आधे से कैसे हो पूरी पढ़ाई, नामांकन 4 हजार का, जरुरत 90 की, पढ़ा रहे मात्र 55 व्याख्याता

नए खोले गए कॉलेजों में व्यवस्थार्थ अन्य कॉलेजों के व्याख्याताओं को लगाया गया है। ऐसे में दोनों ही कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है।

By: pawan sharma

Published: 11 Sep 2017, 07:29 AM IST

 टोंक.

राज्य सरकार ने धड़ाधड़ राजकीय कॉलेज तो खोल दिए, लेकिन व्याख्याताओं की भर्ती नहीं की। वहीं नए खोले गए कॉलेजों में व्यवस्थार्थ अन्य कॉलेजों के व्याख्याताओं को लगाया गया है। ऐसे में दोनों ही कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। जिले में टोडारायसिंह में कॉलेज खोला गया है। इसमें टोंक के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के व्याख्याता लगाए गए हैं।

 

हालांकि यहां ऐसे संकाय के व्याख्याता लगाए गए हैं, जिनकी संख्या अधिक है, लेकिन विद्यार्थी सम्बन्धित से ही अध्ययन कराने की मांग कर आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरे अन्य कई संकाय ऐसे हैं, जहां व्याख्याता कई सालों से नहीं है। ऐसे में पढ़ाई बाधित हो रही है।

 


सबसे अधिक हैं विद्यार्थी
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय टोंक में जिले के अन्य कॉलेजों के मुकाबले सर्वाधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। यहां 3 हजार 967 विद्यार्थी स्नातक तथा स्नातकोत्तर के विभिन्न संकायों में अध्ययन कर रहे हैं। इनके मुताबिक करीब 90 व्याख्याताओं की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा हालात में महज 55 व्याख्याता ही विभिन्न संकायों में अध्ययन करा रहे हैं।

 

 

खाली है कई संकाय
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कई संकाय तो ऐसे हैं, जिनमें व्याख्याता ही नहीं है। इनमें खास तौर पर फारसी विभाग में तो कई सालों से रिक्त है। ऐसे में इस संकाय के विद्यार्थियों को फारसी की पढ़ाई अपने स्तर पर करनी पड़ रही है। इसी प्रकार दो साल से लाइब्रेरियन का पद रिक्त चल रहा है। इससे विद्यार्थियों को लाइबे्ररी का लाभ भी नहीं मिल रहा है। इसी प्रकार कॉमर्स संकाय में भी कई व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं।

 

 

कैसे बने खिलाड़ी

चौंकाने वाली बात ये भी है कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गत 18 साल से शारीरिक शिक्षक का पद रिक्त चल रहा है। ऐसे में विद्यार्थी खेल में भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं। हालांकि हर साल महाविद्यालय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में टोंक की टीम जाती है, लेकिन खिलाड़ी स्वयं के स्तर पर ही अभ्यास कर उनमें हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में वे अच्छी प्रतिभा भी नहीं दिखा पा रहे हैं।

 


ंइनमें हैं सर्वाधिक
टोंक के पीजी कॉलेज में कई संकाय तो ऐसे हैं, जिनमें पर्याप्त मात्रा में व्याख्याता हंै। इनमें कैमिस्ट्री में सात, बोटनी में 3, हिन्दी में 6 तथा इतिहास में 3 शामिल है। हालांकि इतिहास व हिन्दी में पीजी कक्षाएं होने से इनमें 8-8 व्याख्याता होने चाहिए, लेकिन कैमिस्ट्री तथा बोटनी में पर्याप्त व्याख्याता होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं हो रही है।

 

 

इन्हें लगा रखा है
टोंक पीजी कॉलेज के 5 व्याख्याता तो लम्बे समय से आयुक्तालय जयपुर में प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं। दो व्याख्याताओं को अलग-अलग समय पर टोडारायसिंह में खुले नए कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर लगा दिया गया है। ये उन विषयों के व्याख्याता हैं, जिनकी संख्या पीजी कॉलेज में अधिक है। वहीं तीन व्याख्याता किन्हीं कारणों से छुट्टियों पर चल रहे हैं।

 


कॉलेज में व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखा है। मौजूदा व्याख्याताओं से ही अध्ययन कराया जा रहा है।
प्रोफेसर आर. पी. बेनीवाल, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय टोंक

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