बूंदाबांदी व बदलते मौसम से किसानों की बढ़ी परेशानी, खेतों में पक कर खड़ी है फसल

ओलावृष्टि सहित कई मुसीबतें झेल कर जब किसानों की फसलें अंतिम दौर में हैं। उस समय यह कोरोना संक्रमण उनके लिए आफत बन चुका है। किसानों ने बताया कि खेतों में सरसों की फसल काटने के लिए रखी हैं। लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते फसल को मशीन द्वारा निकलवाने थ्रेसर ट्रैक्टर नहीं मिल रहे हैं। वहीं मिल रहे हैं उनके भाव बढ़ गए हैं।

पीपलू (रा.क.). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान 14 अप्रैल तक संपूर्ण देश को संपूर्ण लॉक डाउन करने के साथ ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें छा गई है। एक और जहां कोरोना संक्रमण से बचाव करने के लिए किसान सरकार व जिला प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने को बाध्य हैं।

वहीं दूसरी ओर लगातार हर कभी खराब हो रहे हैं मौसम से खेतों में रखी सरसों की फसल को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा के बाद ही मंगलवार की रात्रि में बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। जबकि पीपलू उपखंड क्षेत्र में कई किसानों ने फसलें काटकर खेतों पर रख रखी हैं। लेकिन लॉकडाउन के चलते किसान कटी हुई फसल से सरसों निकालने में परेशान हो रहे हैं।

किसान इसलिए भी चिंतित हैं की खेतों में रखी फसल मौसम की भेंट या अज्ञात कारणों से कहीं आगजनी के हवाले नहीं चढ़ जाए। ओलावृष्टि सहित कई मुसीबतें झेल कर जब किसानों की फसलें अंतिम दौर में हैं। उस समय यह कोरोना संक्रमण उनके लिए आफत बन चुका है। किसानों ने बताया कि खेतों में सरसों की फसल काटने के लिए रखी हैं। लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते फसल को मशीन द्वारा निकलवाने थ्रेसर ट्रैक्टर नहीं मिल रहे हैं।

वहीं मिल रहे हैं उनके भाव बढ़ गए हैं। ऐसे में किसान चिंतित हैं कि उनकी कटी हुई फसलें, खेतों में अभी तक खड़ी फसलें मौसम की भेंट चढ गई या अज्ञात कारणों से आगजनी हो जाये तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों देवली क्षेत्र के एक किसान के खेत में कट कर रखी सरसों की फसल में अज्ञात कारणों से आग लग गई थी। इसके चलते पीपलू क्षेत्र के किसान खासा चिंतित है।


पशु आहार की दुकानें भी खोले
कृषि मंडी के चैयरमेन रहे रामनिवास गुर्जर ने बताया कि लॉकडाउन के चलते किसानों के समक्ष काफी परेशानियां आ रही हैं। पशु आहार, खेत पर इंजन चलाने के लिए डीजल, कृषि यंत्रों के लिए डीजल लेने जाने वाले किसानों पर पुलिस डंडे बरसा रही हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लॉकडाउन कानून व्यवस्था को लेकर नहीं स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हैं। इसमें पुलिस व प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण भी रखें।

अगर किसानों को पशु आहार लाने, खेतों की फसलें काटने, फसलों को घर लाने या मंडी तक ले जाने में प्रशासन व पुलिस द्वारा अनावश्यक परेशान कर डंडे बरसाएं जाएंगे तो वह कोरोना की बजाए आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे। गुर्जर ने जिला कलेक्टर से मांग की हैं कि वह उपखंड व पुलिस प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण के साथ इस लॉकडाउन में किसानों के साथ व्यवहार करने के लिए निर्देशित करें ताकि किसानों को पशुपालन व कृषि उत्पादन में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।


इनका कहना हैं
किसानों के कृषि यंत्रों को लॉकडाउन के दौरान अतिआवश्यक सेवा मानते हुए छूट प्रदान की हुई हैं, लेकिन किसान कोरोना संक्रमण को लेकर सावधानी भी बरतें। साथ ही प्रशासन का भी इसमें सहयोग करें। साथ ही किसान डीजल कृषि यंत्रों में आकर पेट्रोल पंप से ले सकते हैं।
डॉ. लक्ष्मीनारायण बुनकर, उपखंड अधिकारी पीपलू

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pawan sharma Desk
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