बच्चों के स्वास्थ्य से यहां हुई बड़ी लापरवाही, जिम्मेदार मौन

कृमिनाशक दवा : अधिकारी ही स्कूलों में नहीं पहुंचे दवा खिलाने

By: नितिन सदाफल

Published: 10 Feb 2018, 02:01 PM IST

टीकमगढ़.कृमिनाशक दवा खिलाकर बच्चोंको बेहतर स्वास्थ्य देने का दावा करने वाले अधिकारी ही स्कूलों में नहीं पहुंचे। दवा खिलाने के लिए प्रशासन ने निजी और सरकारी स्कूलों में प्रभारी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही कृमिनाशक बीमारी के बचाव के लिए वेनर पोस्टर और दवाएं दी गई थी। शुक्रवार सुबह पत्रिका ने आधा दर्जन से अधिक स्कूलों के हालातों को देखा,तो वहां की स्थिति उलट दिखी। सरकारी स्कूलों में दवा खिलाते दिखे , तो निजी स्कूलों में छात्र शिक्षक दवाओं के साथ प्रभारी का इंतजार करते रहे। दवा के इंजतार में प्राईवेट स्कूल वालों को एक घंटे देरी से छात्रों को छोडना पड़ा। शुक्रवार को पत्रिका की टीम ने सुबह से दोपहर तक निजी और सरकारी स्कूलों के हालातों को देखा तो वहां के हालात कृमि नाशक दिवस लेकर उलट दिखे। निजी स्कूल संचालक प्रभारी और वैनर पोस्टरों और दवाओं के इंतजार करते-करते घर चले गए।
सेहत को प्रभावित करते है पेट के कीड़े
कृमि संक्रमण बच्चों के पोषण को कमजोर करता है,यह कीटाणु खून का सेवन करते है। जिसके कारण छात्रों के विकास में रूकावट पैदा होती है। इसके साथ ही शरीर को मिलने वाले विटामिनों के कीटाणुओ को खा जाते है। इससे छात्रों की कार्य क्षमता प्रभावित होती है,मानसिक तनाव और थका हुआ महसूस करते है। इन कीटाणुओं के कारण छात्रों के शरीर में खून कम हो जाने सेबीमार हो जाते है।
सरकार ने छात्रों के पोषण के लिए चलाई योजनाएं
शिक्षकों का कहना है कि कृमि बीमारी को खत्म करने के लिए प्रशासन द्वारा स्कूल स्तर पर प्रचार सामग्री और दवा सहित प्रभारी नियुक्त के आदेश दिए गए है। इसके साथ ही शुक्रवार 9 फरवरी को संबंधित स्कूल में जाने की बात कही गई थी। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी और प्राईवेट स्कूलों में कृमि नाशक दवाओंको लेकर नहीं पहुंचे।
शिक्षा विभाग तक ही सीमित रहा कृमिनाशक दवाओ का आदेश
जिला प्रशासन ने आंगनवाडी केंद्रों और 19 वर्ष तक के छात्रों को दवा खिलाने के लिए आदेश दिए थे। लेकिन यह आदेश शिक्षा विभाग और संकुल केंद्र तक ही सीमित रहा है। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र सहित प्राईवेट स्कूलों में शुक्रवार को कृमिनाशक दवाएं नहीं पहुंच पाईहैं।दवाओं को खाने के लिए प्राईवेट जीपीएस एजुकेशनल अकादमी स्कूल,माँ सरस्वती स्कूल ,बुडेरा के बेस्ट फ्यूचर इंग्लिश स्कूल,बल्देवगढ़ संकुल केंद्र का जमुनियां स्कूल, भैरा सहित कई स्कूलों में दवाओं को नहीं दिया गया।

आंगनवाड़ी कें द्रों में नहीं बंटी दवाएं
इस समय मांगों को लेकर जिले की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनिश्चित कालीन धरना पर बैठी है। कृमिनाशक दवाओं का वितरण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दी गईथी। कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर रहने के कारण आंगनवाड़ी केंद्रों के छात्रों को दवाए ंनही दी गई।
ंकेस-01
मुख्यालय के नजदीक धर्मपुरा के पास निजी स्कूल जीपीएस एजुकेशनल अकादमी संचालक बालक दास यादव और मऊचंगी रोड़ माँ सरस्वती स्कूल संचालक राजा सिंह ने बताया कि शुक्रवार को कृमि नाशक दिवस की तैयारी गुरूवार को ही कर ली थी। स्कूल के सभी सभी छात्रों को कृमि नाशक दवा खाने छात्रों सहित अभिभावकों को सूचना दी गई। जिसके कारण आज स्कूल के सैकडों छात्र एकत्रित हो गए। सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक कृमिनाशक दवा का इंतजार करते रहे। लेकिन दोपहर तक भी कोई नहीं पहुंचा। जिसके कारण छात्रों की छुट्टी करनी पड़ी।
केस-02
नगर के वार्ड-5 के माध्यमिक विद्यालय के हेडमास्टर सुखलाल कुम्हार ने बताया कि स्कूल में कक्षा 6 और 8 वीं के कुल 150 छात्र हैै। इनको दवा खिलाने की जिम्मेदारी श्यामसुंदर खरे को दी गई है। माईक के माध्यम से छात्रों को कृमिनाशक की दवा खिलाईगई है।लेकिन छात्रों ने बताया कि शिक्षकों द्वारा कृमि की कोई जानकारी नहीं दी गई,कि इससे क्या बीमारी होती है।
केस-03
बल्देवगढ़ संकुल केंद्र के माध्यमिक स्कूल जमुनिया हेडमास्ट के एल अहिरवार और शासकीय नवीन भैरा स्कूल हेडमास्टर सीसी तिवारी ने बताया कि हमारी संस्था में विभाग द्वारा कृमि नाशक दवा खिलाने का ऐसा कोई आदेश नहीं आया और न ही कृमिनाशक बीमारी के बचाव के लिए कोईप्रचार सामग्री दी गई,स्कूल में कई कुपोषित छात्र है। जिनको दवाओं की सख्त जरूरत है।
इनका कहना
कृमि नाशक दवाओं को देने की जिम्म्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को दी गई थी। जिले के सभी प्राईवेट और सरकारी स्कूलों में दवाओं को दिया गया है। अगर प्राईवेट और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में दवाओं का वितरण नहीं किया गया तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बी एल लुहारिया प्रभारी डीईओ टीकमगढ़।

नितिन सदाफल Desk
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