पालिका ने अतिक्रमण हटा सरकारी भूमी को कराया मुक्त

गैरमुमकिन आबादी भूमि पर घाटी रोड से सुईवालों की ढाणी क्षेत्र में लोगों ने अतिक्रमण कर तारबंदी कर रखी थी, जिसको पालिका ने पुलिस जाब्ते सहित अतिक्रमियों को बेदखल किया।

 

By: pawan sharma

Published: 14 Aug 2020, 07:53 AM IST

मालपुरा. नगर पालिका की गैरमुमकिन आबादी भूमि पर घाटी रोड से सुईवालों की ढाणी क्षेत्र में लोगों ने अतिक्रमण कर तारबंदी कर रखी थी, जिसको गुरुवार अधिशासी अधिकारी एवं पालिका अध्यक्ष पुलिस जाब्ते सहित मौके पर पहुंचे तथा अतिक्रमियों को बेदखल किया।

घाटी रोड से सुईवालों की ढाणी की ओर जाने वाले मार्ग पर नगरपालिका की गैर मुमकिन आबादी क्षेत्र पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर तारबंदी कर रखी थी, जिसकी जानकारी पालिका को मिलते ही अधिशासी अधिकारी राजूलाल मीणा, पालिका अध्यक्ष आशा महावीर नामा, हल्का पटवारी शंकर लाल चौधरी मय पुलिस जाब्ते के मौके पर पहुंचे, जहां मौजूद अतिकर्मियों ने अतिक्रमण हटाने का विरोध किया और अवगत कराया कि बिना किसी सूचना व नोटिस के अतिक्रमण नहीं हटाने देंगे, जिस पर नगर पालिका ने कार्यवाही करते हुए सभी अतिक्रमियों को मौके से बेदखल किया और सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया ।

अतिक्रमण हटाया
नगरफोर्ट. सरदारपुरा गांव में लोगों द्वारा अतिक्रमण कर पानी की निकासी रोकने पर प्रशासन ने निकासी करवाई। अतिक्रमण के चलते पानी की निकासी नहीं हो पा रही थी। गुरुवार को जेसीबी से अतिक्रमण हटाकर नाली बनाकर पानी की निकासी करवाई। इस दौरान सरपंच मंजूदेवी नागर आदि थे।


नोटिस से किया जवाब-तलब

टोंक. सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक को आपराधिक मामले के समाप्त होने के बाद भी सेवानिवृत्ति परिलाभ का भुगतान नहीं देने के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने गुरुवार को राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक सहित अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी चार सप्ताह में जवाब-तलब किया है।


न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह की एकलपीठ ने यह अंतरिम आदेश टोंक निवासी सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक प्रेमचन्द नायक की ओर से एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा के जरिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं। याचिकाकर्ता की नियुक्ति पुलिस कांस्टेबल के पद पर हुई थी।

वरिष्ठता के आधार पर वह पुलिस निरीक्षक के पद से वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त हो गया। इस दौरान उसके विरुद्ध एक आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ, जिसमें उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की आपराधिक विविध याचिका स्वीकार कर आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही को निरस्त कर दिया। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद याचिकाकर्ता ने विभाग को उसके सेवानिवृत्त परिलाभ एपीएल तथा निलंबन काल का पूरा वेतन दिलवाने के लिए अभ्यावेदन दिया, लेकिन विभाग ने उसे कोई परिलाभ नहीं दिया। इसे याचिका में चुनौती दी गई।

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