कशीदाकारी ने युवाओं को दिया रोजगार का मौका

शहर में एक हजार युवा जुड़े हैं
टोंक. शहर में मशीन से कशीदाकारी के कार्य ने युवाओं को रोजगार मुहैया कराया है। यह कार्य महज डेढ़ दशक पहले ही शुरू हुआ है। शहर में कम्प्यूटर मशीन कशीदाकारी से शुरुआत में कुछ लोग ही जुड़े थे, लेकिन जब इसके कार्य की मांग बढऩे लगी तो कई लोगों ने यह मशीन खरीद ली और युवाओं को रोजगार का अवसर मिला।

By: jalaluddin khan

Updated: 16 Sep 2021, 08:37 PM IST

कशीदाकारी ने युवाओं को दिया रोजगार का मौका
शहर में एक हजार युवा जुड़े हैं
टोंक. शहर में मशीन से कशीदाकारी के कार्य ने युवाओं को रोजगार मुहैया कराया है। यह कार्य महज डेढ़ दशक पहले ही शुरू हुआ है। शहर में कम्प्यूटर मशीन कशीदाकारी से शुरुआत में कुछ लोग ही जुड़े थे, लेकिन जब इसके कार्य की मांग बढऩे लगी तो कई लोगों ने यह मशीन खरीद ली और युवाओं को रोजगार का अवसर मिला।


एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब एक हजार युवा इस कार्य से जुड़े हैं। वहीं इतनी ही महिलाएं घरों में इस व्यवसाय से जुड़ गई है। ऐसे में एक हजार परिवार को नया रोजगार मिला है। शहर के सोलंगपुरा, भीखापुरा, कम्पू, शंकरपुरा, सिविल लाइन, जानबाज का बंधा, चतुर्भुज तालाब, कालीपलटन, सईदाबाद, सरवराबाद, गड्ढा पहाडिय़ा, रजबन समेत शहर के अधिकांश इलाकों तथा ग्रामीण क्षेत्र में कम्प्यूटर मशीन कशीदाकारी ने पैर पसार लिए हैं।


इसमें तमाम कार्य कम्प्यूटर के माध्यम से होता है। ऐसे में पांच साल पहले युवाओं ने कम्प्यूटर सीखा और किसी अन्य कम्प्यूटर के कार्य के बजाए कशीदाकारी से जुड़ गए। इसका कारण यह भी है कि शहर में कम्प्यूटरकर्मी को मानदेय कम मिलता है, जबकि कसीदाकारी में अधिक कमाई होने से युवा इस कार्य में जुड़ गए हैं।


वहीं महिलाएं घर का कार्य खत्म करने के बाद कपड़े पर कशीदाकारी के छूटे हुए दागे काटने का कार्य मिल गया है। जबकि टोंक में बीड़ी और नमदा व्यवसाय ही टोंक में है। ऐसे में उसमें अधिक रोजगार नहीं मिल रहा है। कम्पयूटर मशीन से हो रही कशीदाकारी ने काफी हद तक युवाओं को रोजगार दिया है।

जयपुर से मिलता है ऑर्डर
इस कार्य से जुड़े चेतन सैनी ने बताया कि वह लगभग 15 साल से कशीदाकारी एम्ब्रॉयडरी मशीन का कार्य कर रहे हैं। शुरुआत में एक मशीन लाकर कार्य शुरू किया था। आज कार्य का बढ़ाते हुए अच्छा रोजगार होने पर 20 मजदूरों को प्रति माह रोजगार मिल रहा है।


कोरोना काल के चलते कशीदाकारी पर भी मंदी का असर हुआ था, लेकिन मजदूरों को कार्य दिया, जिससे उनकी आजीविका चलती रही। टोंक में जयपुर के व्यापारियों की ओर से कार्य कराया जाता है। इसकी मांग जयपुर में बहुत है।

jalaluddin khan Reporting
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