टीकमगढ़

छात्रों को मनोबल और सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए किए जाएगें प्रयास

निजी स्कूलों की तर्ज पर अब शासकीय स्कूलों में बाल पद्धति को अपनाने का कार्य जल्द ही किया जाएगा।

टीकमगढ़Feb 17, 2020 / 06:50 pm

akhilesh lodhi

Schools will be identified for child practice

टीकमगढ़.निजी स्कूलों की तर्ज पर अब शासकीय स्कूलों में बाल पद्धति को अपनाने का कार्य जल्द ही किया जाएगा। उनके लिए ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में संचालित स्कूलों को चयनित किया जाएगा। इसके साथ ही वहां के बच्चों को सीखने, टीवी, खेलने और पेटिंग के साथ अक्षर ज्ञान को समझने का वातावरण बनाया जाएगा।
कक्षा १ से ८वीं तक के छात्रों को अभी तक पास करने की योजना में कई स्कूलों के छात्रों को अक्षरों की पहचान तो ठीक गिनती भी सही तरीके से समझ नहीं आ रही है। कुछ ऐसे स्कूलों से शिक्ष का स्तर कम हो रहा है। हालांकि कुछ ही प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों का स्तर के सहयोग से प्रदेश में चौथे और सातवें स्थान पर आया था। इसके बाद बाला पद्धति को चालू करने के निर्देश दिए गए। जिसमें शिक्षा में कमजोर स्कूलों को चिन्हित करने का कार्य किया जा रहा है।
कमजोर बच्चों को यह सिखाया जाएगा
डीपीसी हरिश्चंद्र दुबे का कहना था कि बाला पद्धति से बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। इसमें छात्रों में अनुकूल सीखने का माहौल बनाया जाएगा। जिसमें अभ्यास और सीखने की प्रक्रिया के नई तरीके से समझाया जाएगा। जिससे बच्चों में एक अलग से उनके पढऩे की गति आएगी। वहां के वातावरण को भी पढ़ाई योग बनाया जाएगा। जिससे छात्रों का मन पढ़ाई की ओर बढ़े सके।

गतिविधियों के आधार पर होगी पढ़ाई
प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बाल पद्धति के अनुसार विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। जिसमें पेटिंग, खेल, खेल-खेल में गिनती को पढऩा, किताबों के अक्षरों को समझने के साथ उनकी पहचान कराई जाएगी। जिसमें टीवी, टीएलएम, कबाड़ में जुगाड़, शिक्षण को आकर्षक बनाने का माहौल बनाया जाएगा। जिसमें सम्पूर्ण भौतिक वातावरण दैनिक चर्चा को शामिल किया जाएगा।
इनका कहना
प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को पढाने के लिए नए तरीके अपनाए जा रहे है। जिससे छात्रों का स्तर पढ़ाई योग बन सके। उसके लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे है। हालांकि में अभी बाहर हूं।
हरिश्चद्र दुबे डीपीसी सर्व शिक्षा अभियान टीकमगढ़

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