स्वास्थ्य केन्द्र में बिना संसाधन कैसे जीत पाएंगे कोरोना से जंग

देवली गांव में करीब एक वर्ष पूर्व खुले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अब तक सुविधाएं नहीं जुट पाई है। यहां अब तक आधा दर्जन लोगों की कोरोना संक्रमित लक्षण से मृत्यु तक हो चुकी है।

By: pawan sharma

Published: 20 May 2021, 07:11 PM IST

देवली. उपखण्ड मुख्यालय से जुड़े देवली गांव में करीब एक वर्ष पूर्व खुले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अब तक सुविधाएं नहीं जुट पाई है। यहां अब तक आधा दर्जन लोगों की कोरोना संक्रमित लक्षण से मृत्यु तक हो चुकी है। उपचार से अलग हटकर देखे तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए भूमि आवंटन का मामला भी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में अटक गया है। यहां नियुक्त डॉ हर्षपाल सिंह ने बताया कि कोविड से निपटने के नाम पर यहां पर किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है, अगर किसी में कोविड के लक्षण पाए जाते है तो उसे देवली सीएचसी रेफर करते है।

यहां सिर्फ उपलब्धता के नाम पर ऑक्सीजन का एक सिलेंडर है, जिसका भी रेग्यूलेटर यहां नहीं है। उसे भी शहर के सीएचसी में कमी होने पर वहां भेज दिया गया है। हालांकि गत वर्ष उप स्वास्थ्य केंद्र को क्रमोन्नत करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक चिकित्सा अधिकारी, दो नर्सिंग अधिकारी, एक प्रसविका, एक एलएचवी, एक प्रयोग शाला सहायक तथा एक फार्मासिस्ट की पोस्ट स्वीकृत है।

शहर से जुड़े होने से फार्मासिस्ट को छोडकऱ सभी पदों पर नियुक्ति दे दी गई। लेकिन चिकित्सालय में मरीजों को भर्ती करने के लिए आवश्यक संसाधन नहीं होने से सामान्य उपलब्ध दवा, गोलियां रोगियों को मिल पा रही है। देवलीगांव पीएचसी अंतर्गत, कासीर, पनवाड़ एवं सांवतगढ़ ग्राम पंचायतों के उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में अप्रैल से इस क्षेत्र में विगत डेढ़ महीने में 115 संक्रमित मामले सामने आए है जिसमें देवली गांव पंचायत क्षेत्र में ही करीब 50 पॉजिटिव मामले आ चुके है।


करीब दर्जनभर कोविड लक्षण एवं ऑक्सीजन लेवल गिरने से मौत हो चुकी है। हालांकि चिकित्सा विभाग मौत की जानकारी को लेकर मौन है। देवली गांव की सिवायचक भूमि को नगरपालिका को करीब 7 वर्ष पूर्व आवंटन कर देने से 10 हजार की आबादी की ग्राम पंचायत के पास भूमि नहीं है, जिससे कई सरकारी कार्यालय भवन नही बन पा रहे है। चिकित्सालय के लिए प्रस्तावित भूमि आवंटन का प्रस्ताव नगर पालिका में अटका हुआ है। पालिका बोर्ड बैठक से भूमि आवंटन प्रस्ताव पारित होकर डीएलबी जयपुर जाएगा। उसके बाद पालिका को स्वीकृति मिलने पर भूमि
आवंटन हो।

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