डीजल के भावों ने तोड़ी किसान की कमर, बुआई पर करोडों का अतिरिक्त भार

खरीफ की फसल के लिए खेतों में हकाई-जुताई में जुटें किसानों को इस साल डीजल के भाव बढऩे से किसानों को अतिरिक्त भार झेलना पड़ रहा है।

 

By: Vijay

Published: 02 Jul 2020, 09:30 AM IST

टोंक. जिलेभर प्री-मानसून की शुरूआत पर कई हल्की तो कई तेज बारिश हुई है। ट्रैक्टरों की गरगराहट के साथ किसान भी खरीफ की फसल के लिए खेतों में हकाई-जुताई में जुट गए है। लेकिन इस साल डीजल के भाव बढऩे से किसानों को अतिरिक्त भार झेलना पड़ रहा है। वहीं टिड्डी के हमलों से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

वहीं कृषि विभाग ने 20२०-२१ में खरीफ फसल का २.९३ लाख हैक्टेयर का लक्ष्य रखा है। जिसमें से अब तक ११६०० हैक्टेयर में किसानों ने खरीफ की बुआई की है। विभाग द्वारा रखे गए लक्ष्य के अनुसार बुआई होती है तो २.९३० लााख लीटर डीजल की खपत होगी। गत ८ जून को डीजल का भाव ७२.०७ रूपए प्रति लीटर थे, जबकि २९ जून को डीजल के भाव बढक़र ८१.८७ रूपए प्रति लीटर हो गए है।

यानि २२ दिनों में डीजल के भावों में १०.४३ रूपए प्रती लीटर की बढोतरी हुई है। कृषि विभाग के अनुसार प्रस्तावित लक्ष्य २.९३ लाख हैक्टेयर में बुआई होती है तो डीजल की वर्तमान दर के हिसाब से जिले के किसानों पर २ करोड ८७ लाख १४ हजार रूपए का अतिरिक्त भार आएगा। कृषि विभाग के अनुसार अभी खरीफ की बुआई का समय चल रहा है। बारीश का दौर कम रहने से २८ जून तक प्रस्तावित लक्ष्य के विपरित मात्र ११६२७ हैक्टेयर में ही बुआई हो पाई है। बाकि की बुआई के लिए किसान बरसात का इंजार कर रहा है।


डीजल की खपत व खर्च को हिसाब
फसल की तैयारी के लिए एक हैक्टेयर में बुआई करने पर करीब 5 लीटर डीजल खर्च होता है। बुआई करने से पहले खेत तैयार करने में भी लगभग इतना ही डीजल खर्च होता है इस प्रकार दो बार टै्रक्टर चलाने पर ओसतन एक हैक्टैयर में १० लीटर डीजल की खपत होती है। इस प्रकार लक्ष्य के मुताबिक २.९३ लाख हैक्टेयर में बुआई करने पर जिले में २९३००० लाख डीजल की खर्च होगा। गत २२ दिनों में डीजल के दामों में हुई १०.४३ रूपए प्रती लीटर की बढा़ेतरी से किसानों पर २ करोड ८७ लाख १४ हजार रूपए का अतिरिक्त भार आएगा।


ये है बुआई का समय

कृषि विभाग के उपनिदेशक महेश शर्मा ने बताया कि खरीफ की फसलों के लिए १५ जून से १५ जुलाई तक ज्वार, १५ जून से मध्य जुलाई तक बाजरा , १५ जून से ३० जून तक मक्का , जुलाई के प्रथम सप्ताह से ३० जुलाई तक मूंग व उड़द व जुलाई के प्रथम सप्ताह से जुलाई अंत तक तिल आदि फसलों की बुआई की जाती है। शर्मा ने बताया कि इसी प्रकार जून के प्रथम सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक मूंगफली, १५ जुलाई से १५ अगस्त तक ग्वार की फसल की बुआई करे।

ये है जिले में बुआई का लक्ष्य

कृषि विभग के सहायक निदेशक सांख्यिकी अधिकारी सुगर सिंह ने बताया कि २०२०-२१ में जिले में खरीफ की फसल के प्रस्तावित लक्ष्य २९३४२० लाख हैक्टेयर रखा गया है। जिसमें से टोंक में ११४०, मालपुरा में ३८१७ व दूनी में ६६७० हैक्टेयर में अब तक खरीफ की विभिन्न फसलों की बुआई हो चुकी है। सिंह ने बताया कि जिले में अब तक ज्वार २३७५, बाजरा २८३५, मक्का ४८०, मूंग १४३५, उड़द ३७५०, मुंगफली १००, तिल ५, कपास १२, ग्वार ४०, सब्जीयां १७० व अन्य फसलों की ४२५ हैक्टेयर में बुआई हो चुकी है।


सरकार दे तुरन्त राहत
डीजल के दामों में वृद्धि व टिड्डी हमलों से किसानों की कमर टूट रही है। केन्द्र सरकार को समय रहते पेट्रेाल.डीजल के दामों में कमी करके किसानों व आमजन को राहत प्रदान करनी कर टिड्डी हमलों की रोकथाम के लिए भी पुख्ता बंदोबस्त करने चाहिए।

रतन खोखर, किसान नेता

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