चैक अनादरण के दोषी को एक वर्ष का कारावास, क्षतिपूर्ति के भी देने होगें पांच लाख रुपए

न्यायिक मजिस्टे्रट अमरसिंह खारडिय़ा ने चैक अनादरण के मामले में एक जने को दोषी मानते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास व पांच लाख रुपए के क्षतिपूर्ति करने के आदेश से दण्डित किया है।

देवली. न्यायिक मजिस्टे्रट अमरसिंह खारडिय़ा ने चैक अनादरण के मामले में एक जने को दोषी मानते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास व पांच लाख रुपए के क्षतिपूर्ति करने के आदेश से दण्डित किया है। प्रकरण में परिवादी राजेन्द्र कुमार मीणा निवासी पटेल नगर देवली है, जिसने आरोपी कृष्ण कुमार मीणा निवासी ग्राम अमरवासी तहसील जहाजपुर व हाल निवासी कोटा के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम के तहत न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था।

परिवाद में बताया कि आरोपी कृष्ण कुमार उसका परिचित था, जिसने पहचान की बदौलत परिवादी राजेन्द्र कुमार से उधार राशि ली। उक्त रकम चुकाने के लिए आरोपी कृष्ण कुमार ने परिवादी राजेन्द्र को 3 लाख 50 हजार रुपए का एचडीएफसी बैंक का चैक दिया, जिसकी राशि प्राप्त करने के लिए परिवादी ने अपने एसबीआइ खाते में चैक लगाया, लेकिन चैक अपर्याप्त राशि होने की वजह से अनादरित हो गया।

परिवादी ने 7 दिसम्बर 2017 को अभियुक्त कृष्णकुमार को विधिक नोटिस भिजवाया। इसके बावजूद अभियुक्त ने 15 दिवस की तय अवधि तक चैक राशि नहीं लौटाई। इस पर न्यायालय ने परिवादी राजेन्द्र कुमार मीणा के बयान, दस्तावेज, चैक, जमा पर्ची, विधिक नोटिस की प्रतियों, डाक रजिस्ट्री की रसीदों के आधार पर कृष्ण कुमार को एनआइ एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी मानते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास व पांच लाख रुपए की क्षतिपूर्ति करने के आदेश से दण्डित किया है।

जिला कारागृह का निरीक्षण किया
टोंक. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक के सचिव की अध्यक्षता में गठित विशेष टीम ऑफ विजिटर्स की ओर से जिला कारागृह का साप्ताहिक निरीक्षण किया गया। प्राधिकरण के सचिव पंकज बंसल की ओर से निरीक्षण के दौरान जेल में साफ सफाई, भोजन व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था, विधिक सेवा क्लिनिक का कार्य, मुलाकात कक्ष, बैरक, पुस्तकालय आदि का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित बंदियों से संवाद कर जेल नियमानुसार उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं के बारे में जायजा लिया गया। टीम ऑफ विजिटर्स की ओर से जिला कारागृह के समस्त बैरक में साफ सफाई के स्तर को जांचा गया एवं जिला कारागृह की बैरक नम्बर 8 को सबसे स्वच्छ बैरक के लिउ साफ सफाई में प्रथम स्थान दिया गया एवं बैरक नम्बर 7 को द्वितीय स्थान दिया गया।

टीम ऑफ विजिटर्स की ओर से निरीक्षण के दौरान उपस्थित बंदी को नि:शुल्क विधिक सहायता के सम्बन्ध में जानकारी दी गई। उनके प्रकरण में पैरवी करने के लिए अधिवक्ता की आवश्यकता के बारे में जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान पैनल अधिवक्ता अभिषेक शर्मा एवं निशा शर्मा उपस्थित थे।

pawan sharma Desk
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