बंद पड़ी रेत खदानें, रात और दिन में ट्राला, ट्रैक्टर मार रहे फर्राटा

जिले में रेत की २२ से अधिक खदानें और एक ही रेत डम्प विभाग में दर्ज है। जहां एक ही रेत खदान दांत गौरा में चालू है।

By: akhilesh lodhi

Published: 18 Feb 2020, 06:00 AM IST


टीकमगढ़.जिले में रेत की २२ से अधिक खदानें और एक ही रेत डम्प विभाग में दर्ज है। जहां एक ही रेत खदान दांत गौरा में चालू है। इसके साथ ही लार खुर्द की उरनदी, रामगढ़ में अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। वहां से दिन और रात में ट्रालों और ट्रालियों से रेत भरकर शहर और उप्र के शहरों में खफाई जा रही है। वहीं मोहनगढ़ तहसील के केशरमढ़ में व्यापार के लिए स्टॉक यार्ड की अनुमति पांच माह पूर्व समाप्त हो गई थी। खनिज विभाग के अधिकारी पूर्ण दस्तावेज वाले वाहनों को पकड़ता है और अवैध वाहनों को बचाने का प्रयास किया जाता है। जिसकी शिकायतें मांछी निवासी हरगोविंद्र यादव के साथ अन्य ने कलेक्टर से की है।
रेत नीति के तहत जिले में खदानों से रेत निकालना प्रतिबंध है। लेकिन संबंधित विभाग और थाना प्रभारियों की मिलीभगत से रेत खदानों का उठाव जमकर किया जा रहा है। जिसमें पुलिस कर्मचारियों के साथ नेताओं के वाहनों द्वारा शहर में रेत बेची जा रही है। वहीं जामनी, उर नदी, धसान, बेतवा, जमडार सहित अन्य नदियों के किनारे बसे गांवों के लोगों का मुख्य व्यवसाह रेत हो गया है। यहां तक की इस व्यवसाह में खनिज विभाग से लेकर पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों सहित नेताओं ने भी कब्जा जमा लिया है। जहां रेत कारोबारियों के जतारा थाना, पलेरा थाना, मजना पुलिस चौकी, खरगापुर थाना, बल्देवगढ़ थाना, देहात थाना के साथ सिटी कोतवाली में टोकन और वाहनों के आगे लिखा नाम चलने की बात ड्राइबरों द्वारा कही गई है।
इन जगहों पर लगे रहते रेत के अवैध वाहन
आरटीओ कार्यालय से लेकर अम्बेड़कर चौराहा, झिरकी बगिया से लेकर अस्पताल, कुंवरपुरा रोड़ से लेकर चकरा तिगैला और झांसी रोड़ से लेकर संयुक्त कलेक्टर कार्यालय तक रेत के अवैध वाहन मुख्य सड़कों पर खड़े रहते है। जिसकी जानकारी सिटी कोतवाली, देहात थाना और खनिज विभाग के अधिकारियों को है।
बगैर पिटपास के आ रही शहर में रेत
रेत खदानें चालू होने के बाद भी शहर में सैकड़ों ओवरलोड़ ट्रांली रेत शहर में आ रही है। जिनके पास न तो वाहनों के जरूर दस्तावेज मिलेगें और न ही पिटपास। प्रत्येक रेत कारोबारी ६० से ७० ट्रैक्टर ट्रांली को लेक र अवैध रेत शहर में ला रहे है। उन पर न तो संबंधित विभाग के साथ देहात थाना पुलिस कार्रवाई करती और न ही कोतावाली पुलिस।


इन खदानों पर नहीं रेत, इसके बाद भी शहर में रेत
विभाग के अनुसार जिले में प्रेमपुरा रेत खदान, बडमाडई, रामगढ़, पराई नदी, थरघाट, पिपरट घाट, हदयनगर, बम्होरी नकीवन, महेबा चक्र, खेरा मोहनगढ़ में रेत नहीं है। वहीं विजयपुर ,खेरा, टांनगा, वीरपुरा, उपरार, सफरार, पचौरा, रामगढ़, संजयनगर, कछौरा, भानपुरा, निवाड़ी, ओरछा, मोहनगढ़ सहित अन्य स्थानों से रेत नहीं है। लेकिन विभाग द्वारा जांच की जाए तो सबसे अधिक रेत इन्हीं बंद रेत खदानों से रेत निकाली जा रही है।
पांच माह पहले हो चुकी भण्डार स्वीकृति की समाप्ति
मोहनगढ़ तहसील के केशरमढ़ में आरके जैन इनफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खनिज उत्पादों का भण्डारण करने के लिए २७ मार्च २०१८ से २६ सितम्बर २०१९ तक स्वीकृति ली गई थी। लेकिन यह स्वीकृति पांच माह पहले समाप्त हो गई है। इसके बाद भी खनिज विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है। जहां पर अवैध उत्खनन के साथ अन्य खनिज उत्पादों का भण्डारण किया जा रहा है।
यहां बनाई जा रही रेत
रेत का व्यवसाह चरम सीमा पर है। जहां किसानों ने भी मुख्य कार्य छोड़ खेतों से मिट्टी निकालकर रेत बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। जिसमें सबसे ज्यादा समर्रा, राधेपुर, पौटेया, अजनौर, सापौन, रसोई, नगारा, सांतखेरा, सुंदरपुर, पठलाखेरा, सूडाधर्मपुरा, रामनगर, बडमाडई, बुडेरा, हनुमानसागर के साथ सैकड़ों गांवों में कार्य शुरू हो गया है।
इनका कहना
जिले में एक ही रेत खदान चालू और एक ही रेत का डम्प लगा हुआ है। रेत चौरी के मामलों पर भी कार्रवाई की जा रही है। जहां-जहां रेत चौरी की जा रही है। उन स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है। इसके बाद टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशांत तिवारी खनिज अधिकारी टीकमगढ़।

akhilesh lodhi Reporting
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