शहर का इतिहास: टोंक - जयपुर की सीमा पर चामुण्डा माता के मन्दिर से है कठमाणा की पहचान

शहर का इतिहास: टोंक - जयपुर की सीमा पर चामुण्डा माता के मन्दिर से है कठमाणा की पहचान

 

By: pawan sharma

Published: 17 Oct 2020, 11:02 AM IST

पीपलू. जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर तथा पीपलू तहसील क्षेत्र के अंतिम छोर तथा जयपुर जिले की सीमा पर ग्राम कठमाणा स्थित हैं। इस गांव में सबसे पहले खटाणा गौत्र के गुर्जर आए थे, जिसकी वजह से इस गांव का नाम खटाना पड़ा होगा, ऐसी किवदंती है।

कालांतर में अपभ्रंश होकर इस गांव को कठमाणा पड़ गया। इस गांव में वर्तमान में इस समुदाय के करीबन 70-80 परिवार हैं। कठमाणा में प्राचीन चामुंडा माताजी मंदिर है। चामुंडा माता के वर्ष में दो बार आसोज सुदी व चेत्र सुदी चतुर्दशी को मेले का आयोजन होता है, जिसमें घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन होता हैं।

जहां मंदिर के प्रवेश द्वारा पर हनुमान प्रतिमा हैं। वहीं गांव के श्रीराम भक्त मंडल ने रामलीला कर एकत्रित चंदे से मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर में ही कुएं की खुदाई के दौरान आज से लगभग 45 वर्ष पहले भूगर्भ-गृह से निकली शिव नंदीश्वर की प्रतिमा तथा कई प्राचीन अवशेष मिले हैं।

चामुंडा माता का मंदिर हजारों वर्ष बाद भी प्राचीन एवं ऐतिहासिक थातियों को समेटे हुए श्रद्धालुओं की जनआस्था का केंद्र हैं। जहां वर्ष भर मुंडन, सवामणी, नवदंपतियों की जात लगाने की रस्म, ध्वजपताका चढ़ाने के लिए लोग देवी के दरबार में पहुंचते हैं।

मूंगफली के लिए मुफीद
यहां मूंगफली के उत्पादन के लिए इस क्षेत्र की जमीन काफी सरसब्ज है। गांव के बस स्टैंड पर भगवान राधा कृष्ण का मंदिर है। लोगों की इस स्थान के प्रति काफी आस्था जुड़ी हुई है। इसी तरह अहीरों की ढाणी में राधे गोविंद का मंदिर है। कठमाणा पंचायत मुख्यालय है जहां शिक्षा की दृष्टि से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हैै।

पंचायत अंतर्गत अरनिया काकड़, जाटान ढाणी, मीणान ढाणी गांव शामिल है। मुख्यालय सडक़ मार्ग से जुड़ा हुआ है, जहां से डिग्गी, सोडा, रानोली, पीपलू, निवाई जयपुर आज आने के लिए सडक़ मार्ग है। पानी फ्लोराइड होने से बीसलपुर से जल वितरण समिति के जरिए नल प्वाइंटों पर आपूर्ति होता है।


कठमाणा से 5 किलोमीटर दूर जयपुर जिले की अंतिम सीमा पर स्थित समेलिया गांव में भगवान द्वारकाधीश का मंदिर है, जो काफी रमणीय जन-जन की आस्था केंद्र है कठमाणा की आबादी 5000 करीब है जहां चिकित्सा की दृष्टि से राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है।

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