scriptMilitary family desperate to go to the border of the country | दादा, पिता रह चुके भारतीय सेना में, दो पुत्र सेना में अधिकारी, पोत्र-पोत्रियां भी सेना में भर्ती के लिए बैताब | Patrika News

दादा, पिता रह चुके भारतीय सेना में, दो पुत्र सेना में अधिकारी, पोत्र-पोत्रियां भी सेना में भर्ती के लिए बैताब

कई सालों तक देश की सेवा में कार्यरत रहे 77 वर्षीय भंवरलाल सेना की जिम्मेदारी पूर्ण करने के बाद आज भी सरकार व सेना आदेश दे तो इस उम्र में फिर से हथियार उठाकर देश सेवा करने के इच्छुक है। उनके दादा, पिता भारतीय सेना में रह दुश्मनों के दांत खट्टे कर चुके है, तो वर्तमान में दो पुत्र सेना में अधिकारी है तो उनकी पांचवी पीढ़ी पोत्र-पोत्रियां भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने को बेताब है।

टोंक

Updated: January 26, 2022 07:16:09 pm

दूनी. दुश्मन देशों की नापाक हरकत देख व सुन आज भी सेना की तोपखाना रेजीमेंट में वायरलेस ऑपरेटर के अग्रिम मोर्चा में सैनिक पद पर रहे दूनी निवासी भंवरलाल रोझ का खून खोल उठता है। कई सालों तक देश की सेवा में कार्यरत रहे 77 वर्षीय भंवरलाल सेना की जिम्मेदारी पूर्ण करने के बाद कस्बे के सरपंच, जिला परिषद सदस्य व कृषि निदेशक पद पर आसीन रह क्षेत्र में आमजन की सेवा कर चुके है। उन्होंने कहा अगर सरकार व सेना आदेश दे तो इस उम्र में फिर से हथियार उठाकर देश सेवा करने के इच्छुक है।
दादा, पिता रह चुके भारतीय सेना में, दो पुत्र सेना में अधिकारी, पोत्र-पोत्रियां भी सेना में भर्ती के लिए बैताब
दादा, पिता रह चुके भारतीय सेना में, दो पुत्र सेना में अधिकारी, पोत्र-पोत्रियां भी सेना में भर्ती के लिए बैताब
उनके दादा, पिता भारतीय सेना में रह दुश्मनों के दांत खट्टे कर चुके है, तो वर्तमान में दो पुत्र सेना में अधिकारी है तो उनकी पांचवी पीढ़ी पोत्र-पोत्रियां भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने को बेताब है। उल्लेखनीय है कि पूर्व सैनिक भंवरलाल रोझ 1967 में तोपखाना रेजिमेंट में वायरलेस ऑपरेटर अग्रिम मोर्चा में सैनिक पद पर भर्ती हुए, उन्होंने 24 दिसम्बर 1971 से 20अगस्त 1973 तक बांग्लादेश के युद्ध में भाग लिया। सेना में रह उन्होंने सेन्य सेवा व हिमालय मेडल सहित कई सम्मान प्राप्त किए।
इससे पहले उनके पिता श्रीलाल पुत्र धुलाराम रोझ सेना की राज रैफ रेजीमेंट में भर्ती होकर 1942 से 1947 तक हुए द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया। इस दौरान दुश्मनों के हाथ लगने पर उन्हें दो वर्ष तक कालापानी की सजा काटनी पड़ी। बाद में भारतीय सेना ने मुक्त करवाया। उन्होंने बताया की उनके दादाजी धुलाराम पुत्र मोतीलाल रोझ सेना में हवलदार रहे। उन्होंने 1931के प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेकर देश सेवा की। वर्तमान में भंवरलाल रोझ के बड़े पुत्र पूर्णवीर ङ्क्षसह जाट रेजीमेंट में सुबेदार मेजर व छोटे पुत्र रणवीर ङ्क्षसह सेना की आर्मी मेडिकल कोर में नायब सुबेदार पद देश सेवा कर रहे है। उनके दामाद नैनवा निवासी बाबूलाल जाट भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट हवलदार पद से सेवानिवृत हो देश सेवा कर चुके है।
दुश्मन को सबक सिखाना चाहते है
पत्रिका ने गणतंत्र दिवस के असर पर पूर्व सैनिक भंवरलाल रोझ के घर जा परिजनों से वार्ता की तो बच्चें-महिलाओं का दुश्मन देश पाकिस्तान व चीन की जारी नापाक हरकतों पर चर्चा की तो और उन्होंने एक सुर में शहीदों की शहादत का बदला लेने की बात कही। बड़े पुत्र सुबेदार मेजर पूर्णवीर ङ्क्षसह के पुत्र अजयवीर छोटे पुत्र आर्मी मेडिकल कोर में नायब सुबेदार रणवीर ङ्क्षसह की पुत्री अंजली पुत्र उदयवीर ङ्क्षसह सेना में भर्ती होकर दुश्मन देशों को सबक सिखाना चाहते है। उन्होंने कहा मौका मिला तो परदादा, दादा व पिता के नक्शे कदम पर चल भारतीय सेना में भर्ती होकर सेना सहित परिवार, समाज, राज्य व देश का नाम रोशन करना चाहते है।
कुनबा कर रहा देश सेवा
पूर्व सैनिक भंवरलाल रोझ ने बताया की भारतीय सेना का नाम आते ही फक्र से सर उंचा उठ जाता है उनके दादा, पिता व पुत्रों के साथ-साथ कुनबे में भाई शिवकिशन रोझ जाट रेजीमेंट में रह 1962 के चाइना युद्ध में शोर्य दिखाया तो रामचन्द्र रोझ एनिमल कोर, रामस्वरूप रोझ सीआरपीएफ से सेवानिवृत हुए है। वहीं वर्तमान में गजराज रोझ सीआरपीएफ व धर्मवीरङ्क्षसह रोझ सीआईएसएफ में रह देवा सेवा कर रहे है।
उग्रवादियों को देख नहीं हारी हिम्मत
नायब सुबेदार रणवीर ङ्क्षसह 2001 में जोहराट (आसाम) में तैनात थे, अगस्त माह में एक दिन नागालैण्ड-मणिपुर के बीच बार्डर पर सात-आठ उग्रवादी होने की सूचना पर अपने अधिकारी सहित पन्द्रह जवानों के साथ पैदल चल रात्रि को दुश्मनों के ठिकाने पर मोर्चा जमाकर सुबह होने का इंतजार करते रहे और सुबह होते दुश्मनों पर तुफान की तरह टूट पड़े और तेरह नागा उग्रवादियों को मार गिराया।

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