12 साल से फाइलों में रेंग रहा बीसलपुर वन क्षेत्र के विकास का सपना

12 वर्ष गुजर जाने के बाद उक्त योजना पर कार्य शुरू नहीं हो पाए है, जिससे जिले में पर्यटन के विकास का सपना अधुरा पड़ा है।

राजमहल. बीसलपुर बांध बनने के साथ ही बीसलपुर वन क्षेत्र में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से 3.50 करोड़ रुपए वन विभाग के खाते में डालकर कन्जरर्वेशन रिजर्व के तहत विकास कार्य 12 वर्ष बाद भी कई प्रयास होने पर भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहे है।

वन विभाग टोंक के अनुसार 2008 में कन्जरर्वेशन रिजर्व समिति का गठन हुआ था, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित वन विभाग के आला अधिकारियों को शामिल किया गया था। इसके तहत बीसलपुर मेंं कई बार बैठकों का आयोजन भी हुआ, जिसमें बीसलपुर वन क्षेत्र में पर्यटन विकास को लेकर चर्चाओं के साथ ही विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार कर प्रपोजल विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ ही राज्य सरकार को भी भेजा गया ।

लेकिन 12 वर्ष गुजर जाने के बाद उक्त योजना पर कार्य शुरू नहीं हो पाए है, जिससे जिले में पर्यटन के विकास का सपना अधुरा पड़ा है। वहीं योजना पर कार्य नहीं होने के कारण धीरे-धीरे वन क्षेत्र मेें वन्य जीवों सहित वन सम्पदा भी नष्ट होती जा रही है।


प्लान तैयार, स्वीकृति का इंतजार
बीसलपुर वन क्षेत्र में कन्जरर्वेशन रिजर्व योजना के तहत लगाए गए क्षेत्रिय वन अधिकारी सैयद जहीर हसन ने बताया कि योजना के तहत प्लान तैयार कर लिया गया, जिसे वित्तिय स्वीकृति के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपुर में भेजा गया है। उक्त योजना के तहत प्रथम चरण का प्लान लगभग तैयार है, जिसमें सबसे पहले वन सुरक्षा को लेकर दीवार बनाना, पर्यटकों की ओर से वन क्षेत्र की सुन्दरता को निहारने के लिए वाच टावर निर्माण, वन क्षेत्र में पैदल भ्रमण के लिए नेचर वॉक बनाना, बैरियर लगाना आदि कार्य शामिल है। वही दूसरे चरण के तहत वन क्षेत्र संरक्षण के लिए वाहन व सुरक्षा प्रहरी लगाना, वन क्षेत्र में सुन्दरता बढ़ाने के साथ ही पर्यटकों की सुविधाओं को लेकर झौपडिय़ों का निर्माण करवाना आदि शामिल है, लेकिन अब तक प्रथम चरण के लिए भी विभागिय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। योजना के तहत होने वाले विकास कार्य में विद्युत लाइन, मुख्य सडक़ मार्ग, मंदिर, मस्जिद , बीसलपुर बांध स्थल, धर्मशाला आदि विकास कार्य से अलग रहेंगे।
यह क्षेत्र है चिह्नित
बीसलपुर कन्जरर्वेशन रिजर्व के तहत टोडारायसिंह वन क्षेत्र, थड़ोली, बीसलपुर, शिलाबारी दह के करीब पहाड़ी क्षेत्र, राजमहल वन क्षेत्र, माताजी रावता वन क्षेत्र, पातलियां की डूंगरी, गांवड़ी, ककोडिय़ां आदि वन क्षेत्र में विकास कार्य होने है। इसमें अधिकांश हिस्सा टोडारायसिंह वन क्षेत्र का शामिल है।
इन्हें भी मिलेगी सुरक्षा
उक्त वन क्षेत्र में जरख, लंगूर, सहेली, सांभर, सियार, नील गाय, खरगोश, अजगर, कोबरा, मोर, लाल मूंह के बंदर आदि विचरण करते है। वहीं बीसलपुर बांध के कारण यहां हर वर्ष विदेशी मेहमान परिंदे भी डेरा डालते है। वन क्षेत्र में सुरक्षा दीवार के साथ ही सुरक्षा प्रहरी लगने के बाद वन्य जीवों को भी संरक्षण मिलेगा, जिससे इनकी अकाल मौत पर रोक लगेगी।
इनका कहना है
कन्जरर्वेशन रिजर्व के तहत योजना बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपुर के पास स्वीकृति के लिए भिजवा दिया गया है, जिसमें प्रथम चरण के प्लान शामिल है। जयपुर से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे।
सैययद जहीर हसन, क्षेत्रिय वन अधिकारी बीसलपुर कन्जरर्वेशन रिजर्व टोंक।
आर एम 0811 सीए व सीबी-राजमहल। बीसलपुर बांध के करीब वन क्षेत्र जहां पर्यटन को लेकर विकास कार्य होने है।

pawan sharma
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