scriptIn Bisalpur fishes are being stolen due to negligence | बीसलपुर में लापरवाही से चोरी हो रही है मछलियां | Patrika News

बीसलपुर में लापरवाही से चोरी हो रही है मछलियां

12 नाव, 6 अवैध झोपडिय़ां हटाई
150 किलो जाल को भी नष्ट किया
टोंक. बीसलपुर बांध में स्थगन आदेश के चलते मत्स्य पालन का टेंडर नहीं है। ऐसे में देश के विभिन्न कोनों से आए मछुआरों ने बीसलपुर बांध के इलाके में अस्थायी डेरा डाल दिया और जिले के कुछ अवैध मत्स्य का शिकार करने वालों के अधीन बीसलपुर बांध से मछली चोरी कर रहे हैं।

टोंक

Updated: April 06, 2022 08:14:31 pm

बीसलपुर में लापरवाही से चोरी हो रही है मछलियां
12 नाव, 6 अवैध झोपडिय़ां हटाई
150 किलो जाल को भी नष्ट किया
टोंक. बीसलपुर बांध में स्थगन आदेश के चलते मत्स्य पालन का टेंडर नहीं है। ऐसे में देश के विभिन्न कोनों से आए मछुआरों ने बीसलपुर बांध के इलाके में अस्थायी डेरा डाल दिया और जिले के कुछ अवैध मत्स्य का शिकार करने वालों के अधीन बीसलपुर बांध से मछली चोरी कर रहे हैं।
बीसलपुर में लापरवाही से चोरी हो रही है मछलियां
बीसलपुर में लापरवाही से चोरी हो रही है मछलियां

इसकी शिकायत मिलने के बाद जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल के निर्देशानुसार बीसलपुर बांध क्षेत्र में मत्स्याखेट पर कार्रवाई की गई। मत्स्य विभाग की टीम एवं गृह रक्षा स्वयंसेवक दल द्वारा बांध बीसलपुर पर मिनी गोवा रावता माता क्षेत्र दाहिनी नहर के पास अवैधानिक मत्स्याखेट में प्रयुक्त होने वाली 12 नाव, 6 अस्थाई अवैध झोपडिय़ां एवं 150 किलो जालों को नष्ट किया है।
ताकि अवैध मत्स्याखेट की रोकथाम की जा सके। जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि निदेशालय मत्स्य राजस्थान जयपुर के निर्देशानुसार बांध क्षेत्र में अवैधानिक मत्स्यखेट की रोकथाम के लिए बीसलपुर बांध पर 8 गृह रक्षा स्वयंसेवकों को निरंतर गश्त व जांच कार्य के लिए लगाया गया है।

कई मंडिय़ों में जाती है मछलियां
बीसलपुर बांध से चोरी की जाने वाली मछलियों को शिकारी कोटा, जयपुर, अजमेर, दिल्ली आदि मंडिय़ों में बेचते हैं। इन दिनों बांध के करीबी क्षेत्र सहित जलभराव के डूब क्षेत्र में आने वाले माताजी रावता, थडोली, माताजी का टीला, नेगडियां पुलिया के पास, नापा का खेडा, डाबर, नासिरदा के निकट, पाडलिया आदि गांवों के करीब से रोजाना सैकड़ों अवैध नावे पानी में दौड़ती नजर आ रही है।
बीसलपुर बांध के जलभराव में पिछले दो वर्ष से उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इससे मत्स्य विभाग की अनदेखी के चलते राज्य सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं बांध में मछली ठेका नहीं होने से अवैध शिकारियों की तादाद बढ़ती जा रही है।

अवैध मछली शिकार के मामले में गत दिनों बिहार के दो युवकों की हत्या भी हो चुकी है। इसी प्रकार बांध में दौड़ती अवैध नावों से पूर्व में कई हादसे हो चुके हैं।


थाने में दर्ज हो मामले, तो रुके आखेट
मत्स्य विभाग यूं तो गाहे-बगाहे कार्रवाई करता है तो उन्हें अवैध नाव व जाल पकड़ में आती है, लेकिन उनका संचालन करने वाले फरार हो जाते हैं। जबकि मत्स्य विभाग यहां डेरा जमाने वालों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज नहीं कराती।
अन्य प्रदेशों से बीसलपुर बांध में मछली आखेट करने वालों से पूछताछ की जाए तो वो खुलासा कर देंगे कि उन्हें बीसलपुर बांध पर मछली पकडऩे के लिए कौन लाता है, लेकिन मत्स्य विभाग इतनी गहराई में जाने के स्थान पर फोरी कार्रवाई कर लेता है। वहीं कभी मछली ले जाने वाले मार्ग पर भी नाकाबंदी नहीं की गई। इसमें कई वाहन मछली से भरे हुए पकड़ ेमें आ सकते हैं।

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