पोषक तत्त्व घटे,बीमार हो रही मिट्टी,लगातार घट रही ऑर्गेनिक कार्बन सहित अन्य तत्वों की मात्रा

जिले में मृदा परीक्षण का कार्य लक्ष्य से ज्यादा किया जा रहा है। इसके बाद भी खेती की मिट्टी लगातार बीमार हो रही है।

By: manish Dubesy

Published: 24 May 2018, 12:16 PM IST

अखिलेश लोधी.टीकमगढ़.जिले में मृदा परीक्षण का कार्य लक्ष्य से ज्यादा किया जा रहा है। इसके बाद भी खेती की मिट्टी लगातार बीमार हो रही है। ऑर्गेनिक कॉर्बन सहित मिट्टी को पोषण देने वाले अधिकांश सूक्ष्म तत्व निम्न स्तर पर पहुंच गए है। इसके बावजूद मिट्टी के उपचार की काशिशें नहीं की जा रही है और जिम्मेदार मौन है। मिट्टी ऊपरी सतह में ऑर्गेनिक कार्बन सहित नाइट्रोजन, सल्फर फास्फोरस पोटाश ,जिंक बोरोन मेग्नीशियम कॉपर, मेग्नीज, केल्शियम लोहा के सूक्ष्म तत्व होते है। जो मिट्टी के स्वस्थ्य और फसलों बढत के लिए जरूरी है। इनके कम होने मिट्टी बीमार होगी तो फसले कम होगी। यही कारण है कि जिले के किसानों की फसलों का उत्पादन लगातार घट रहा है। इसके आलावा खेतों के कीट भी नष्ट हो रहे है। जो भविष्य में खेती के लिए बड़े संकट की आहट है।


वर्ष 2015 से 2018 तक के नमूनों की जांच
मिट्टी परीक्षण प्रयोग शाला में वर्ष 2015 से वर्ष 2017-18 तक कुल 53 हजार 496 किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। वहीं नाईट्रोजन की मात्रा भी 50 प्रतिशत रिपोर्टर में कम पाया गया है। जबकि इसकी सामान्य मात्रा 250 से 400 का होना चाहिए। मिट्टी में खत्म हो रहा तीसरा मुख्य तत्व पोटिशियम है। यह बहुत कम प्रतिशत रिपोर्टस के निचले स्तर पर पाया गया है।


कें चुए गायब, नहीं हो रहा शोर
कुछ साल पहले तकखेतों से मिट्टी हटाते ही नजर आने वाले केंचुए भी अब दिखाई देना ही बंद हो गए है। किसान के सबसे अच्छे मित्र होने के बावजूद इनके गायब होने पर शोर न चिंता का विषय है। इसके अलावा नरवाई की आग ने मिट्टी के अन्य सूक्ष्म जीवों को मर कर मिट्टी को कठोर बना दिया है।

किसान नहीं डाल रहे पोषक तत्व


क्षेत्र में किसान जरूरत के हिसाब से मिट्टी में पोषक तत्व नहीं डाल रहे है। पोटेशियम तो किसान डालते ही नहीं है। यहां केवल डीएपी और सिंगल सुपर फास्फेट का ही उपयोग किसान कर रहे है। जबकि उन्हें मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद और पोषक तत्वों का इस्तमाल करना चाहिए।


ये है सूक्ष्म तत्व कम होने के कारण
जैविक खाद गोबर खाद,केंचुआ खाद या कचरे से बनी खाद का उपयोग न करना। नरवाई को जलाने से सूक्ष्म जीवों का नष्ट होना। लगातार एक ही प्रकार के यूरिया व खाद का उपयोग करना। फसल चक्र न अपनाना। बड़ी मात्रा मे खरपतवार और कीटनाशक दवाओं का छिडकाव करना।खेत को बिना आराम दि लगातार खेती करना।


सलाह
ऑर्गेनिक कॉर्बन की मात्रा बढाने क लिए कचरा खाद, गोबर खाद और केंचुआ खाद का प्रयोग करें। खेत मे जरूरत के अनुसार सूक्ष्म तत्व डाले। किसान मिट्टी परीक्षण जरूर करवाएं और आवश्यकता अनुसार पोषक तत्वा डालें। पोषक तत्वों की पूर्ति होगी और फसल अच्छी होगी।


कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा हीं दी जाती योजनाओं की जानकारी
करीब 10 वर्षो से जिला सूखे की चपेट में है। पानी कम होने के कारण अधिकांश भूमि खरीफ और रबी की खेती के समय खाली पड़ी रहती है। किसानों द्वारा दो से तीन और चार बार जुताई करवाई जाती है। लेकिन कृषि की भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को सलाह नहीं दी जा रही है। जिसके कारण कृषि की खेती से फसल का कम उत्पादन हो रहा है।


अलग-अलग फसलों की भूमि में होते है अलग तत्व
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खेती की फसलों में अलग-अलग तत्व होते है। खरीफ की फसल में अलग और रबी चना, मटर, सरसो, गेहूं और समूर की फसल में अलग तत्व होते है।


फैक्ट फायल
वर्ष लक्ष्य विश्लेषित नमूना मिट्टी परीक्षण कार्ड
2015-16 18000 8352 25056
2016-17 18000 24233 50169
2017-18 21008 21911 32793


कहते है अधिकारी
विभाग द्वारा मृदा परीक्षण कार्य लगातार किया जा रहा है। जिन किसानों के मिट्टी परीक्षण के नमूने नहीं आए है। उनके जल्द नमूने लेकर मृदा परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ किसानों के मिट्टी परीक्षण कार्ड बनाए जाएगें।
संजय श्रीवास्तव उपसंचालक कृषि विभाग टीकमगढ़।

manish Dubesy Desk
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