पोखर का पानी पीकर चुका रहे विकास की कीमत

पोखर का पानी पीकर चुका रहे विकास की कीमत

Laxmi Kant Tiwari | Publish: Sep, 07 2018 01:49:47 PM (IST) Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

बान सुजारा के विस्थापितों के लिए बनाई गई कॉलोनी में नही मूलभूत सुविधाएं

टीकमगढ़. विकास के लिए जिन लोगों की जमीनें उजड़ गई और घर-मकान छूट गए, आज वहीं ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से महरूम बने हुए है। बान सुजारा के डूब क्षेत्र के विस्थापितों के लिए बनाई गई नवीन कॉलोनी में ग्रामीणों को सुविधाएं नही मिल रही है। आलम यह है कि यहां के रहवासी पोखर का गंदा पानी पीने को मजबूर है।
जिले की सबसे बड़ी बांध परियोजना बान सुजारा के निर्माण में एक दर्जन गांव की जमीनें डूब क्षेत्र में आई थी। जिन गांवों की जमीनें डूब क्षेत्र में आई थी, उनके विस्थापितों के लिए शासन द्वारा पास में ही नवीन पुरैनिया नाम से कॉलोनी का निर्माण किया गया था। विस्थापितों के लिए बनाई गई इस कॉलोनी में सडक़, पानी, सामुदायिक भवन, मंदिर सहित तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जानी थी। लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण यहां पर रह रहे विस्थापितों को सडक़, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नही हो रही है।
पोखर का पी रहे पानी: इस कॉलोनी में पेयजल की सुविधा न होने के कारण लोगों को पोखर का पानी पीना पड़ रहा है। कॉलोनी में अब तक इस मूलभूत सुविधा के लिए प्रयास न होने के कारण लोग काफी परेशान है। कॉलोनी के पास ही बने एक पोखर में आ रहे बारिश के पानी से लोग अपनी प्यास बुझ रहे है। लोगों का कहना है कि इस पोखर का पानी जब साफ हो जाता है, तो उसे ही लोग पीने के लिए उपयोग करते है। पोखर का पानी भरने के लिए केवल महिला ही इसके अंदर जाती है, ताकि पानी गंदा न हो। यही महिला क्रम से सबके बर्तनों में पोखर का पानी भर देती है।

पहली बार भरा गया है बांध: विदित हो कि इस बार पहली बार बान सुजारा बांध को भरा गया है। बांध के भरे जाने के कारण डूब क्षेत्र में आए सभी गांवों को खाली करा दिया गया है। गांव खाली होने से सभी विस्थापित अब इस कॉलोनी में आकर बस गए है। विभाग द्वारा इस बार भले जाने वाले बांध को लेकर तो सारी तैयारियां पहले से कर ली गई थी, लेकिन विस्थापितों की कॉलोनी की सुविधाओं को लेकर कोई ध्यान नही दिया गया है। यही कारण है कि लोग यहां पर पानी के लिए भी परेशान बने हुए है।
सडक़ हुई दलदल: यहां पर रहने वाले लोगों की माने तो लगातार बारिश के कारण गांव की सडक़ भी दलदल में तब्दील हो गई है। सडक़ पक्की न होने के कारण बारिश में पूरी मिट्टी गीली हो गई है। इस पर से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। यहां पर रहने वाले जमुना प्रयाद पटैरिया, गोवद्र्धन यादव, राममिलन पटैरिया, राकेश चढ़ार, रानू रैकवार, राजाराम रैकवार एवं राजेन्द्र सिंह सहित अनेक लोगों ने बताया कि कॉलोनी में पानी की सबसे बड़ी समस्या बनी है। वह लोग पोखर का पानी निकाल कर उपयोग कर रहे है। इस संबंध में कॉलोनी के इंचार्ज एवं एसडीओ जितेन्द्र यादव से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन नही उठाया।

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