रबी की फसल पर संकट, खाद की कमी से किसान हो रहे है परेशान

रबी की बुवाई इन दिनों चरम पर है और खाद नाम मात्र की भी नहीं है। ऐसे में एक कट्टा प्राप्त करने के लिए ही किसानों को धूप में घंटों रहकर पसीने बहाने पड़ रहे हैं।

By: pawan sharma

Published: 08 Oct 2021, 09:39 AM IST

टोंक. रबी की बुवाई इन दिनों चरम पर है और खाद नाम मात्र की भी नहीं है। ऐसे में एक कट्टा प्राप्त करने के लिए ही किसानों को धूप में घंटों रहकर पसीने बहाने पड़ रहे हैं। आलम यह है कि खाद वितरण में पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है। जबकि हर साल यह पता होता है कि रबी की बुवाई में खाद की कमी होती है। इसके बावजूद इसकी व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में किसानों को रबी की बुवाई में परेशानी हो रही है।

आलम यह है कि किसान का आधा परिवार दिनरात खेत में काम कर रहा है। वहीं आधे परिवार को खाद की जुगत लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद किसी किसान को मिल रही है तो किसी को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें अन्य खाद का सहारा लेकर बुवाई करनी पड़ रही है। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में रबी की बुवाई का लक्ष्य 398700 हैक्टेयर रखा गया है।

इसमें सर्वाधिक करीब तीन सरसों की बुवाई होने की उम्मीद है। जिले में रबी के लिए 8500 टन खाद की जरूरत है। जबकि अभी महज एक हजार टन ही खाद्य है। वहीं रबी में बुवाई का समय अक्टूबर का महीना ही है। ऐसे में इस महीने में ही जिले के किसानों को 4500 टन खाद चाहिए, लेकिन फिलहाल इतनी मात्रा में खाद नहीं है। वहीं जिले के 199 जीएसएस के गोदाम खाली है।

बाजार स्थित खाद-बीज की दुकानों पर भी डिमांड अनुसार डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान मायूस है। मजबूरन किसानों को एक गांव से दूसरे गांव व शहर तक दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद उन्हें डीएपी खाद नहीं मिल रही है। इधर, किसानों का कहना है कि खेत में रबी की बुवाई के लिए वे लोग 15 कट्टे लेने जाते हैं, लेकिन उन्हें जीएसएस या फिर दुकान पर महज 3 से 4 कट्टे ही मिल रहे हैं।

इन्हें लेने में भी दो से तीन दिन लग रहे हैं। ऐसे में जिले में किसानों की कतारे बढऩे लगी है। इस साल मानूसन देरी से आने और बरसात अब तक होने से अक्टूबर में किसान रबी की बुवाई में जुट गए हैं। किसान बुवाई में बीज के साथ डीएपी डाल रहे हैं। ताकि फसल अच्छी हो सके। दूसरी तरफ कृषि विभाग डीएपी की कमी के चलते किसानों को सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) आदि उर्वरकों का प्रयोग करने को कह रहा है। यह सस्ता भी है।

यह कर सकते हैं किसान
कृषि विभाग के सहायक निदेशक दिनेशकुमार बैरवा ने बताया कि किसान फसलों के उत्पादन के लिए आवश्यक पोषक तथा अन्तर्गत किसान यूरिया, डीएपी, म्यूरेट ऑफ फोटाश एवं सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) का प्रयोग किया जाए। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। डीएपी में फास्फोरस 46 प्रतिशत एवं नाइट्रोजन 18 प्रतिशत होता है।

जबकि एसएसपी उर्वरक में न्यूनतम 14.5 प्रतिशत फास्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा होती है। यह सरसों व तारामीरा में तेल की मात्रा बढ़ाती है। वर्तमान में डीएपी उर्वरक की बाजार दर 1200 रुपए प्रति बैग है। जबकि एसएसपी उर्वरक की बाजार दर महज करीब 300 रुपए प्रति बैग ही है। ऐसे में किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए इनका प्रयोग भी करना चाहिए। सरसों फसल उत्पादन के लिए 60 किलो नाइट्रोजन एवं 30 से 40 किलो फास्फोरस की मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

औसत से अधिक बरसात से अच्छा होगा उत्पादन

इस साल जिले में औसत से अच्छी बरसात हुई है। ऐसे में जिले के तालाब, बांध व फार्मपोंड में पानी जमा है। ऐसे में लक्ष्य से अधिक बुवाई की उम्मीद है। इसके चलते कृषि विभाग ने जिले में करीब 3 लाख 98 हजार 700 हैक्टेयर में रबी बुवाई का लक्ष्य रखा है।

फिलहाल सरसों का लक्ष्य 2 लाख 55 हजार हैक्टेयर तय किया है, लेकिन कृषि विभाग को उम्मीद है कि सरसों की बुवाई 3 लाख हैक्टेयर के करीब होगी। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में गेहूं 42000, जौ 500, चना 85000, सरसों 255000, अन्य दलहन 1700 समेत अन्य फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक पिछले साल 27 हजार 221 मैट्रिक टन डीएपी जिले को मिला था, लेकिन इस साल काफी कम मिला है।

आपूर्ति करा रहे हैं
डीएपी की खाद की कमी जरूर है, लेकिन आपूर्ति कराई जा रही है। कोशिश करेंगे कि किसानों को परेशानी नहीं हो। डीएपी खाद मंगवाई जा रही है।
राजेन्द्र खण्डेलवाल, उपनिदेशक कृषि विस्तार विभाग टोंक

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