सरकार के सेवको के लिए अलग अलग नियम

न्यायालय के आदेश के बाद भी न्याय के इंतजार में सेक्शन राईटर

By: vivek gupta

Published: 10 Apr 2019, 12:00 AM IST

टीकमगढ़..जिले में चुनाव कार्य के साथ ही राजस्व कार्य को लेकर नियुक्ति किए गए सेक्शन राईटर नौकरी के १५ वर्ष बाद भी कार्यालयो के चक्कर काटने को मजबूर है। जिले में उच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही प्रदेश सरकार के द्वारा जारी आदेश के बाद भी जिले मे सेक्शन राईटरो को सहायक वर्ग-3 के पद पर नियुक्ति नही मिली है । जिन्हें आदेश दिए गए उन्हें बाद में रिवर्ट करने के आदेश थमा दिए गए। जिले में २४ सेक्शन राईटरो की नियुक्ति २००३ से लेकर २००७ तक की गई।

सरकार की नौकरी करने वालो के लिए वैसे तो सभी जगह नियम एक से ही रहते है लेकिन टीकमगढ़ कलेक्टर कार्यालय में व्यक्तियो के अनुसार नियम बदलते रहे है। राजस्व विभाग में खसरा ,खतौनी,नामांतरण सहित राजस्व कार्य करने वाले सेक्शन राईटरो को लेकर देश के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा आदेश देने के बाद भी अमल नही किया गया है। पिछले कई वर्षो से कलेक्टर कार्यालय में मामले को लेकर नोटशीट चलती है,लेकिन कलेक्टरो के अनुसार बदलती रहती है।

न्यायालय के आदेश पर अमल नही
जिले में २४ सेक्शन राईटर पिछले १५ से २० वर्ष से काम कर रहे है। सामान्य प्रशासन विभाग के २९ सितंबर २०१४ के आदेश के अनुसार १० वर्ष या उससे अधिक सरकारी सेवा करने वाले दैनिक और अस्थाई कर्मचारी को नियुक्ति का अधिकार दिया गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के द्वारा ५३ याचिकाओ के निराकरण के दौरान १५ दिसंबर २०१० को सेक्शन राईटरो को नियमित करने के आदेश दिए थे,लेकिन राजस्व विभाग के द्वारा कोई कार्रवाई नही की गई।

 

हांलाकि न्यायालय के आदेश का हवाला देकर प्रदेश के १० जिलो के कलेक्टरो ने सेक्शन राईटरो को सहायक वर्ग-3 के पद पर नियुक्ति कर दी है। खास बात है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद प्रदेश के सभी सेक्शन राईटरो ने सामान्य प्रशासन,हाईकोर्ट के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी गुहार लगाई थी।

सबके लिए अलग अलग आदेश
टीकमगढ़ में ओमप्रकाश मिश्रा, दिनेश सेन,नसीम खां को ७ मई २००९ को आदेश जारी कर सेक्शन राईटर से सहायक वर्ग-3 के पद पर नियुक्ति की गई थी। इस मामले में खास बात है कि एक कर्मचारी ओमप्रकाश मिश्रा के शासकीय सेवारत रहते मौत हो जाने पर उनकी पत्नी मीना मिश्रा को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई ,जबकि उनके साथ ही आदेश में शामिल अन्य दो कर्मचारियो दिनेश कुमार सेन और नसीम खां को आदेश पलटते हुए सहायक वर्ग-३ से फिर सेक्शन राईटर के पद पर रिवर्ट कर दिया। जबकि अन्य जिलों मे सेक्शन राईटर से सहायक वर्ग-3 बने बाबू आज भी इसी पद पर कार्यरत हैं ।

 

टीकमगढ़ जिले में भेदभाव के साथ ही नियम कानून ताक पर रखने को लेकर बाबूराज माना जा रहा है। इसी प्रकार राजेन्द्र खरे सेक्शन राईटर से सहायक वर्ग-3 बनाए गए और शासकीय सेवारत रहते हुए मौत हो जाने पर उनके पुत्र अमित खरे को सहायक वर्ग-3 के ही पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दे दी गई,जो निवाडी में कार्यरत है।

१० जिलो में हो चुकी नियुक्ति
सेक्शन राईटरो के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष २०१२ में आदेश जारी कर सेक्शन राईटरो को सहायक वर्ग-३ के पद पर नियुक्ति देने की बात कही थी। वही हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष २०१० में प्रदेश के राजस्व कार्यालय से २३ जुलाई २०१० को पांच सदस्यीय कमेअी तय कर दी गई।लेकिन यह कार्रवाई फिर आगे नही बढी।

इसके बाद भी एक नोटशीट चलाई गई,लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नही हुई। इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पालन में प्रदेश के दमोह,भिंड़,सतना,देवास,अशोकनगर,रायसेन,बुरहानपुर,दतिया,श्योपुर और नरसिंहपुर जिलो में सेक्शन राईटरो को सहायक वर्ग-३ के पद पर नियुक्ति दे दी गई। टीकमगढ़ जिले में दो कदम आगे जाकर पहले कोर्ट के आदेश से नियुक्ति दी गई,फिर कोर्ट का हवाला देकर रिवर्ट कर दिया गया।
कहते है कि ..
लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी की जा रही है। चुनाव कार्य के बाद फाइल की जानकारी करके विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
सौरभ कुमार सुमन कलेक्टर टीकमगढ़

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