गंदे नालों से हो रही है सब्जियों की पैदावार

टोंक में सब्जी का उत्पादन गन्दे नालों के पानी से हो रहा है, जिससे कई घातक बीमारियां हो सकती है। ये सब्जियां स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर साबित हो रही है ।

By: pawan sharma

Published: 08 Apr 2021, 06:58 AM IST

टोंक. जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की नाक के नीचे शहर के कई इलाकों में गंदे पानी से सब्जियों सहित फसलों की पैदावार कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। टोंक जिला ही नही बल्कि जयपुर व दिल्ली सहित महानगरों में टोंक की सब्जियां बड़े ही चाव से खाई जाती है, लेकिन ये सब्जियां स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर साबित हो रही है । जिला मुख्यालय पर तो कई बड़े अधिकारी खुद यहां की सब्जी मण्डी से सब्जियां लेकर जाते है।

टोंक में सब्जी का उत्पादन गन्दे नालों के पानी से हो रहा है, जिससे कई घातक बीमारियां हो सकती है। टोंक से रोजाना ककड़ी, भिंडियां , कद्दू, मिर्च, बैगन, लोकी, गाजर, मूली, हरी सब्जियां, टमाटर, गोभी, व खीरा ककड़ी सहित काफी सब्जियां जयपुर,दिल्ली, एमपी समेत बड़े शहरों में बेचने के लिए काश्तकार जाता है, जो महानगरों में बनास नदी की सब्जी के नाम से महंगे दामों में बिकती है, लेकिन हकीकत कुछ अलग ही है कि टोंक में अधिकांश सब्जियों का उत्पादन शहर के गन्दे नालों के पानी की सिंचाई से हो रहा है।

मोदी की चौकी, रेडियावास, गादोलाई, आदि इलाकों में सब्जी बहुतायत होती है। जहां काश्तकार गन्दे नालों के गन्दे पानी से सब्जी की सिंचाई करते हैं । इसी प्रकार हाइवे किनारे गन्दे नालों में इंजन लगा करके पाइपों से पानी खेत मे डाल करके सिंचाई की जा रही है, लेकिन न तो जिला प्रशासन न ही किसी सम्बंधित विभाग ने आज तक इस ओर कोई कार्रवाई की। गन्दे पानी की सिंचाई से पैदा होने वाली सब्जी के खाने से कई तरह की पेट की बीमारियां हो रही है।


सडक़ों पर बैठे नजर आते है मवेशियों के झुण्ड

नगरफ ोर्ट. कस्बे में अलसुबह ही सडक़ों पर मवेशियों का झुंड बैठा नजर आता है। इनसे यहां पर गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होती है और इनसे बचकर निकलना पड़ता है। वहीं चौपहिया वाहन चालक उतरकर सडक़ से मवेशियों को हटाते हुए कई बार नजर आते हैं। इस मार्ग पर कस्बे में में स्ट्रीट लाइट नहीं होने से कई बार यह मवेशी नजर नहीं आते हैं और वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

इस समस्या के निस्तारण के लिए प्रशासन को समुचित व्यवस्था करनी चाहिए, वहीं लोगों को भी आगे आकर प्रशासन का सहयोग करना चाहिए कि मवेशियों को खुले में नहीं छोडकऱ घरों या बाड़े में बांधकर रखे। वही मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी नहीं होने के कारण अंधेरे में यह वाहन चालको को नजर नहीं आते हैं।

ऐसे में कस्बे के जागरूक नागरिकों को आगे आकर इस समस्या को दूर करने के लिए आगे आना होगा तथा प्रशासन को भी सख्ती दिखाते हुए प्रशासन को पाबंद करना होगा। कस्बे के मुख्य रास्तों में नालियों का नियमित सफ ाई व्यवस्था के अभाव में कीचड़ होने से गंदगी फैली हुई है। ऐसा भी नहीं है कि प्रशासन को इस बारे में ध्यान नहीं है, लेकिन समस्या से निजात दिलाए जाने के बारे में ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

pawan sharma
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