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टीकमगढ़

ऐसा क्या हुआ कि महंत को बोलना पड़ा ‘चाचा’-देखें पूरी खबर

वैदपुरा के जंगल बचाने की मुहिम का पांच दिन बाद नाटकीय रूप से हुआ पटाक्षेप टीकमगढ़. वैदपुर के जंगलों को लेकर हुए घटनाक्रम से शनिवार को पूरे जिले के साथ ही प्रदेश में उबाल आ गया था। पांच दिन बाद उसका नाटकीय रूप से पटाक्षेप हो गया। गुरुवार को सोशल मीडिया पर धजरई महंत और […]

टीकमगढ़Jun 28, 2024 / 01:15 am

हामिद खान

टीकमगढ़। वीडियो में साथ मेें आए महंत सीताराम दास और पूर्व विधायक चतुर्वेदी।

टीकमगढ़। वीडियो में साथ मेें आए महंत सीताराम दास और पूर्व विधायक चतुर्वेदी।

वैदपुरा के जंगल बचाने की मुहिम का पांच दिन बाद नाटकीय रूप से हुआ पटाक्षेप

टीकमगढ़. वैदपुर के जंगलों को लेकर हुए घटनाक्रम से शनिवार को पूरे जिले के साथ ही प्रदेश में उबाल आ गया था। पांच दिन बाद उसका नाटकीय रूप से पटाक्षेप हो गया। गुरुवार को सोशल मीडिया पर धजरई महंत और छतरपुर से कांग्रेस के पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी का एक वीडियो सामने आया। जिसमें दोनों के बोल बदले हुए है और इस विवाद का कारण गलतफहमी बता रहे है।
सरकार द्वारा वैदपुर के जंगल में 12 हैक्टेयर की पायरोफ्लाइड की खदान छतरपुर से कांग्रेस के पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी पज्जन की फर्म खजुराहो मिनरल्स के नाम स्वीकृत की गई है। इस खदान के क्षेत्र में आने वाले पेड़ों को कटने को लेकर धजरई धाम के महंत सीताराम दास महाराज ने 22 जून को आंदोलन शुरू किया था। वैदपुर पहुंच कर चिपको आंदोलन के बाद महंत अपने आश्रम लौट आए तो कुछ ही देर में पूर्व विधायक पज्जन चतुर्वेदी वहां पहुंच गए। इसके बाद दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ और आक्रोशित होकर महंत सीताराम दास ने लाठी उठा कर इन लोगों को आश्रम से बाहर निकाल दिया। वहीं उन्होंने अपने समर्थकों के साथ ही धजरई तिगेला पर जाम लगा दिया था। इस जाम से 5 घंटे लोग परेशान हुए थे तो पुलिस को भी इस मामले में पज्जन चतुर्वेदी, अनीस खान सहित एक अन्य पर मामला दर्ज करना पड़ा था। वहीं महंत सीताराम दास ने इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देकर गिरफ्तारी की मांग की थी और कहा था कि वह एक भी पेड़ नहीं कटने देंगे।
वीडियो आया सामने
इस घटना के दो दिन बाद से ही सूचनाएं सामने आने लगी थी कि इस मामले में दोनों के बीच सुलह हो गई है। बताया जा रहा था कि दोनों के पक्ष के संतों ने ही इस मामले में विवाद शांत कराने की पहल की थी। इसके बाद दोनों लोग ओरछा के एक आश्रम पहुंचे थे जहां पर दोनों के बीच समझौता हुआ था। गुरुवार को इसका वीडियो भी सामने आया गया। धजरई धाम के महंत सीताराम दास ने खुद इसका एक पक्ष अपने सोशल मीडिया आईडी पर पोस्ट किया था तो कुछ ही देर में इसका पूरा पार्ट लोगों के सामने आ गया। इसमें पहले धजरई धाम के महंत सीताराम दास अपना पक्ष रखते हुए कह रहे है कि वह एक अखबार की खबर को पढ़ कर गलतफहमी हो गई थी। चाचा (पज्जन) ने बताया कि 12 हैक्टेयर में लगने वाली खदान की जगह उन्होंने वन विभाग को इतनी ही जमीन खरीद कर दी है और पेड़ लगाने के लिए 2.63 करोड़ रुपए दिए है। साधु और ब्राह्मणों को लड़ना नहीं चाहिए। न समझी के कारण यह विवाद हुआ था अब गलतफहमी दूर हो गई है और दोनों मिलकर इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे। वहीं वीडियो में पज्जन चतुर्वेदी कहते है कि वह घर-परिवार के लोग है। गलतफहमी के कारण खींचतान हो गई थी। कुछ लोग पीछे से इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे। अब पूरा मामला साफ हो गया है और वह इस परियोजना के अतिरिक्त भी पेड़ लगाएंगे। वह छतरपुर में यह काम करते आ रहे है। पर्यावरण का संरक्षण बहुत जरूरी है।

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