार की सुबह 7.30 बजे मूल मंदिर में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन होगा। दोपहर 12. 30 बजे मुनिसंघ मूल मंदिर से वेदी मैदान स्थित आचार्य विद्यासागर रजत सभागार पहुंचेंगे। बुंदेलखंड सहित अनेक राज्यों से भक्तोंं का आना जारी है। जैन दर्शन में चातुर्मास का विशेष महत्तव बतलाया गया है।


चातुर्मास 4 माह का वह समय होता है। जब बारिश शुरू हो जाती है। मुनि महाराज एक जगह रुक कर अपना धर्म ध्यान एवं भगवान की आराधना करते हैं। बारिश में अनेक प्रकार की जीवो की उत्पत्ति हो जाती है । वह जीव इतने छोटे होते हैं। हम उनको नग्न आंखों से नहीं देख सकते। उन जीवों को किसी प्रकार की हानि एवं वेदना नहीं पहुंचे। इसलिए जैन साधु 4 माह एक स्थान पर रहकर अपनी धर्म साधना करते हैं।
जैन धर्म मे अहिंसा पर विशेष जोर दिया गया है। संपूर्ण देश भर में जैन साधुओं के चातुर्मास शुरू हो रहे हैं। आचार्य विद्यासागर के आशीर्वाद से अतिशय क्षेत्र बंधा जी की पावन धरा पर पहली बार पंच ऋ षिराजो का चातुर्मास कलश स्थापना का कार्य रविवार को होने जा रहा है। मुनिश्री विम ल सागर मुनिश्री भाव सागर, मुनिश्री अनंत सागर, मुनिश्राी अचल सागर, मुनिश्री धर्म सागर महाराज का चतुर्मास पहली बार अतिशय क्षेत्र बंधा की पावन धरा पर हो रहा है। जो व्यक्ति चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना करता है। वह कलश रिद्धि सिद्धि मंत्रों द्वारा मंत्रित होता है। 4 माह तक वह कलश एक ही स्थान पर रखा जाता है। चतुर्मास पूरा होने पर कलश को उस भक्त को दिया जाता है। जिसने कलश की स्थापना की है। चतुर्मास कलश जिस व्यक्ति के घर में जाता है । उनके घर में सुख शांति समृद्धि का वास होता है।

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