रसूख में दब रही नगर परिषद, मास्टर प्लान की अनदेखी कर बन रहे हैं आधा दर्जन कॉम्पलेक्स

बिना मापदण्डों के बन रहे कॉम्प्लेक्स से चेयरमैन सहित अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा बना हुआ है।

By: pawan sharma

Published: 24 Jul 2018, 07:55 AM IST

टोंक. शहर में अनुमति की आड़ में बन रहे कॉम्प्लेक्स ने नगर परिषद के नियमों को दबा दिया है। हालांकि नगर परिषद ने इनके निर्माण पर कई बार रोक लगाई, लेकिन ये कुछ समय बाद ही फिर से पर्दे के पीछे शुरू हो जाते हैं।

 

बिना मापदण्डों के बन रहे कॉम्प्लेक्स से परिषद के अधिकारियों का मिलीभगत का अंदेशा बना हुआ है। वहीं मामले में चेयरमैन ने भी मौन साधा हुआ है। शहर में इन दिनों आधा दर्जन कॉम्प्लेक्स (मॉल) का निर्माण चल रहा है।

 

जबकि नगर परिषद को इनके निर्माण में नियमों की पालना करानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होने से ये कॉम्प्लेक्स सर्वाधिक यातायात को प्रभावित करेंगे। वहीं आग लगने समेत अन्य घटनाओं के समय बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।

 

नगर परिषद ने निर्माण के लिए महज दो दर्जन को स्वीकृति जारी की है। ये निर्माण किस हद में हो रहे हैं। इसकी मॉनीटरिंग नहीं हो रही है। इसके चलते निर्माण स्वीकृति के बाद नियमों के बाहर चल रहे हैं।

 

गली में कॉम्पलेक्स हादसे को नियंत्रण
शहर में अधिकतर कॉम्पलेक्स गलियों में है। इनमें कई बार आग लगने के हादसे भी हो चुके, लेकिन गनीमत रही कि जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ऐसा फिर हो गया तो बड़ा हादसा होगा। बड़ा तख्ता क्षेत्र में आधा दर्जन बार आग लग चुकी है।

 

कई दुकानों में रखा सामान इस लिए जल गया कि उनमें आग से काबू पाने के सामान नहीं थे। ना ही समय पर नगर परिषद की दमकल पहुंच सकी। शहर में बन रहे कॉम्पलेक्स भी उसी तर्ज पर बनाए जा रहे हैं।

 

इनमें भी हादसा भूकंप रोधी नियमों की अनदेखी बरती जा रही है। वहीं चौंकाने वाली बात ये भी है कि निर्माणकर्ता भूकम्परोधी निर्माण की रिपोर्ट सम्बन्धित निर्माण अभियंता से नहीं ले रहे हैं। ऐसे में भूकम्प भी आया तो ये भवन टिक नहीं पाएंगे और बड़ा हादसा होगा। शहर में तीन बार भूकम्प के झटके आ चुके हैं। इसमें दर्जनों मकानों व दुकानों में दरारें आ चुकी है।



ये है नियम
व्यावसायिक गाइड लाइन के तहत अनुज्ञा की कुल 35 प्रतिशत भूतल क्षेत्र में निर्माण होना चाहिए। एफएआरए फ्लोर का डेढ़ गुना निर्माण सभी तलों में मिलाकर होना चाहिए। इसमें अंदर के आंगन में लिफ्ट, सीढ़ी, वेंटिलेशन आदि में छूट हो।

 

भूतल या इमारत के सामने चार से छह मीटर पार्किंग के लिए जगह आरक्षित होनी चाहिए। प्रत्येक बहुमंजिला इमारत के चारों ओर कम से कम 6 मीटर खुला क्षेत्र छोडऩा चाहिए, जो फायर स्क्रेप के काम आता है।

 

अग्निशमन का इंतजाम के लिए भवन के अंदर जगह का होना जरूरी है। ये सभी तल तक आसानी से पहुंच जाए। इसके अलावा भवन में भूमिगत फायर टैंक और सभी तलों तक सुरक्षित पाइप का कनेक्शन भी किया जाना चाहिए।

 

इन गणना के नियम समेत अन्य नियमों की पालना कराने की जिम्मेदारी नगर परिषद की बनती है, लेकिन ऐसा नहीं होकर महज स्वीकृति ही दी जा रही है। शिकायत मिलने पर महज नगर परिषद नगर पालिका अधिनियम की धारा 194 के तहत नोटिस जारी कर देती है।

 

शहर में बढ़ रहा यातायात दबाव

दिनों-दिन शहर में यातायात दबाव बढ़ रहा है। वहीं लगातार बाजार सिकुड़ते जा रहे हैं। आलम ये हैकि शहर के मुख्य बाजार घंटाघर से लेकर बड़ा कुआं तक आए दिन जाम लगा रहता है। पुरानी टोंक स्थित बाजार में से तो वाहन गुजारना ही मुश्किल है।

 

इसका कारण हैकि नगर परिषद की अनदेखी बरतना। लोग मनमर्जीसे सडक़ किनारे अतिक्रमण कर रहे हैं। नालियों पर दुकानों का निर्माण कर लिया गया।

 

नियमों की पालना कराएंगे
शहर में कोई भी कॉम्पलेक्स बिना निर्माण के नहीं बनेगा। स्वीकृति के बाद निर्माण में कमी मिली तो निश्चित कार्रवाईकी जाएगी। इसके लिए राजस्व निरीक्षक को पाबंद किया जाएगा कि वे इनका निरीक्षण करे और कमी मिलने पर कार्रवाई करे।
सीमा चौधरी, आयुक्त नगर परिषद, टोंक

 

एक कॉम्प्लेक्स का निर्माण रूकवा कार सामान जब्त कर लिया था। इसके बावजूद निर्माण नहीं रूक रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। शेष सभी का निरीक्षण किया जा रहा है।
मोतीलाल नागर, राजस्व अधिकारी, नगर परिषद, टोंक

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