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टीकमगढ़

वरायटा घाट पर बने बांध तो लहलहाएं खेत और बुझे प्यास

जिले में जल संरक्षण के लिए प्राचीन समय में किए गए कामों का अध्ययन करने वाले इतिहासकार केपी त्रिपाठी बताते है कि जिले की जमीन का ढाल दक्षिण पश्चिम से पूर्वोत्तर की ओर है।

टीकमगढ़Jun 28, 2024 / 07:01 pm

टीकमगढ़। धसान नदी।

टीकमगढ़। धसान नदी।

धसान नदी पर ककरवाहा के पास बांध बनाने वर्षासे की जा रही मांग, बान सुजारा से आधा जिला अब भी प्यासा

टीकमगढ़. जिले में जामनी, धसान और जमडार जैसी नदियां होने के बाद भी जिला प्यासा बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इन नदियों पर सही जगह पर बांध का निर्माण कर पानी संग्रहण करने का प्रयास नहीं किया गया है। ऐसे यदि धसान नदी के वरायटा घाट पर बांध का निर्माण किया जाता है तो पूरे जिले को सिंचित करने के साथ ही पेयजल की समस्या का स्थाई समाधान किया जा सकता है। विदित हो कि इसके लिए 40 साल पहले प्रयास शुरू किया गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से वरायटा घाट पर बांध न बना कर बान सुजारा के पास बांध का निर्माण किया गया था।
धसान नदी से बहने वाला पानी पूरे जिले की प्यास बुझाने के साथ ही खेतों को सिंचित करने के लिए काफी है। सालों से धसान नदी के वरायटा घाट पर बांध बनाने की मांग की जा रही है। 40 साल पहले टीकमगढ़ के तत्कालीन विधायक सरदार सिंह ने भी इस बांध के निर्माण की मांग विधानसभा में उठाई थी और इसका सर्वे कर डीपीआर तैयार करने काम शुरू किया गया था, लेकिन इसके बाद जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति के कमी के चलते इस पर काम नहीं हुआ। वहीं इस नदी पर सालों की मांग के बाद बान सुजारा में बांध तो बनाया गया, लेकिन यह भी पूरे जिले की प्यास बुझाने के लिए न काफी साबित हो रहा है। विशेषज्ञों की माने तो यदि बान सुजारा की जगह इस बांध को वरायटा घाट पर बनाया जाता तो यह पूरे जिले की प्यास बुझाने में सहायक होता।
ऐसी है जिले की भूमि का ढाल
जिले में जल संरक्षण के लिए प्राचीन समय में किए गए कामों का अध्ययन करने वाले इतिहासकार केपी त्रिपाठी बताते है कि जिले की जमीन का ढाल दक्षिण पश्चिम से पूर्वोत्तर की ओर है। ऐसे में बारिश का पानी उत्तर पूर्व की नदियों के माध्यम से पूर्वोत्तर की ओर जाता है। ऐसे में जिले का सबसे ऊंचा स्थान धसान नदी पर ककरवाहा के किराने वरायटा घाट है। उनका कहना है कि यदि यहां पर बांध का निर्माण किया जाता है तो इससे पूरे जिले में पानी पहुंचाया जा सकता है। इस बांध के निर्माण से जिले के सभी चंदेलकालीन तालाबों को फिर से जीवित किया जा सकता है। त्रिपाठी का कहना है कि बान सुजारा बांध अपनी ही तलहटी में बसे बल्देवगढ़ के 35 गांवों को पानी नहीं दे पा रहा है, जबकि वरायटा पर बांध बनने से यह निवाड़ी को छोड़ कर जिले की सभी तहसीलों को पानी-पानी कर देता।
एक लाख हैक्टेयर में सिंचाई की सुविधा
विदित हो कि वर्तमान में जिले में बांध, नहर एवं तालाबों से लगभग 1 लाख हैक्टेयर जमीन में सिंचाई की सुविधा है। बांध सुजारा बांध से जहां 75 हजार हैक्टेयर में सिंचाई की सुविधा है तो हरपुरा नहर से 2 हजार हैक्टेयर और सिंचाई विभाग के तालाबों से 33 हजार हैक्टेयर जमीन सिंचित की जाती है। इस प्रकार जिले में कुल 1.10 लाख हैक्टेयर जमीन पर ही सिंचाई की सुविधा है। विदित हो कि जिले में कुल कृषि भूमि 2.5 लाख हैक्टेयर के लगभग है। ऐसे में आधे से अधिक जमीन पर अब भी मानसून के आधार पर खेती की जा रही है। यदि वरायट घाट पर बांध का निर्माण हो जाता है तो जिले की पूरी जमीन सिंचित हो जाएगी और पेयजल के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा।
बता रहे तकनीकी परेशानी
इस मामले में विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला का कहना था कि इसके लिए वह पूर्व में भी प्रयास कर चुके है, लेकिन बान सुजारा बांध बनने के बाद से अब इसमें तकनीकी परेशानी बताई जा रही है। बुंदेला का कहना है कि बान सुजारा बांध के निर्माण के बाद विभाग इसके 10 किमी के ऊपरी एरिया में दूसरे बांध का निर्माण न करने का नियम बता रहा है, हालांकि वरायटा घाट की दूरी बान सुजारा से 20 किमी के लगभग है। ऐसे मेें वह इस प्रयास करेंगे कि यहां पर बांध के निर्माण की अनुमति दी जाए।
कहते है अधिकारी
जिले भर में पानी की परेशानी दूर करने के लिए वरायटा घाट पर बांध परियोजना सबसे अधिक प्रभावी होगी। इसके लिए एक बार फिर से प्रयास किया जाएगा।
  • यादवेंद्र सिंह बुंदेला, विधायक, टीकमगढ़।

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