राजनीतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के बिना गांधी की कल्पना वाले राष्ट्र का निर्माण सम्भव नही-प्रोफेसर रामजी सिंह

प्रोफेसर रामजी सिंह को अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन में ‘वर्तमान परिपेक्ष में गांधी विनोबा की प्रासंगिकता’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।

By: pawan sharma

Published: 30 Jul 2018, 02:14 PM IST

टोंक. इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ सोशल फिलॉस्फी के चेयरपर्सन व गांधीवादी व प्रोफेसर रामजी सिंह ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश में राजनीतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। राजनीतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के बिना गांधी की कल्पना वाले राष्ट्र का निर्माण सम्भव नहीं है। गांधी अतीत नहीं वर्तमान और भविष्य है।

 

गांधी को केंद्र में रखकर देश के राजनेताओं को राजनीतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना करनी होगी। प्रोफेसर रामजी सिंह रविवार को अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन में ‘वर्तमान परिपेक्ष में गांधी विनोबा की प्रासंगिकता’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।

 

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को राजनीति के साथ अध्ययन अध्यात्म का भी अध्ययन करना होगा। राजनीति बिना अध्यात्म के संभव नहीं है। उन्होंने गांधी के विचार और अध्यात्म को एक दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने कहा कि धर्म जोडऩे के लिए होते हैं।

 

गांधी ने सर्व धर्म समभाव की बात कही। गांधी का विचार प्रासंगिक था और रहेगा। मुख्य वक्ता आचार्य कुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हीरालाल श्रीमाली ने कहा कि महात्मा गांधी के आध्यात्मिक शिष्य विनोबा भावे ने देश में भूदान यज्ञ चलाकर सामाजिक समरसता के लिए ऐतिहासिक काम किया।

 

देश में जब तक गैर बराबरी रहेगी एक अच्छे देश का एक अच्छे समाज का निर्माण नहीं हो सकता। अध्यक्षता कर रहे समारोह समिति के कार्यसमिति सदस्य मुजीब आजाद ने कहा की गांधी विनोबा के विचारों को जीवन में आत्मसात करके गांधी की कल्पना वाले देश का निर्माण किया जा सकता है।

 

विशिष्ट अतिथि कैप्टन शमशेर थे। इससे पहले अतिथियों का सम्मान किया गया। इस दौरान महावीर तोपड़ा, शब्बीर नागौरी, प्रोफेसर मनु शर्मा, डॉ. अन्नपूर्णा शुक्ला, डॉ. मुक्ति पाराशर, प्रदीप पवार, जसवंत सिंह नरूका, शायर शाद केफी, अच्युत ठाकुर आदि मौजूद थे।


इस दौरान ‘एक ब्रश राष्ट्र के नाम’ प्रदर्शनी संयोजक डॉ. मुक्ति पाराशर, राकेश शर्मा, मनोज नामा, सुमन राजपाल, अतुल शर्मा, सीमा शर्मा, अनुपमा पवार, नाथ दीक्षित ने लगाई। इसे भी लोगों ने देखा।

 

कृषि विधियों की जानकारी दी
देवली. नापाखेड़ा गांव में रविवार को दो दिवसीय शिवयोग कृषि प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। इसमें किसानों को शिवयोग पद्धति पर आधारित विभिन्न कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। शिविर में किसानों को बताया गया कि कैसे शिवयोग पद्धति पर आधारित कृषि विधियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाया जाए।

 

इसके अलावा बिना रासायनिक खाद के कृषि करने, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय के उत्पादन में वृद्धि करने की विभिन्न जानकारी दी गई तथा प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान प्रोजेक्टर के माध्यम से डॉ.अवधूत शिवानन्द का व्याख्यान लाइव दिखाया गया। इस दौरान डॉ. जीएस सोमावत, सत्यनारायण मीणा, जमना सिंह मीणा समेेत नापाखेड़ा, अमरवासी, पाडलिया, देवली व घटियाली समेत गांवों के सैंकड़़ों किसान उपस्थित थे।

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