अन्नदाताओं के सामने दोहरा संकट

कोरोनावायरस के प्रकोप के बाद अन्नदाताओं के सामने दोहरा संकट खड़ा है। लॉक डाउन होने के कारण धरती पुत्रों के सामने करोड़ों रुपए की फसल कटी हुई खलियानों में पड़ी है, वहीं मंडी बंद होने से किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।

By: MOHAN LAL KUMAWAT

Updated: 07 Apr 2020, 11:11 AM IST


मालपुरा पत्रिका. कोरोनावायरस के प्रकोप के बाद अन्नदाताओं के सामने दोहरा संकट खड़ा है। लॉक डाउन होने के कारण धरती पुत्रों के सामने करोड़ों रुपए की फसल कटी हुई खलियानों में पड़ी है, वहीं मंडी बंद होने से किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते खेत-खलियान में दिन-रात कर रहे सुखी व कटी हुई फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है।


कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते किसानों के द्वारा अपने खेतों में बोई गई गेहूं, जौ चना व तारामीरा की फसलें जैसे-तैसे करके काट तो ली गई, लेकिन अब फसलों को तैयार करने के लिए लॉक डाउन में डीजल की उपलब्धता नहीं होने से थ्रेशर मशीनें भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

वहीं मंडियां बंद होने से किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। बागड़ी निवासी विष्णु वैष्णव, सोडा के किसान कैलाश माली, रिडल्या बुजुर्ग के अमर चंद गुर्जर, सीताराम गुर्जर ने बताया कि फसलों की कटाई तो करा ली गई, लेकिन अब पैसा नहीं होने के कारण थ्रेशर मशीन नहीं मिल रही है।

वहीं लॉक डाउन के चलते थ्रेसर मशीन वालों को डीजल की उपलब्धता में भी समस्या आती है, जिससे गेहूं, जौ, चना की फसल खलियान में पड़ी है। खलियानों में फसलों की रखवाली के लिए दोपहर के समय महिलाओं को कार्य करना पड़ रहा है, वहीं रात्रि के समय पुरुष रखवाली कर रहे हैं।

किसानों ने बताया कि सरकार को मंडी शीघ्र शुरू करानी चाहिए, क्योंकि छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों के सामने आर्थिक संकट बना हुआ है। फसल तैयार करने के लिए खाली बारदाना पैसा सभी की आवश्यकता होती है।

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MOHAN LAL KUMAWAT Photographer
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