गलवा बांध की नहर से तीन हजार हैक्टेयर भूमि होगी सिंचाई

गलवा बांध की नहर से तीन हजार हैक्टेयर भूमि होगी सिंचाई

 

By: pawan sharma

Published: 17 Nov 2020, 05:32 PM IST

उनियारा. उपखण्ड क्षेत्र के सबसे बड़े गलवा बांध की नहर कमाण्ड क्षेत्र के किसानों की रबि की फसल की सिचाई के लिए सोमवार को खोल दी गई। दोपहर में जल उपभोक्ता संगम के चेयरमैन कालुराम गुर्जर, जलसंसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी के साथ बांध पर पहुंचे।


सभी ने बांध की मोहरी पर विधिवत रूप से पूजा-अर्चना कर किसानों की रबि की फसल की बुवाई के लिए बांध के गेट खोल दिए। जलसंसाधन विभाग के सहायक अभियंता रामप्रसाद जांगिड़ ने बताया कि 20 फीट भराव क्षमता वाले गलवा बांध में इस बार कम बरसात होने से 30 सितम्बर 2020 तक मात्र 2 फुट 10 इंच ही पानी आया था, जो वाष्पीकरण एवं भूमि में जाने से सोमवार तक 8 फुट 9 इंच ही रह गया।

उन्होंने बताया कि उक्त पानी में से 4 फीट पानी उनियारा की पेयजल व्यवस्था एवं निजी क्षेत्र की विद्युत उत्पादक कम्पनी कल्पतरू पॉवर ट्रान्समिशन तथा मवेशियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा। शेष 4 फीट 9 इंच पानी कमाण्ड़ क्षेत्र के किसानों को सिचाई के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। बांध की नहर का गेज शुरुआत में डेढ़ फीट रखा गया है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा, जिससे बांध के कमाण्ड क्षेत्र की कुल 13 हजार 391 हेक्टेयर भूमि में से 3 हजार हेक्टेयर भूमि में ही सिंचाई हो सकेगी।


उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारी कर्मचारी बांध की नहरों पर लगातार गश्त करेंगे, जिससे अवैध रूप से पानी लेने वालों पर कार्रवाई की जा सके। इस अवसर पर कनिष्ठ अभियंता राजेन्द्र चौधरी, रविना मीणा सहित विभागीय अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।


नालियों की टूटी पट्टियों से परेशानी
टोंक. नगर परिषद ने शहर की कॉलोनियों में नालियों का निर्माण करने के बाद उन्हें पट्टियों से ढक दिया। ताकि लोग उन पर चलकर निकल सके, लेकिन कई जगह यह पट्टियां टूट चुकी है। लगातार शिकायत करने के बाद इनकी जगह नई पट्टियां व जालियां नहीं लगवाई गई है। ऐसे में इन पर गिरकर लोग घायल हो रहे हैं।

राजकीय कन्या महाविद्यालय के बाहर कॉलोनी में जाने वाले मोड़ पर भी नाली के निर्माण के बाद पट्टियां लगाई गई थी, लेकिन यह अब टूट गई है। नगर परिषद में लगातार शिकायत की गई, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं की गई। जबकि क्षेत्र के लोगों की मांग है कि नाली का निर्माण फिर से किया जाए और उसे लोहे का जंगला बनाकर सीमेंट से बंद किया जाए। ताकि इस पर भारी वाहन भी गुजरे तो यह क्षतिग्रस्त नहीं हो। ऐसा नहीं होने पर लोग मोटरसाइकिल निकालने में भी परेशान हो रहे हैं।

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