डिजीलेप एप शहर तक सीमित, ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं है असर, कैसे होगी घर बैठकर बच्चों की पढ़ाई

.कोरोना वायरस के चलते देश को लॉकडाउन कर दिया है। महामारी को देख केंद्र और प्रदेश सरकार ने आगामी आदेश तक निजी और शासकीय स्कूलों को खोलने पर प्रतिबंध कर दिया है।

By: akhilesh lodhi

Published: 17 Jun 2020, 06:00 AM IST

टीकमगढ़.कोरोना वायरस के चलते देश को लॉकडाउन कर दिया है। महामारी को देख केंद्र और प्रदेश सरकार ने आगामी आदेश तक निजी और शासकीय स्कूलों को खोलने पर प्रतिबंध कर दिया है। शिक्षा जारी रखने के लिए डिजीलेप एप के माध्यम से कक्षा १ से ८वीं तक १ लाख से अधिक और ९ से १२वीं तक के ३८ हजार छात्र-छात्राओं को पढ़ाने सोशल गु्रपों से जोड़ा गया है। यह एप सिफ शहर और नगरीय क्षेत्रों तक ही सक्रिय है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यवस्था स्वस्त पड़ी हुई है। जबकि इस व्यवस्था के सुधार में ७ शिक्षकों तो तैनात किया गया है।
शासन और शिक्षा विभाग द्वारा डिजिलेप एप के माध्यम भले ही कक्षा १ से १२वीं के तक १ लाख ५१ हजार १०५ से अधिक छात्र-छात्राओं को ६ हजार ९७७ शिक्षकों द्वारा ७६६ सोशल गु्रपों के माध्यम से प्रत्येक विषयों की परीक्षा कराई जा रही हो। पढ़ाई का रिजल्ट देखने के लिए प्रत्येक शिक्षक को पांच-पांच छात्र-छात्राओं के साथ पालकों से बात करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही संतुष्टि के लिए एक समर्थन फार्म को ऑनलाइन भरा जा रहा है। लेकिन यह व्यवस्था शहर और नगरीय क्षेत्रों तक ही सीमित है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजीलेप एप ऑनलाइन पढ़ाई को समझ नहीं पा रहे है। जिसके कारण पालकों में चिंता बनी हुई है।
समझ में नहीं आ रही पढ़ाई, कैसे करे सवाल
राजनगर वैसा निवासी रमाकांत यादव, ऋषि यादव, अभी यादव, बनयानी निवासी पवन लोधी, रोहन सिंह यादव और सुनीता अहिरवार ने बताया कि पापा के मोबाइल को गु्रपों से जोड़ लिया है। लेकिन उसकी पढ़ाई समझ नहीं आ रही है। जिसके कारण एक दिन भी डिजीलेप को नहीं खोला है। इस मोबाइल पर शिक्षकों के फोन भी नहीं आते है।


खेल और घर के कार्यो में निकल रहा समय
लुहरगुवां निवासी राजराजा कक्षा-१०, समीक्षा राजा कक्षा ९वीं, आशिकी राजा कक्षा ६वीं, केशनी कुम्हार कक्षा ५वीं, कामनी अहिरवार कक्षा ८वीं ने बताया कि स्कूल बंद होने के बाद डिजीलेप एप के बारे में शिक्षकों ने मोबाइल नम्बर मंगवाए थे। लेकिन उसके बारे में शिक्षा गृहण करने का तरीका नहीं बताया था। मार्च से अब तक एप द्वारा किसी भी प्रकार की पढ़ाई नहीं की गई और न ही शिक्षकों द्वारा फोन लगाकर समझाया गया।
सार्थिक सावित नहीं हो रहा टीवी और मोबाइल का सहारा
वायरस से बचने के लिए शिक्षा विभाग ने बच्चों को पढ़ाने के लिए मोबाइल और टीवी के साथ रडियों का सहारा लिया है। जिसमें सैकड़ों ग्रुपों को बनाया गया है। उन ग्रुपों के माध्यम से कक्षा १ से १२वीं तक के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई करवाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। लेकिन यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं हो पा रही है।
यह है स्थिति
जिले के हजारों छात्र-छात्राओं को ७६६ ग्रुपों के माध्यम से ६ हजार ९७७ शिक्षकों द्वारा पढाई करवाई जा रही है। हिन्दी, अग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, संस्कृत, भौतिकी शास्त, रसायन शास्त, बायलॉजी, राजनीति शास्त्र, भूगोल, समाज शास्त्र के साथ अन्य विषयों को मोबाइल के साथ टीवी के माध्यम से शिक्षा दी जाने लगी है। जिसमें टीवी और मोबाइल के माध्यम से हाई और हायर सेकेंडरी के २७ हजार छात्र-छात्राएं और १० हजार साधन विहीन की बात शिक्षा विभाग के अधिकारी कर रहे है। वहीं कक्षा १ से ८वीं तक २२ हजार छात्रों को ४४ जनशिक्षक केंद्रों को ३५२ ग्रुपों में जोड़ा गया है। लेकिन यह व्यवस्था रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।
इनका कहना
रविवार को डिजीलेप एप के माध्यम से कक्षा ९वीं का टेस्ट लिया गया है। अगर संबंधित शिक्षकों द्वारा छात्रों को एप के माध्यम से पढ़ाई और उसका फॉलोअप नहीं लिया जा रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। कोरोना काल में स्कूल को छोड़ ग्रुपों के माध्यम से पढ़ाई की जाएगी।
अनूप शर्मा जिला प्रभारी डिजीलेप एप ऑनलाइन शिक्षा विभाग टीकमगढ़।

akhilesh lodhi Reporting
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