video: Mahashivratri- इस शिव मंदिर में हर मन्नत होती है पूरी, यहां प्राकृतिक हरियाली के दर्शन से भी मिलता है आत्मीय सुकून

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By: pawan sharma

Published: 03 Mar 2019, 02:30 PM IST

पीपलू। यूं तो प्रत्येक शहर और गांवों में शिव के अनेकों शिवालय है, जिनमें से अधिकतर का अपना-अलग पुरातात्विक और पौराणिक महत्व भी है। पुराणों में बारह ज्योर्तिलिंग के अलावा भी शिव के पवित्र स्थानों का उल्लेख मिलता है। प्रत्येक स्थान से जुड़ी अनेक कथाएं हैं तथा इसका खगोलीय महत्व भी है।

 

ऐसा ही एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक शिवालय मंदिर टोंक जिले के पीपलू कस्बे के पौराणिक रमणीक सरोवर किनारे स्थित है। जहां पहुंचने पर प्रत्येक व्यक्ति को शिव जलाभिषेक, ऊँ नम शिवाय के जाप सुनने, प्राकृतिक हरियाली के दर्शन से आत्मीय सुकून मिलता है। वहीं शिवालय में पूजा अर्चना करने से धर्म लाभ भी प्राप्त होता है।

 

इस धार्मिक स्थल के बारे में मान्यता है कि यहां पर श्रद्धालु द्वारा की गई हर मन्नत पूर्ण होती है। यहां तक कि अकाल मृत्यु भय भी दूर होता है। इसी कारण यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का आने का तांता लगा रहता है तथा श्रावण मास में तो यहां सुबह से शाम तक शिव पूजा अर्चना करने वाले शिव भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है।

 

किवदन्ति है कि इस मंदिर का निर्माण सातवीं सदी में पीपलू कस्बे को बसाने वाले पिताशाह विजयवर्गीय महाजन ने प्रभु कृपा से प्राप्त अमूल्य धातु पारस से स्वर्ण बनाते हुए करवाया था। जो धौली मालपुरा, गांव से सात जातियों के साथ पीपलू आए थे।

 

पिताशाह ने पीपलू के पौराणिक सरोवर किनारे के शिवालय नामक स्थान पर विधि विधान से भगवान भूतेश्वर का मंदिर निर्मित कराते हुए प्रतिष्ठापना कराई। इन्होंने प्रभु कृपा से प्राप्त पारस से 15 हिन्दू तिथियों के मतानुसार 15 मंदिरों का निर्माण कराया था।

 

जिनमें से कई मंदिर तो देखभाल संरक्षणद्ध अभाव में खण्डर हो मलवे में तब्दील हो गए। वहीं वर्तमान में प्राचीन एवं ऐतिहासिक गाथा कह रहे मंदिरों में भगवान भूतेश्वरए श्री चारभुजाजी, श्री भैरवनाथ, श्री सीतारामजी महाराज के है।

 

पिताशाह द्वारा बनाए गए भूतेश्वर एवं श्री चारभुजाजी मंदिरों में उपयोग में लिए गए पत्थरों में उत्कीर्ण उत्कृष्ट शिल्प आज भी इन स्थानों के पुरा वैभव की गाथा कह रहे है।

 

शिवालय के स्थान पर श्रावण मास तथा महाशिवरात्रि पर्व पर लोक सांस्कृतिक मेलों पर भव्य आयोजन होते हैं। जिनमें शिव बाबा के विभिन्न स्वरूपों की सजाई जाने वाली झाकियां आकर्षण का केन्द्र होती है। यहां वर्षो से अखण्ड ज्योत जल रही है। वहीं मोर चुग्गा की व्यवस्थाएं क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से अनवरत संचालित है।

 

यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो के लिए क्षेत्रीय लोगों की श्री शिव समिति बनी हुई है। जो यहां की व्यवस्थाओं की देखभाल करने सहित इस स्थान का विस्तार करने एवं रमणीक बनाने में अनवरत लगी हुई है। जिसके प्रयासों से यहां भूतेश्वर उद्यान विकसित हुआ जहां बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले.चकरियांए फिसल पट्टीयंा लगी हुई है। वहीं लोगों के विश्राम के लिए आरामदायक सीमेन्टेड बेेंच स्थापित है।

 

उद्यान में भ्रमण के लिए हरी दूब सहित विभिन्न किस्मों के पेड़.पौधे लगे हुए है जहां सुगन्धित चमेलीए गुलाब के पुष्प यहां आने वाले प्रत्येक पर्यटक का मन लुभाते है। जिससे यह स्थल धार्मिकए पर्यटनए भ्रमणीक दृष्टि से उपयुक्र्त होने के कारण जन.जन की आस्था का केन्द्र बना है।

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