85 लाख का दे रहे टैक्स, फिर भी बारिश में भीग रही अन्नदाता की फसल

क्रमोनत कृषि उपज मण्डी में डोम सुविधा के अभाव में खुले आसमां के नीचे तुलाई व बारिश में भीगती कृषि जिंस व अन्य सुविधाएं व्यापारी व किसानों के लिए समस्या बनी है, प्रतिवर्ष लाखों रुपए टैक्स देने के बाद भी मण्डी परिसर में किसानों की फसल बारिश के दौरान भीगने की नौबत आ रही है।

By: pawan sharma

Published: 04 Oct 2021, 08:31 AM IST

टोडारायसिंह. क्रमोनत कृषि उपज मण्डी में डोम सुविधा के अभाव में खुले आसमां के नीचे तुलाई व बारिश में भीगती कृषि जिंस व अन्य सुविधाएं व्यापारी व किसानों के लिए समस्या बनी है। इधर, मण्डी समिति के तहत लाखों रुपए की टैक्स वसूली के बावजूद व्यापारी व किसान, मण्डी परिसर की सुविधाओं से महरूम है। प्रतिवर्ष लाखों रुपए टैक्स देने के बाद भी मण्डी परिसर में किसानों की फसल बारिश के दौरान भीगने की नौबत आ रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रशासन की अनदेखी के बीच ढाई दशक पहले मुख्य कृषि मण्डी को राजस्व हानि के बीच गौण कृषि मण्डी में तब्दील किया गया था, तब से मण्डी का विकास नहीं हो पाया। बीसलपुर बांध से जुड़े टोडारायसिंह के सिंचित क्षेत्र में कृषि पैदावार बढ़ी, लेकिन सुविधाओं के अभाव में गौण कृषि मण्डी उपेक्षा का शिकार रही है।

व्यापारियों ने बताया दो वर्ष पहले मण्डी प्रशासन व व्यापार मण्डल के प्रयास से गौण कृषि मण्डी में जिंसों की आवक बढ़ी। स्थिति यह है कि मालपुरा कृषि उपज मण्डी अधिनस्थ टोडा गौण कृषि उपज मण्डी का बीते वर्ष तक 85 लाख से अधिक वार्षिक टैक्स वसूला जाता रहा है। इसके बावजूद मण्डी प्रशासन की अनदेखी के बीच व्यापारी व किसानों को सुविधाओं से महरूम होना पड़ा है।

खुले आसमां के नीचे होती है तुलाई
मण्डी के हालात यह है कि व्यापारी कैबिन लगाकर आढ़त का संचालन कर रहे है। छाया व्यवस्था नहीं होने से तिरपाल के नीचे व्यापारी, किसान व मजदूर गर्मी व बरसात में सिर छुपाते रहते है। सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा नहीं मिलने से मण्डी परिसर में मण्डी यार्ड निर्माण, डोम सुविधा, व्यापारियों के माल संग्रहण स्थल (गोदाम) आदि सुविधाएं नहीं होने से किसानो का माल (कृषि जिंस) खुले आसमां के नीचे पड़ा रहता है। जहां चिलचिलाती धूप में व्यापारी माल की खुली बोली लगाता है तो किसानो की देखरेख में मजदूर पसीने पौछते हुए माल की तुलाई कर बोरियां उठाता नजर आता है।

ढाई दशक से गौण मण्डी का दंश झेल रहे यहां मण्डी से जुड़े व्यापारी, किसान व मजदूर वर्ग सर्दी, गर्मी व बरसात तीनों मौसम में परेशान है। बारिश से बचाने के लिए किसान व व्यापारी तिरपालों से बचाव की कोशिश करते है। जहां तिरपाल छोटे पड़ जाते है, तब किसान व व्यापारी अपने आप को कोसते नजर आते है।

मण्डी परिसर में किसानो के लिए सुलभ व ठहराव के लिए विश्राम स्थल भी नहीं है, जिसके चलते किसानों का रूझान कम है। उपेक्षित रवैये में मण्डी टैक्स वसूलना भारी व्यापारियों का कहना है कि मालपुरा मण्डी समिति के तहत व्यापारियों को दुकानों आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के साथ गत वर्ष से विक्रय पर्चियों देना बंद कर था, जिससे व्यापारी मण्डी टैक्स नहीं दे पा रहे थे तथा स्थानीय मण्डी को राजस्व की हानि हो रही थी। जबकि पूर्व में सभी व्यापारियों को विक्रय पर्चियां जारी की गई थी।

हाल ही में दुकाने आवंटन की अधूरी कार्रवाई के बीच विक्रय पर्चिया जारी की है, लेकिन करीब एक दर्जन व्यापारियों को पर्चियों से वंचित रखा है, जिसके चलते अब व्यापारी मण्डी के भीतर कम तथा व बाहरी क्षेत्र में कृषि जिंसो की खरीद फरोख्त करने लगे है। उपेक्षित रवैये के बीच अधिकांश किसान भी टोडारायसिंह मण्डी के स्थान पर मालपुरा, टोंक, दूनी या केकड़ी मण्डी में अपनी कृषि जिंस बैचने को मजबूर है, जिसके चलते यहां का मण्डी का राजस्व (टैक्स) अब घटने लगा है।


इनका कहना है, करीब डेढ़ दर्जन व्यापारियों को दुकाने आवंटन करने के साथ विक्रय पर्चिया जारी की है। शेष व्यापारियों को फिर लाटरी प्रक्रिया के तहत दुकाने आवंटित कर विक्रय पर्चिया जारी होगी। समितियों का गठन नहीं होने से पूर्ण मण्डी की कार्रवाई अधूरी पड़ी है। राज्य सरकार व उच्च अधिकारी को अवगत कराया गया है। प्रहलाद जाट, मण्डी प्रभारी गौण कृषि उपज मण्डी टोडारायसिंह।

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