वनों की कटाई नहीं रोक पा रहे वन रेंजर, पट्टों की लालच में अधाधुंध की गई लाखों पेड़ पौधों की कटाई

डागांव धसान क्षेत्र के साथ भडरा और मोहनगढ़ में पट्टों को लेकर ग्रामीणों द्वारा बेशकीमती पेड़ों को काटकर वनों में मैदान बना दिया है।

By: akhilesh lodhi

Published: 05 Sep 2020, 05:00 AM IST

टीकमगढ़.बडागांव धसान क्षेत्र के साथ भडरा और मोहनगढ़ में पट्टों को लेकर ग्रामीणों द्वारा बेशकीमती पेड़ों को काटकर वनों में मैदान बना दिया है। लेकिन टीकमगढ़ रेंजर इस कटाई को रोक नहीं पाए है। जिसके कारण जंगलों की सुरक्षा पर संदेह होने लगा है। जंगलों को काटने वाले लोगों पर होने वाली कार्रवाई में रेंजरों द्वारा खानापूर्ति की सूचना मिल रही है।
टीकमगढ़ वनरेंज इन दिनों सुरक्षा से दूरियां बना रहा है। जिसके कारण मोहनगढ़ के विजरावन, वनगांय, मस्तापुर के साथ लार, मजना के भडरा, सपौन, डूडा और बडमाडई खास के वनों में खड़े बेशकीमती पेड़ों को काट दिया गया है। इन स्थानों पर तैनात वनरक्षकों के साथ रेंजर की लापरवाही सामने आ रही है। जिसके कारण जिले के घने जंगल मैदान होते जा रहे है। जबकि वनों की कटाई रोकने के लिए भडऱा निवासी दशरथ पाल, धनीराम पांडे, राजेंद्र पटेरिया, दयाराम मिश्रा, कमल पाल, जगदीश आदिवासी, रामकिशन आदिवासी, रमेश आदिवासी, हरनारायण आदिवासी, कमल राय, हरि बल्लभ रावत, संतोष पांडे, कमल कांत पटेरिया द्वारा ज्ञापन भी दिया गया था। लेकिन रेंजर द्वारा कार्रवाई में खानापूर्ति की गई है।
११ दिन चल थी कटाई, इसके बाद भी नहीं जागा था वन विभाग
भडऱा और मोहनगढ़ के विजरावन गांव में जंगलों की कटाई ११ चली थी। जब वनों की कटाई नहीं रोकी गई तो काटे गए जंगलों का निरीक्षण जतारा विधायक द्वारा किया गया था। लेकिन रेंजरों की लापवाही के कारण जंगलों की कटाई रूकने का नाम नहीं ले रही है। लोगों का कहना है कि टीकमगढ़ में जब से नए रेंजर आए है। तब से वनों की कटाई ने जोर पकड़ लिया है। जिससे वनों में उगने वाले पौधों को भी नुकसान होने लगा है।
वन क्षेत्रों में दिखाई नहीं देेते वन कर्मचारी
मोहनगढ़ के वनगांय, बिजरावन के साथ जतारा के लार और टीकमगढ़ के भडऱा में तैनात वन कर्मचारी भी कटाई के समय दिखाई नहीं दे रहे है। इसके साथ ही वनों की कटाई रोकने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण लाखों की संख्या में पेड़ों को काट दिया गया है। अगर समय रहते वन विभाग द्वारा कटाई को नहीं रोका गया तो जल्द ही जिले के वनों का सफाया हो जाएगा।
काट दिए गए लाखों पेड़ पौधें
मोहनगढ़ के साथ जतारा और टीकमगढ़ के जंगलों की अवैध कटाई की जा रही है। इन वनों में कई प्रकार के पेड़ पौधे उग रहे है। इसके साथ ही कई प्रकार के पेड़ पौधे लगाए बगैर ही बड़े हो गए है। उन पौधों से जंगल सघन लगने लगा है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों द्वारा वनों की कटाई तेज गति से की जा रही है। हरियाली देने वाले पौधों को भी काट दिया गया है।


पट्टों की लालच में काट दिए जंगल
वन विभाग के साथ ग्रामीणों द्वारा आदिवासियों के साथ अन्य लोगों को पट्टे स्वीकृति कराने और वनों की भूमि पर कब्जा करने के एवज में उकसाया गया है। जिसके कारण जंगलों की कटाई कर दी गई है। लेकिन टीकमगढ़ रेंजर द्वारा कटाई को रोका नहीं गया है। वन रक्षकों के साथ ग्रामीणों द्वारा १५ जुलाई से लगातार सूचनाएं दी गई है। लेकिन उनके द्वारा न तो डीएफओ को जानकारी दी गई और न ही सीसीएफ को सूचना भेजी गई।
एक दूसरे पर थाप रहे जिम्मेदारी
वनों की कटाई को लेकर डीएफओ से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि कार्रवाई करने के लिए टीकमगढ़ रेंजर राजेंद्र पस्तौर और एसडीओ एसपी शाख्य को जिम्मेदारी दी गई है। मामले में टीकमगढ़ रेंजर से बात की गई तो उनका कहना था कि मुझे अधिकार नहीं है। यह जानकारी डीएफओ को होगी।
इनका कहना
मामले की जानकारी डीएफओ को है। उन्हीं के द्वारा कार्रवाई करवाई गई है।
राजेंद्र पस्तौर रेंजर टीकमगढ़।
मामले में कार्रवाई करने की जिम्मेदारी रेंजर और एसडीओ को सौंपी गई थी। उनके पास कार्रवाई की सारी जानकारी है।
एपी सिंह सेंगर डीएफओ टीकमगढ़।
टीकमगढ़ में वनों की कटाई हो गई है। इसकी जानकारी नहीं है। टीकमगढ़ रेंजर द्वारा वनों की सुरक्षा करने में लापरवाही की जा रही है तो नए रेंजर के कार्यकाल में काटे गए वनों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही उन पर विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
आरपी राय सीसीएफ छतरपुर।

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