scriptCorona became the reason: this time also the historic Dada game will | कोरोना बना कारण: इस बार भी नहीं खेला जाएगा ऐतिहासिक दड़ा खेल | Patrika News

कोरोना बना कारण: इस बार भी नहीं खेला जाएगा ऐतिहासिक दड़ा खेल

आवां समेत बारह गांव के लोगों में रहता है इस खेल को लेकर उत्साह

टोंक

Published: January 11, 2022 02:07:43 pm



आवां. कस्बे में हर वर्ष मकर सक्रांति के अवसर पर होने वाले दड़ा महोत्सव का आयोजन कोरोना और ओमीक्रोन वायरस के बढ़ते प्रभाव के मध्य न•ार सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों के चलते इस बार भी नहीं हो पाएगा।
दो साल पहले शुरू हुआ कोरोना का प्रकोप अब तक भी थमने का नाम नहीं ले रहा है और अबकी बार भी इसकी भेंट चढ़ा है कस्बे में हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर खेले जाने वाला दड़ा का खेल। जानकारी अनुसार इस साल भी आवां कस्बे में हर साल खेला जाने वाला दड़ा का खेल नहीं खेला जाएगा। विश्व प्रसिद्ध दड़ा महोत्सव का आयोजन करवाने वाले राज परिवार से जयेंद्र ङ्क्षसह ने बताया कि कोविड 19 के चलते सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन की पालना करते हुए इस भी साल दड़ा महोत्सव का आयोजन नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि रियासत काल से आवां कस्बे में दड़ा महोत्सव का आयोजन तत्कालीन राज परिवार द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना के चलते एहतियातन परंपरागत रूप से खेले जाने वाले दड़ा महोत्सव नहीं मनाने का निर्णय लिया गया है। दड़ा महोत्सव नहीं मनाए जाने की खबर से आवां समेत आसपास के बारह पुरो के लोगों में मायूसी छाई हुई है।
गौरतलब है कि दड़ा महोत्सव की परंपरा रियासत काल से चली आ रही है। यह केवल दूसरी बार होगा कि इतने वर्षों से चली आ रही दड़ा खेलने की परंपरा कोरोना के चलते टूट जाएगी। लगभग 50 किलो वजनी और तीन हजार लोगों द्वारा खेले जाने वाले इस खेल से हजारों किसानों की आशा बंधी रहती है क्योंकि ऐसी मान्यता है की दड़ा यदि दूनी दरवाजे की तरफ जाता है तो आने वाला साल अच्छा होता है और यदि दड़ा अखनियां दरवाजे की तरफ जाता है तो आने वाला साल अकाल का साल माना जाता है, लेकिन इस बार किसानों के लिए अकाल और सुकाल की भविष्य वाणी करने वाले दड़ा का खेल ही खटाई में पड़ गया है।
कोरोना बना कारण: इस बार भी नहीं खेला जाएगा ऐतिहासिक दड़ा खेल
कोरोना बना कारण: इस बार भी नहीं खेला जाएगा ऐतिहासिक दड़ा खेल
&राज्य सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों के चलते इस बार भी विश्व प्रसिद्ध दड़ा का खेल नहीं हो पाएगा। इतिहास में यह दूसरा अवसर है जब अकाल और सुकाल की भविष्यवाणी करने वाला दड़ा खेल नहीं खेला जाएगा।
दिव्यांश महेंद्र भारद्वाज, सरपंच आवां

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