35 साल से आवासीय पट्टे के लिए भटक रहा स्वतंत्रता सेनानी का परिवार

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्वतंत्रता सेनानी भूरा राम गुर्जर के नाम पर भले ही सरकार ने कर दिया हो, लेकिन धरातल पर उसके परिवार किसी तरह की परेशानियां झेल रहे हैं। इस पर ना तो सरकार और ना ही प्रशासन ध्यान रहा है।

By: pawan sharma

Published: 12 Jul 2021, 03:28 PM IST

राजमहल. कस्बे का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्वतंत्रता सेनानी भूरा राम गुर्जर के नाम पर भले ही सरकार ने कर दिया हो, लेकिन धरातल पर उसके परिवार किसी तरह की परेशानियां झेल रहे हैं। इस पर ना तो सरकार और ना ही प्रशासन ध्यान रहा है।

दरअसल देवली सडक़ मार्ग पर 1991 से मकान बनाकर रह रहे स्वतंत्रता सेनानी के इस परिवार को 35 वर्ष से आवासीय पट्टा नहीं मिलने के कारण 103 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी सहित परिवार के लोग कब्जे शुद्धा भूमि में मकान बनाकर रहना पड़ रहा है।


पट्टे के लिए स्वतंत्रता सेनानी भूरा राम गुर्जर की पत्नी गोगा देवी सहित परिवार के लोगों ने कभी टोंक तो कभी पंचायत समिति देवली के विकास अधिकारी तो कभी ग्राम पंचायत में आवासीय पट्टे के लिए गुहार भी लगाई, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई महज कागजों तक सिमट कर रह गई।

परिवार के लोगों को आज तक पट्टा नहीं मिल पाया है। आखिर 103 वर्ष की उम्र में परिवार के साथ परेशान होकर स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी गोगा देवी ने गत 29 जून को फिर से जिला कलक्टर कार्यालय में ज्ञापन देकर आवासीय पट्टे की मांग की है। जहां से 6 जुलाई को कार्यालय जिला कलक्टर टोंक ने पत्र लिखकर सरपंच व ग्राम विकास अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रेषित किया है।

देवीखेड़ा निवासी स्वतंत्रता सेनानी भूरा राम गुर्जर का परिवार राजमहल के देवली सडक़ मार्ग स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के पास कई दशक पूर्व छप्पर डालकर रहने लगा था। वर्ष 1991 में स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी ने परिवार को अंधड़ व बारिश से बचाने के लिए यहीं पर मकान बनाकर गुजर बसर करने लगी।


तभी से परिवार ने कभी जिला कलक्टर तो कभी पंचायत समिति के विकास अधिकारी के पास आवासीय पट्टे के लिए गुहार लगाई। अधिकारियों ने स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को पट्टा देने के लिए सम्बन्धित तत्कालिन सरपंच व सचिव को आदेशित भी किया, लेकिन यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई। आज यह परिवार आबादी क्षेत्र में वर्षों पूर्व से मकान बनाकर रहने के बाद एक अतिक्रमी की भांति जीवन यापन कर रहा है।

राजस्व अभियान में भी नहीं मिली राहत

राज्य सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों के विकास के साथ ही लोगों के राजकीय कार्यों की सुनवाई के लिए 2008 में चलाए गए राजस्व अभियान के दौरान भी खसरा संख्या 553 व नए बदले खसरा संख्या 68 पर पट्टे की गुहार लगाई गई। शिविर में मौजूद तहसीलदार व उपखण्ड अधिकारी ने कार्यवाही के लिए ग्राम पंचायत प्रशासन को आदेशित कर जल्द पट्टा जारी करने के निर्देश दिए, लेकिन यहां भी परिवार को पट्टा जारी नहीं किया गया। हाल ही में परेशान स्वतंत्रता सेनानी के परिवार ने अब राजस्थान सम्पर्क पोर्टल सहित मुख्यमंत्री की मेल आइडी पर शिकायत दर्ज करवाकर पट्टे की मांग की है।

आबादी भूमि नहीं है
स्वतंत्रता सेनानी के परिवार की ओर से जहां पट्टा मांगा जा रहा है वह भूमि पंचायत की आबादी भूमि नहीं है। वहीं मांगे जा रहे पट्टे की लम्बाई-चौड़ाई अधिक है। जो पट्टा जारी करना पंचायत प्रशासन के नियम व अधिकार क्षेत्र में नहीं है। ऐसे में हमने उच्चाधिकारियों को जवाब भेज दिया है।
अमित दाधीच, सचिव ग्राम पंचायत राजमहल।

जानकारी नहीं है
स्वतंत्रता सेनानी की ओर से आवासीय पट्टे की मांग का मामला जानकारी में नहीं है। ऐसा है तो मामले की जानकारी करवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
शिव सिंह मीणा, कार्यवाहक विकास अधिकारी पंचायत समिति देवली।

pawan sharma
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