मेडिकल कॉलेज के लिए मिलेगा बजट

जिले के विकास को मिलेगा बल। उपचार के लिए जयपुर की दौड़ होगी खत्म।



टोंक. आम बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में आगामी चार साल में १५ मेडिकल कॉलेज तैयार किए जाने की बात कही गई है। इनके निर्माण के करीब १५ हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें ४० प्रतिशत भागीदारी राज्य सरकार की भी होगी। जिले मेडिकल कॉलेज बनने से मरीजों को विशेषज्ञों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने लगेगा। जिले में अब तक लोगों को उपचार के लिए जयपुर-कोटा की ओर रुख करना पड़ता है। वहीं मेडिकल कॉलेज का कार्य शुरू होने के साथ ही जिले के विकास में नया आयाम स्थापित होगा। जिला मुख्यालय पर सआदत अस्पताल में भी कई विशेषज्ञों के पद रिक्त है। वहीं मरीजों का भार अधिक है। वहीं उपखण्ड स्तर पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों चिकित्सकों के अभाव में रेफर किया जा रहा है। तो कई प्राथमिक स्वास्थ्य पद रिक्त होने नि:शुल्क जांच तक नहीं हो पा रही है। वहीं बजट में एक महत्वपूर्ण घोषणा किसी भी स्थान पर दुर्घटना होने पर समीप के निजी हॉस्पिटल में तुरंत उपचार किए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं बजट में जिले के टोडारायसिंह में नई स्वतंत्र मंडी, टोंक में शहीद स्मारक, जिले में नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना, जिले की ६ ग्राम पंचायत व पीपलू की पंचायत समिति का भवन निर्माण, जिले के ६ उपखण्डों में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल, जिले के गांवों व ढाणियों में पेयजल व्यवस्था, उपखण्ड मुख्यालय पर कनिष्ठ सहायक व सूचना सहायक का पद, टोंक शहर की विभिन्न सडक़ों के निर्माण के लिए ३० करोड़, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के तहत बीसलपुर बांध का पुर्नद्धार कार्य होगा। इससे जिले के विकास की आस बंधी है।

बीसलपुर बांध में नहीं होगी पानी की कमी
बजट में बीसलपुर बांध को शामिल किया गया है। इसे पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के तहत १३ जिले में बांध पुनर्वास सुधार परियोजना में जोड़ा गया है। वहीं कालीसिंध नदी के अधिशेष पानी को बनास नदी में डाले जाने का कार्य?नवनैश बेराज का निर्माण पूर्ण होने पर बजट में बात हुई है। इससे बनास नदी कभी सूखी नहीं रहेगी। पानी कम नहीं होगा।

गंभीर मरीजों को राहत
बजट में पीपीडी मोड पर कई अस्पतालों में एमआरआइ और सिटी स्कैन जांच को प्रस्तावित किया गया है। ये राज्य सरकार की अच्छी पहल है। इससे मरीजों को फायदा होगा। ये दोनों ही जांच बहुत महंगी है। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में तो इसकी सुविधा तक नहीं है।मरीजों को मजबूरन महंगी राशि पर निजी लैब से ये जांच करानी पड़ रही है।

Vijay Bureau Incharge
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