अलीगढ पहुंचा बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड टीम व कई मशीनों से की जांच

टीम के नेतृत्व में एओ 8 एवं एनएलजेडी मशीनों से इन गोलों की जांच की

 

By: pawan sharma

Published: 13 Mar 2018, 09:11 AM IST

उनियारा/अलीगढ़. अलीगढ़ के बालाकिला पर पुरानी तहसील भवन के पीछे स्थित किले के परिसर मेंं बन रहे हॉस्पिटल क्वार्टस की नींव खुदाई के दौरान सैकड़ों की तादाद में तोप के गोले निकलने पर जांच के लिए बम निरोधक दस्ता एवं पुरातत्व विभाग की टीमे सोमवार देर शाम अलीगढ़ पहुंची।

 

एसडीओ कैलाशंचद गुर्जर ने बताया कि देर शाम टीमें अजमेर रेंज सीआईडी, बम निरोधक दस्ते की टीम एएसआई मनरूप के नेतृत्व में चार बीडीएस अधिकारियों धर्मीचंद, परमानन्द व हनुमान बालाकिला के पास मौके पर पहुंचे। उनके साथ ही पुरातत्व विभाग के वृत अधीक्षक अजमेर नीरज त्रिपाठी भी अपनी टीम के साथ अलीगढ़ पहुंचे, जिन्होंने स्नाईफन डॉग को लोहे के गोले की तरफ भेजा, लेकिन लोहे के गोले में किसी प्रकार का कोई बारूद एवं कोई गंध नहीं होने के कारण स्नाइफन डॉग ने कोई इशारा नहीं दिया।

 

 

टीम के नेतृत्व में एओ 8 एवं एनएलजेडी मशीनों से इन गोलों की जांच की गई, लेकिन उनमें भी कोई लोहे के गोलो में किसी प्रकार की गंध एवं अन्य कोई अवशेष नहीं मिले। जांच जयपुर टीम के नेतृत्व में बम निरोधक दस्ते की टीम एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने सीओ किशोरीलाल एवं एसडीओ कैलाशंचद गुर्जर को बताया कि वह यह रिपोर्ट जयपुर स्थित कार्यालय को अवगत करवाएंगे।

 

 

इस बारे में वृत अधीक्षक अजमेर पुरातत्व विभाग के नीरज त्रिपाठी ने बताया कि मामला पुरातत्व विभाग का है, लेकिन मौके पर लोहे के गोलों में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है, जिससे इनकी जांच कर इनको डिफ्युज किया जा सके। यह केवल लोहे के ठोस गोले हैं। वैसे जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की संभावना जो भी होगी वह अवगत कराई जाएगी।

 

 


इधर, बम निरोधक दस्ते के एएसआई मनरूप ने बताया कि लोहे के गोलो में कहीं से भी कोई ज्वाइंट या परत नजर आ रही है, जिससे की इनमें कोई बारूद या अन्य कोई धातु मिश्रित होने की जानकारी मिले। यह मात्र लोहे के गोले हंै। जांच रिपोर्ट आने पर ही इस जगह दोबारा कोई कार्रवाई होगी। वहीं इधर
एसडीएम कैलाशचंद गुर्जर ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्माण कार्य रोक दिया गया है।

 

 

 

दबाकर रखते थे
क्वार्टस निर्माण के दौरान खुदाई में निकले लोहे के तोप के गोले के बारे में लोगों ने बताया कि इस स्थान पर पुराने जमाने में बालाकिला स्थापित था, जिसमें आज भी किले के निशान एवं अवशेष है। नवाबों के समय सुरक्षा के लिए ऐसे लोहे के गोले दबाकर रखते थे, जो अब खुदाई के दौरान निकल रहे है। कई बुजुर्गो ने बताया कि इसी स्थान पर अभी भी जो किले के कमरे बने हुए है। उन कमरो में भी ऐसे लोहे के गोले भरे है, जो कि पूर्व में भी खुदाई के दौरान हीं निकले थे।

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