नलकूप खनन के लिए आए 230 आवेदन,नहीं मिली अनुमति

नलकूप खनन के लिए आए 230 आवेदन,नहीं मिली अनुमति

Samved Jain | Publish: Mar, 14 2018 02:02:21 PM (IST) Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

अवर्षा के चलते सूखे की मार झेल रहे जिले में लगातार जल स्तर गिरता जा रहा है। पाताल की ओर पहुंच रहे पानी को संरक्षित करने के फेर में प्रशासन ने पिछले ती

टीकमगढ़.अवर्षा के चलते सूखे की मार झेल रहे जिले में लगातार जल स्तर गिरता जा रहा है। पाताल की ओर पहुंच रहे पानी को संरक्षित करने के फेर में प्रशासन ने पिछले तीन वर्षो से जिले में नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। तीन वर्षो से अक्टूबर से लेकर जून माह तक नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगा रहता है। इस दौरान पानी की चाहत रखने वाले सैकड़ों लोगों के द्वारा आवेदन करके कार्यालयों के चक्कर काटे जाते है। लेकिन इसे प्रशासन का अडियल रूख कहे या अपने आदेश का पालन,जिसके चलते अब तक सैकड़ों आवेदनों में से किसी को को भी खनन की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन बावजूद इसके जिले में नलकूप खनन रोका नहीं जा रहा है। लेकिन ऐसे मामलों में बोरिंग मशीन संचालकों के द्वारा अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है।
तीन वर्ष से लग रहा प्रतिबंध
जिले में पिछले तीन वर्षो से पर्याप्त बारिस नहीं हुई है। जिसके चलते जिले को जल अभाव ग्रस्त घोषित करते हुए तत्कालीन कलेक्टरों के द्वारा नलकूप खनन को प्रतिबंधित किया गया है। कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल के द्वारा 21 सितम्बर 2017 को आदेश जारी करते हुए 30 जून 2018 तक प्रतिबंध लगाया गया है। जिसके तहत प्रशासन की सक्षम अनुमति के बगैर कही भी नलकूप खनन किए जाने पर कार्रवाई निश्चित की गई है। लेकिन नलकूप खनन पर पाबंदी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सितम्बर 2017 से लगाए गए नलकूप खनन पर प्रतिबंध का असर तापमान बढ़ते ही दिखने लगा है। पिछले चार महीने में नलकूप खनन के लिए जिले में करीब 230 अर्जियां आ चुकी है। एसडीएम कार्यालय के साथ ही लोगों के द्वारा पीएचई कार्यालय में आवेदन जमा कराए जा रहे है। आवेदनों की जांच के लिए पीएचई के साथ ही नपा और राजस्व अमले को जबाबदारी दी गई है। खास बात है कि सैकड़ों आवेदनों के आने के बाद भी एक भी व्यक्ति को नलकूप खनन की इजाजत नहीं दी गई है।

अपने ही आदेश पर कैसे दे अनुमति
कलेक्टर द्वारा जिले में लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद अनूमति लिए जाने के विकल्प को ले जाने से लोगों को आशा जगी थी की अनुमति मिल जाएगी। इसके चलते पेयजल संकट से निजात पाने लोगों के द्वारा आवेदन भी किए गए। इन आवेदनों पर पीएचई के द्वारा नपा और राजस्व अमले से स्थल परीक्षण कराई गई। कई मामलों में पीएचई के द्वारा नलकूप खनन की अनुशंसा किए जाने के बाद भी दोबारा जांच के नाम पर अनुमति नहीं दी गई। आवेदन जमा कराने वाले लोगों ने बताया कि दो महीने पहले आवेदन दिया था,लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कई बार कार्यालयों के चक्कर लगा चुके है, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल रही है।
केंद्रीय मंत्री ने की थी सिफारिश
जिले के जतारा क्षेत्र के पंचमपुरा निवासी कल्लू कुशवाहा के द्वारा खनन की अनुमति के लिए किए गए आवेदन पर क्षेत्रीय सांसद और अब केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ.वीरेंद्र कुमार के द्वारा अनुमति दिए जाने का सिफारिशी पत्र दिया गया था। लेकिन इस मामले में भी आवेदक को अनुमति नहीं मिली। इसके साथ ही क्षेत्रीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों के द्वारा कई मामलों में अपने पत्र प्रशासन को भेजे गए ,लेकिन प्रशासन के द्वारा एक भी अनुमति जारी नहीं की गई।
गौशाला को अनुमति देने के बाद की निरस्त
पर्यटन नगरी ओरछा की सुरभि गौशाला को गौवंश के लिए पेयजल मुहैया कराने की गुहार पर कलेक्टर के द्वारा बोर खनन की अनुमति दी गई थी। लेकिन इस मामले में शासकीय जमीन पर खनन किए जाने की शिकायत मिलने पर इसे भी निरस्त कर दिया गया।
इस तरह होगा जल का संरक्षण
मौसम क ी बेरूखी और लगातार गिरते जलस्तर से अब हमें जागने की जरूरत है। वॉटर हार्वेस्टिंग के द्वारा अपने घरों और व्यवसायिक कॉम्पलेक्सों में सबसे जरूरी बारिश के पानी को सहेजा जाना चाहिए। इससे जलस्तर बेहतर होगा और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा शहर के सभी 27 वार्डो और बाजार क्षेत्र में मौजूद कुंओं के रखरखाव की सबसे ज्यादा जरूरत है। समाजसेवी मनोजबाबू चौबे, एडवोकेट योगेश खरे ने बताया कि कुएं पानी के बेहतर स्त्रोत होते है। इनसे जलस्तर को बेहतर बनाए रखने और पानी स्टोर करने में मदद मिलती है।
जानिए किसे मिलेगी इजाजत और किसे नहीं
जो व्यक्ति खनन के लिए परमिशन मांग रहा है। उसके पास यदि पीने के पानी का कोई साधन उपलब्ध नहीं है तो नपा और राजस्व अमले से स्थल परीक्षण कराने के बाद पीएचई की अनुशंसा पर खुद कलेक्टर के द्वारा खनन की अनुमति दी जाएगी। इसमें यह भी देखा जाएगा कि आवेदक के घर के पास या घर पर नपा की पाइपलाईन मौजूद है या फिर उसके पास पहले से पेयजल का कोई अन्य इंतजाम तो नहीं है। यदि आवेदक निर्माण के लिए ट्यूबबैल खनन करवाना चाहता है तो उसे परमिशन नहीं दी जाएगी।
सजा का प्रावधान
कलेक्टर द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का उल्लघंन करने पर मप्र पेयजल परिक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 के अनुसार 2 वर्ष तक के कारावास,2 हजार रूपए जुर्माना अथवा दोनों सजाओं से दंडित किया जा सकता है।
कलेक्टर ने दिए थे आदेश
टीकमगढ जिले को जलअभाव ग्रस्त घोषित करने पर कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने सितम्बर 2017 में जिले के निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया था। यह आदेश मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत जारी किया गया है। आदेश जिले के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 31 जून २०१८ तक लागू रहेगा।
गांव में जारी है अवैध खनन
जिले में प्रतिबंध के बावजूद शहरी क्षेत्र में भले ही लगाम हो ,लेकिन ग्रामीण अंचलों में बोरिंग मशीन संचालकों के द्वारा मोटी रकम वसूलकर खनन किया जा रहा है। इस मामले का दूसरा पहलू यह भी है कि कई स्थानों पर पीने के पानी की समस्या अधिक होने के कारण उन्हें प्रशासन के आदेश की नफरमानी करनी पड़ रही है।लेकिन इन सबके बीच बोरिंग मशीन संचालक फायदा लेने की जुगत में है,वहीं उन पर नजर रखने वाले क्षेत्रीय अधिकारी भी मौन साधे हुए है।
कहते है अधिकारी
जिले के जलस्तर के नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लगाया गया है। तय नियमों के अनुसार मापदंड पूरे न होने पर अनुमति नहीं दी गई है। प्रतिबंध के बाद भी खनन करने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
अभिजीत अग्रवाल कलेक्टर टीकमगढ़।

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