एक इंस्पेक्टर और 1800 फर्म, कैसे होगी जिलेभर में मिलावट की जांच


हालात: बेबस है चिकित्सा विभाग, दो में एक खाद्य निरीक्षक को प्रतिनियुक्ति पर चित्तौडग़ढ़ भेजा

By: Vijay

Published: 29 Oct 2020, 09:35 PM IST


टोंक. राज्य सरकार की ओर से दीपावली पर्व को देखते हुए शुद्ध के युद्ध अभियान चलाया गया है, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी के अभाव में अभियान कोरा दिखावा साबित हो रहा है। ऐसे में त्योहार पर लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ ही मिलने में संशय बना हुआ है। सरकार की ओर से हर वर्ष की भांति शुरू किए अभियान में मिलावट पर कार्रवाई के सख्त आदेश दिए गए है, वहीं लोगों को सटीक सूचना देने पर एवं मिलावट की पुष्टि होने पर ५१ हजार रुपए तक इनाम भी घोषित किया गया है। जबकि विभाग के पास मिलावट रोकने के लिए पर्याप्त स्टॉफ एवं संसाधन तक नहीं है। खाद्य विभाग की ओर से जिले में खाद्य पदार्थों से जुड़ी १८०० ऐसी फर्मों को लाइसेंस जारी किए गए है, जिनका सालाना टर्न ओवर १२ लाख से अधिक है। वहीं विभाग के तहत ८४६२ का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है।
टोंक में मिलावट पर कार्रवाई के लिए दो खाद्य निरीक्षक, एक-एक सहायक कर्मचारी एवं ऑपरेटर कार्यरत है। इनमें से भी एक खाद्य निरीक्षक को अभियान के तहत कार्रवाई करने के लिए चित्तौडग़ढ़ में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। वहीं शेष कर्मचारियों के पास चल प्रयोगशाला वैन भी नहीं है। वहीं कार्रवाई करने जाने के लिए भी वाहन के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर निर्भर रहना पड़ता है।
डेढ़ सौ से अधिक मिष्ठान भण्डार
दीवापली पर्व पर अधिकांश कार्रवाई मिष्ठान भण्डार एवं खाद्य पदार्थों की दुकानों पर की जाती है। जिले में करीब पौने दो सौ मिठाई भण्डार एवं करीब आठ सौ खाद्य पदार्थ की दुकान है। अभियान के पन्द्रह दिनों में इनमें से नाममात्र की दुकानों पर जांच हो पाती है। लिए जा रहे नमूनों की जांच भी करीब एक माह आती है। यहां लिए गए नमूनों को जांच के लिए जयपुर भेजा जाता है। वहीं लैब पर अन्य जिलों का भार होने के कारण जांच रिपोर्ट देरी से मिल पाती है, जब तक दुकानदारों द्वारा उक्त खाद्य पदार्थ की बिक्री कर दी जाती है।
७०नमूने फेल
विभाग के खाद्य निरीक्षकों की ओर से एक जनवरी से अब तक २२८ नमूने लिए गए है, जिनमें १९६ की जांच रिपोर्ट आई है। इनमें ७० नमूने मानक मापदण्डों पर खरे नहीं उतरे है। इनमें से ४५ फर्मों के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा किया गया है। तथा आठ पर नियमों के तहत जुर्माना किया जा चुका है।

प्रदेश में छह जिले ऐसे थे जहां खाद्य निरीक्षक नहीं थे, ऐसे में टोंक से एक खाद्य निरीक्षक कुछ दिनों के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। फिर भी उपलब्ध संसाधनों व कर्मचारियों का पूरा उपयोग किया जा रहा है। कहीं भी मिलावटी सामग्री की सूचना हो तो वह जानकारी दे सकता है। नाम गोपनीय रखा जाएगा।
अशोक यादव, सीएमएचओ टोंक

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