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टीकमगढ़

विधानसभा की छत्ता बदली, लेकिन तालाब का छलनी होना नहीं बदला

महेंद्र सागर तालाब के छरिया

टीकमगढ़Jun 26, 2024 / 07:46 pm

akhilesh lodhi

महेंद्र सागर तालाब के छरिया

महेंद्र सागर तालाब के छरिया

अब छरिया चोर कौन, प्रशासन क्यों नहीं कर रहा कार्रवाई, प्रशासन शिकायत का कर रहा इंतजार

टीकमगढ़. प्रदेश सरकार के जल गंगा संर्वधन अभियान आदेश की आड में खनन माफियाओं ने लाइफ लाइन कहे जाने वाले महेंद्र सागर को छलनी करना शुरू कर दिया हैं। जबकि यह आदेश नगरपालिका के इस तालाब में लागू नहीं होता हैं। वहीं कार्रवाई करने के लिए जिला प्रशासन शिकायत का इंतजार करता रहा। जब शाम के समय जलसंसाधन विभाग ने तहसीलदार, पुलिस और खनिज को लिखित सूचना दी। उसके बाद विभाग ने वाहनों से भरी खदान में से मात्र एक ट्रैक्टर ट्राली को कब्जे में लिया। उसके बाद भी छरिया की खुदाम रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। इस समय यह मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़े हुए हैं।
शहर के महेंद्र सागर तालाब से मंगलवार के दिन से रात तक अवैध रूप से छरिया का उत्खनन कर बेचा गया। यह उत्खनन प्रदेश सरकार के एक आदेश की आड़ में किया गया हैं। जबकि सरकार का यह आदेश इस तालाब पर लागू नहीं हंै। उसके बाद भी जिला प्रशासन शिकायत का इंतजार कर रहा हैं। शिकायत दी तो कार्रवाई में खाना पूर्ति हुई। दर्जनों की संख्या में रखे ट्रैक्टर ट्राली, डंपर और तीन मशीनों में से एक ट्रैक्टर ट्राली को पक ड लिया गया। फिर भी खनन नहीं रुका। यह तालाब जल संसाधन विभाग का बताया जा रहा हैं। छरिया खुदाई को रोकने के लिए जलसंसाधन विभाग के इंजीनियन ने शाम ५:२० बजे दिए लिखित पत्र में कहा कि तालाब में तीन जेसीबी मशीने खुदाई कर रही हैं और डंपर और ट्रैक्टर ट्रालियों द्वारा छरिया उठाया जा रहा हैं। एक डंपर नंबर एमपी ३६ एच ०४८० के साथ अन्य बगैर नंबर के हैं। बताया गया कि इस में पांच लोगों की मशीने काम कर रही थी।
छारिया चोर का आया था पूर्व में नाम
विधानसभा चुनाव के पूर्व भी महेंद्र सागर तालाब से छरिया का अवैध उत्खनन हुआ था। जिसमें छरिया चोर नाम का शब्द खूब वायरल हुआ था, लेकिन चुनाव के बाद टीकमगढ़ विधानसभा की सत्ता बदली, विधायक बदला और फिर तालाब में खनन शुरू होने लगा। इसमें सिर्फ उत्खनन करने वाले बदल गए, लेकिन इस परिस्थिति में छरिया चोर किसे कहा जाए।
प्रदेश सरकार की आड में हुआ उत्खनन, राजस्व विभाग के अधिकारियों को किया गुमराह
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत नगर पालिका और ग्राम पंचायतों के आधिपत्य में आने वाले तालाबों के गहरीकरण व समतलीकरण के चलते मिट्टी उठाने का आदेश जारी हुआ था। जिसमें जनसेवा के रूप में तालाब से मिट्टी उठाने के लिए कहा गया था, लेकिन टीकमगढ़ में छरिया चोरी की लालच में सरकार के आदेश से तालाब में गड्ढे हो गए हैं। जबकि महेंद्र सागर तालाब सिंचाई विभाग में आता है। सिंचाई विभाग की बिना अनुमति के तालाब को खोदना नियम विरुद्ध माना गया है।
सिंचाई विभाग ने लिखा पत्र
तालाब के अवैध उत्खनन को रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने २५ जून मंगलवार को लिखित पत्र खनिज विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस के साथ अन्य अधिकारियों को दिया। पत्र मिलने के बाद राजस्व विभाग के अधिकारी जांच करने आए। खनन कर्ताओं ने प्रदेश सरकार का आदेश दिखा दिया। उसके बाद जांच अधिकारी वापस हो गए। फिर खनिज विभाग की टीम जांच करने पहुंची। उन्होंने कई वाहनों में से एक ट्रैक्टर ट्राली को पकड़ा। फिर पुन: खनन होना शुरू हो गया।
इनका कहना
विभाग द्वारा शिकायत की गई थी, कार्रवाई करने के लिए मौके पर पहुुंचे तो खनन करने वाले ट्रैक्टर ट्राली छोडक़र भाग गए। दूसरे ड्राइवर की मद्द से वाहन को देहात थाना में रखवा दिया हैं। ट्रैक्टर मालिक अभी आया नहीं हैं। इसके कारण से कार्रवाई नहीं हुई हैं। फिर से खनन शुरू हो गया है तो विभाग की शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी।
कुलदीप जैन, निरीक्षक खनिज विभाग टीकमगढ़।

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