scriptHindi Divas 2022 | मातृभाषा उसी प्रकार उपयोगी है जैसे एक नवजात शिशु के लिए मां | Patrika News

मातृभाषा उसी प्रकार उपयोगी है जैसे एक नवजात शिशु के लिए मां

भाषा मानव के द्वारा आविष्कृत सबसे उत्तम साधन है। भाषा की मानव के लिए वैसी ही आवश्यकता है जैसी रोटी, कपड़ा और मकान आदि मूल संसाधनों की आवश्यकता है।

 

टोंक

Published: September 14, 2022 06:08:04 pm

टोंक. भाषा मानव के द्वारा आविष्कृत सबसे उत्तम साधन है। भाषा की मानव के लिए वैसी ही आवश्यकता है जैसी रोटी, कपड़ा और मकान आदि मूल संसाधनों की आवश्यकता है। संवाद के साधन के रूप में भाषा की उपयोगिता से कोई इंकार नहीं कर सकता है, लेकिन वर्तमान युग में भाषा केवल संवाद का साधन नहीं है। भाषा अब मानव के उज्ज्वल भविष्य की निर्धारक भी है। आज हिन्दी दिवस के अवसर पर हमारे लिए मूल चिन्तन का विषय यह है कि वैश्वीकरण के दौर में हम मातृभाषा, राजभाषा, शिक्षणोपयोगी अंग्रेजी आदि भाषाओं की आवश्यकता के बीच हिन्दी को कैसे आगे बढ़ाए।
मातृभाषा उसी प्रकार उपयोगी है जैसे एक नवजात शिशु के लिए मां
मातृभाषा उसी प्रकार उपयोगी है जैसे एक नवजात शिशु के लिए मां
-मातृभाषा उसी प्रकार उपयोगी है जैसे एक नवजात शिशु के लिए मां। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता जाता है वैस-वैसे उसकी आवश्यकता और दायरा बढ़ता है। अन्य भाषाएं सीखना व उनमें पारंगत होना भी ऐसी ही आवश्यकता है। मातृभाषाएं हमारी अनेकता में एकता का ही प्रतीक नहीं अपितु विविधता के सम्मान का भी द्योतक है। मातृभाषा हमारी पहचान हैं।
-कवि कौशल ‘‘कौशलेन्द्र’’
-ङ्क्षहदी एक भाषा ही नहीं बल्कि भारतवर्ष की आत्मा है। भाषा का कार्य एक दूसरे की भावनाओं को आदान-प्रदान करना है, जो ङ्क्षहदी भाषा से ज्यादा किसी भी भाषा में संभव नहीं है। ङ्क्षहदी भाषा को भी पूर्ण रूप से सभी सरकारी विभागों में प्रत्येक राज्य के किसी भी कामकाज में उचित सम्मान दें ताकि लोग मातृभाषा से जुड़ सके संवाद कर सके।-- अर्पण शर्मा
-आज के दौर में युवाओं और बच्चों के अभिभावको की मानसिकता में यह बदलाव लाना जरुरी है। अगर यह बदलाव आएगा तो युवा अपने आप को हीन भावना से ग्रसित नहीं करेंगे। ङ्क्षहदी भाषा को बोलचाल व लेखन में प्रयोग कर गर्व की अनुभूति महसूस करेंगे प्रारंभिक शिक्षा बच्चों को अनिवार्यत: ङ्क्षहदी माध्यम से ही दी जानी चाहिए।
-एडवोकेट अविनाश जैन
-अच्छा साहित्य वह उच्च शिक्षण का पाठ्यक्रम ङ्क्षहदी में उपलब्ध होना चाहिए। समय-समय पर विद्यालय स्तर पर ङ्क्षहदी लेखन वह भाषण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाकर बच्चों को ङ्क्षहदी के प्रति प्रोत्साहन किया जाना चाहिए। सरकार को हिन्दी प्रोत्साहन के कार्य शुरू करना चाहिए। माध्यम ङ्क्षहदी को बढ़ावा मिलेगा।
- जसवंत ङ्क्षसह नरूका

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