बजट से उम्मीद- जिले में पर्यटन सर्किट व बंद उद्योगों को खोलने का हो विशेष प्रावधान

राज्य सरकार के आने वाले बजट को लेकर लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोग ऐसी परियोजना चाहते हैं जिससे जिले का आर्थिक रूप से विकास हो सके। हालांकि राज्य सरकार जिले के पर्यटन की ओर ध्यान दे तो जिला आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है।

By: pawan sharma

Published: 12 Feb 2021, 06:39 PM IST

टोंक. राज्य सरकार के आने वाले बजट को लेकर लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोग ऐसी परियोजना चाहते हैं जिससे जिले का आर्थिक रूप से विकास हो सके। हालांकि राज्य सरकार जिले के पर्यटन की ओर ध्यान दे तो जिला आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है। पर्यटक आने पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा आर्थिक आय भी शुरू हो जाएगी। जिले में पर्यटन की असीम सम्भावनाएं हैं।

जिला मुख्यालय पर विश्व विख्यात एपीआरआई, कच्चा बंधा, पक्का बंधा, सुनहारी कोठी है। जहां सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके अलावा टोंक में फे्रजर पुल से गहलोद मार्ग तक बनास नदी पर चौपाटी का निर्माण किया जाए तो निश्चित रूप से पर्यटकों को लुभाया जा सकता है।

बरसात के दिनों में बनास नदी पर घूमने के लिए जयपुर समेत कई जिलों से लोग आते हैं। कई बार तो पुलिस जाप्त तक लगाना पड़ता है। ऐसे में यहा चौपाटी बना दी जाए तो टोंक में आय का मुख्य साधन हो सकता है। वहीं ककोड़ के समीप हाथी भाटा व नगरफोर्ट के समीप खेड़ा सभ्यता भी अपने आप में इतिहास समेटे हुए है। टोडारायसिंह की बावडिय़ां भी लुभाती है।

ऐसे में जिला पर्यटन के हिसाब से बेहतर है, लेकिन सरकार की ओर से इन्हें स्थल घोषित नहीं किया गया है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र का विकास हो तो बेरोजगार कम हो। टोंक में रेल का मुद्दा भी राज्य सरकार बजट में पूरा कर सकती है। सरकार को आधी राशि केन्द्र को देनी है। वहीं शहर में बीड़ी, नमदा व गलीचा उद्योग पर योजना बनाई जाए तो ये उद्योग फिर से लोगों को रोजगार से जोड़ सकते हैं।

बाहर से आए बड़ी कम्पनीदरअसल टोंक में औद्योगिक एक भी बडी इकाई नहीं है। तेल मिल ही मुख्य उद्योग है। जबकि यहां देश की कोई बड़ी कम्पनी आए तो रोजगार के अवसर पैदा हो। वहीं उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार को योजनाओं में भी सरलीकरण करना होगा। उद्योगों को बढ़ाने के लिए ऋण व अनुदान की योजना बनाई जाए। औद्योगिक क्षेत्र में परिवहन की सुविधा मुहैया कराई जाए।

शिक्षा के क्षेत्र में भी है अभी पिछड़ेटोंक जिला शिक्षा के क्षेत्र में भी पिछड़ा हुआ है। उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है। जबकि टोंक जिला मुख्यालय को विश्वविद्यालय की आवश्यकता है। जिला मुख्यालय पर शिक्षा का हब बनाकर अन्य शिक्षा के केन्द्र खोले जाए तो विद्यार्थियों को अन्य जिलों में नहीं जाना पड़े।

नगर निकाय को मिले बजट

जिले की नगर पालिकाओं व नगर परिषद टोंक के पास फिलहाल निजी स्रोत के अलावा कोई बजट नहीं है। राज्य सरकार बजट में जिले की नगर निकाय को किसी योजना में बजट दे तो शहरों में विकास के कार्य किए जाए।

2020 में ये हुई थी घोषणा-

टोडारायसिंह में नई स्वतंत्र मंडी- टोंक में शहीद स्मारक- टोंक में नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना- जिले की 6 ग्राम पंचायत व पीपलू की पंचायत समिति का भवन निर्माण- जिले के 6 उपखण्डों में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल- जिले के गांवों व ढाणियों में पेयजल व्यवस्था- उपखण्ड मुख्यालय पर कनिष्ठ सहायक व सूचना सहायक का पद- टोंक शहर की विभिन्न सडक़ों के निर्माण के लिए 30 करोड़- पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के तहत बीसलपुर बांध का पुर्नद्धार कार्य

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