समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों ने 1200 हैंक्टैयर का फर्जी तरीके से किया था पंजीयन

बल्देवगढ़ के वैसा समिति प्रबंधक और मोहनगढ़ समिति प्रबंधक के साथ अन्य समिति प्रबंधकों द्वारा फ र्जी तरीके से 373 किसानों का 12 सौ के करीब पंजीयन किया था।

By: akhilesh lodhi

Published: 30 Jun 2020, 06:00 AM IST


टीकमगढ़.बल्देवगढ़ के वैसा समिति प्रबंधक और मोहनगढ़ समिति प्रबंधक के साथ अन्य समिति प्रबंधकों द्वारा फ र्जी तरीके से 373 किसानों का 12 सौ के करीब पंजीयन किया था। जिसमें 6 अरब 45 करोड़ 53 लाख 11 हजार रुपए का बंटर बांट होना था। समिति प्रबंधकों की चालबाजी को जतारा एसडीएम और खाद्य विभाग के कनिष्ठ अधिकारी समझ गए। किसानों की शिकायतों की जांच की गई। उन्होंने मामले की जांच शुरू कर दी। जिसमें यह मामला सिद्ध पाया गया। मामले में पत्रिका ने खबर को पहले प्रकाशन किया था।
जिले की चार तहसीलों में 373 किसानों का समिति प्रबंधक और ऑपरेटरों द्वारा फ र्जी तरीके से 12 सौ हैक्टैयर का उपार्जन पंजीयन किया गया था। जिसमें 34 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी खरीद पर बेचा जाना था। उसका लाभ व्यापारियों और समिति प्रबंधकों को 6 अरब 45 करोड़ 53 लाख 11 हजार 900 रुपए का होना था। पीडि़त किसानों की शिकायत पर जतारा एसडीएम और जतारा कनिष्ठ अधिकारी द्वारा जांच की गई। जांच में यह रकबा वास्तविक रकबा भिन्न था। जतारा एसडीएम डॉ.सौरभ सोनवणे की पहल पर जांच टीम बनाई गई। जिसमें मोहनगढ़ समिति की जांच की गई। जिसमें 8011.152 गेहूं को बेचने से रोका गया। इन मामलों को जांच रिपोर्ट तैयार की गई। तैयार करके यह मामला जिला संयुक्त कार्यालय पहुंचाया गया। लेकिन महीनों से यह जांच रिपोर्ट ठंडे वस्ते में पड़ी हुई है। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
यह था समिति प्रबंधक और व्यापारियों का षडयंत
जताराए पलेराए लिधौरा और मोहनगढ़ के समिति प्रबंधकों ने किसानों की जमीनों केवास्तवित रकबा से 1 हजार 197ण्111 हैक्टैयर उपार्जन पंजीयन में दर्ज कराया गया। जो पूर्ण तरीके से फ र्जी था। सरकार ने एक हैक्टैयर पर 28 क्विंटल गेहूं डालने के निर्देश दिए थे। फर्जी पंजीयन का 33 हजार 534, 088 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए तैयार था। जिसकी कीमत 6 अरब 45 करोड़, 53 लाख 11 हजार 900 रुपए सरकार से आने थे। बाजार से सस्ते में गेहूं खरीदी कर 200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से समिति प्रबंधकों द्वारा 67 लाख 6 हजार 817.6 रुपए शासन को आर्थिक क्षति पहुंचा कर स्वयं लाभ कमाया जाना था। यह गेहूं जतारा एसडीएम और खाद्य विभाग कनिष्ठ अधिकारी द्वारा रूकवाया गया। दोषियों पर एफ आईआर दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा गया। मामले को लेकर जतारा कनिष्ठ खाद्य अधिकारी नरेश आर्य का कहना था मामले की जांच हो गई है। फर्जी किसानों की सूची भी भी मुख्यालय पहुंचा दी है।


जांच में दोषी पाया गया वैसा समिति प्रबंधक और कम्प्यूटर ऑपरेटर
प्राथमिक कृषि शाख सहकारी समिति मर्यादित वैसा के समिति प्रबंधक प्रमोद मिश्रा और कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपक यादव द्वारा 12 किसानों का फर्जी तरीके से पंजीय किया गया था। उनके द्वारा बाजार से सस्ता गेहूं खरीद कर 28 हैक्टैयर के पंजीयन का अनाज 771.12 क्विंटल बैचा गया। जिसकी कीमत 14 लाख 84 हजार रुपए से अधिक पाया गया। इस मामले में दोनों लोग दोषी पाए गए। दोनों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए संयुक्त कार्यालय में फ ाइल भेजी गई थी। लेकिन वहां पर इस मामले को रफ ादफ ा करने के प्रयास किए जा रहे है।
प्रशासन नहीं ली थी रूची
जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा 4 हैक्टैयर से अधिक रकबा की जांच मे रुचि नहीं ली गई। अगर पंजीयन के बाद संबंधित विभाग द्वारा किसानों के पंजीयन की जांच की जाती तो फ र्जी पंजीयनों का मामला सामने नहीं आता। इसके साथ ही किसानों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। जबकि फ र्जी पंजीयन के मामले में जतारा के समिति प्रबंधक पर मामला दर्ज किया गया है।
इनका कहना
मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है। दोषियों को किसी भी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा। मामले का फॉलोअप लेकर आगे कार्रवाई की जाएगी।
विकास आनंद प्रभारी जिला खाद्य विभाग टीकमगढ़।
मामले की जांच रिपोर्ट तैयार करके मुख्यालय पहुंचाई गई है। बरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
नरेश आर्य कनिष्ठ अधिकारी जतारा।

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