गुरु का अनुसरण करें-मुनि सुधासागर

मुनि सुधासागर ने आवां स्थित जैन तीर्थ सुदर्शनोदय अतिशय क्षेत्र पर मंगल-प्रवचन करते हुए कहा कि चिकित्सक की दृष्टि बीमारी पर तो शिक्षक, गुरु और माता-पिता की नजर कमी, गलती और हमारे अवगुणों पर जाती है।

By: MOHAN LAL KUMAWAT

Published: 19 Jan 2019, 08:51 AM IST

आवां. गुरु और ज्येष्ठजनों की डांट और फटकार से आनन्द के लड्डू फूटने चाहिए, मन में इन महान और पूज्यों के पैर छूने के भाव आना चाहिए। तुम्हारे पुण्या का उदय है कि तुम्हारे दोषों और गलतियों पर इनकी दृष्टि पड़ी हैइनका तुमसे विशेष अनुराग और स्नेह होने के कारण ही वो तुम्हें दोष मुक्त करना चाहते है।

 

 

मुनि सुधासागर ने आवां स्थित जैन तीर्थ सुदर्शनोदय अतिशय क्षेत्र पर मंगल-प्रवचन करते हुए कहा कि चिकित्सक की दृष्टि बीमारी पर तो शिक्षक, गुरु और माता-पिता की नजर कमी, गलती और हमारे अवगुणों पर जाती है।

 

इन्सान को अपने गुरु, माता-पिता और सास-ससुर के बताए रास्ते का अनुसरण करने की सीख देते हुए मुनि ने कहा कि इनकी ओर से हमारी भूलों और अवगुणों पर टोकने और दण्ड देने पर मन में बुरे और निन्दा के भाव नहीं आना चाहिए।

 

ऐसा आने से पतन और दुर्गति का समय शुरू हो जाता है। इस अवसर पर मुनि ने जीवन मे सफल होने के सूत्र बताते हुए सफल व्यक्ति का वन्दन कर उसके अनुभव का लाभ उठाने के तरीके भी सुझाए।

 

आशीष शास्त्री और चन्द्रप्रकाश हरसोरा ने बताया कि मुनि पुंगव १०८ सुधासागर, मुनि महासागर, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर व क्षुल्लक गम्भीर सागर के सानिध्य मे अनेकों धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होने के साथ धर्म और ज्ञान की सरिता बह रही है।

 

सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के महामंत्री पवन कुमार जैन ने शुक्रवार को मंगल- प्रवचन के दौरान तीर्थ क्षेत्र पर होने वाले समवशरण जिनालय, सहस्त्रकूट जिनालय और नन्दीश्वर जिनालय के 13 से 18 फरवरी तक होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के आयोजन की विस्तार से व्व्याख्या की।

 

समिति के नेमीचन्द जैन, संजय छाबड़ा, रमेश गोयल, भागचन्द जैन और श्रवण कोठारी बताया कि तीर्थ क्षेत्र पर रविवार को मुनि पुंगव १०८ सुधासागर, मुनि महासागर, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर व क्षुल्लक गम्भीर सागर की पिश्छिका परिवर्तन की तैयारियां अन्तिम दौर में है।

 

मुनि संघ के सानिध्य मे भगवान के नित्य अभिषेक, शान्ति-धारा, आहार-चर्या, मंगल- प्रवचन और जिज्ञासा समाधान मे देश-भर के पुण्र्याजक धर्म-लाभ कमा रहे है। मंगल प्रवचन के बाद मुनिसंघ आहार-चर्या को निकल गए। शाम को श्रावको ने जिज्ञासा समाधान मे अपनी ज्ञान-पिपासा शान्त की।

MOHAN LAL KUMAWAT
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