घर से ही की शक्ति की आराधना, मंदिरों में लटके रहे ताले


प्रशासन ने हर गांव में बैठाया था पहरा

टीकमगढ़/जतारा. ऐसा पहली बार हुआ है, जब चैत्र नवरात्र का पूजन महिलाओं को अपने घरों पर ही करना पड़ा है। कोरोना के कारण महिलाओं ने बोझिल मन से घरों में मातारानी की पूजन किया और दुआ की वह जल्द ही पूरे विश्व को इस कष्ट से दूर करें। ऐसे में जिले के सभी प्रमुख मंदिर खाली पड़े रहे है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने पहले ही सभी मंदिरों को बंद करा दिया था।
बुधवार से शुरू हुए चैत्र नवरात्र में महिलाओं ने अपने घरों पर जगत जननी का पूजन किया। महिलाओं ने सुबह से पूरा सामान बनाया और घरों पर ही देवी जी के चित्र का पूजन किया और उनके नाम का तुलसी जी में जल अर्पित किया। हालांकि कुछ वृद्ध महिलाओं का मन नहीं माना और वह जिद् करके मंदिरों में पहुंची। ऐसी महिलाओं की संख्या काफी कम रही।
बाहर चढ़ाया जल: नगर के प्रसिद्ध छोटी देवी मंदिर एवं बड़ी देवी मंदिर को प्रशासन ने बंद करा दिया था। पुजारियों ने यहां पर ताले डाल दिए थे, ऐसे में महिलाओं ने गेट पर ही जल अर्पित कर माता का पूजन किया। वहीं जिले के प्रमुख बगाज माता मंदिर, विंध्यवासिनी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर सुबह से महिलाएं न पहुंचे इसके लिए कलेक्टर ने हर गांव के संबंधित पटवारी, सचिव एवं रोजगार सहायक को तैनात कर रखा था। साथ ही चेतवानी दी गईथी कि जिसके भी गांव से महिलाएं मंदिर पहुंचेगी, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे में किसी भी मंदिर में श्रद्धालु नहीं पहुंचे।
घरों में मना नववर्ष: इसके साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर मनाया जाने वाला ***** नववर्ष भी इस बार घरों में ही मना। पूर्व के वर्षों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित तमाम ***** संगठनों पर इसे बड़े ही उत्साह से सार्वजनिक रूप से मनाया जाता था। सडक़ों पर निकल कर लोग एक-दूसरे का तिलक कर नववर्ष की शुभकामनाएं देते थे, लेकिन कोरोना के चलते लोगों ने मैसेज भेज कर शुभकामनाएं प्रेषित की।
जतारा में बंद कराए मंदिर: चैत्र नवरात्र पर कुछ महिलाएं सुबह से मंदिरों में पहुंच गई। इसके बाद जैसे ही प्रशासन को जानकारी हुईवह अलर्ट हुआ और अधिकारी मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने सभी महिलाओं को निकाल कर मंदिरों में ताले डलवा दिए। इसके बाद केवल पुजारी को ही पूजा करने के लिए अंदर प्रवेश दिया गया। प्रशासन ने देवी मंदिरों के साथ ही जैन मंदिर को भी बंद करा दिया है। वहीं मस्जिदों में भी एक-दो लोग ही नमाज के लिए जा रहे है।

Sanket Shrivastava Desk/Reporting
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