scriptInspection of automated weather stations | फसल बीमा के लिए स्वचालित मौसम केन्द्रों का किया निरीक्षण | Patrika News

फसल बीमा के लिए स्वचालित मौसम केन्द्रों का किया निरीक्षण

कृषि आयुक्तालय के निर्देशानुसार सयुंक्त टीम द्वारा जिले में स्थापित स्वचालित मौसम केन्द्रों ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्लूएस) का निरीक्षण किया।

 

टोंक

Published: May 02, 2022 06:49:54 pm

टोंक. कृषि आयुक्तालय के निर्देशानुसार सयुंक्त टीम द्वारा जिले में स्थापित स्वचालित मौसम केन्द्रों ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्लूएस) का निरीक्षण किया। कृषि अधिकारी डॉ. मुकेश गैना ने बताया कि सम्बंधित ग्राम पंचायतों के राजीव गांधी सेवा केंद्र व निजी स्थानों पर लगे 9 स्वचालित मौसम केंद्र एडब्लूएस का निरीक्षण किया।
फसल बीमा के लिए स्वचालित मौसम केन्द्रों का किया निरीक्षण
फसल बीमा के लिए स्वचालित मौसम केन्द्रों का किया निरीक्षण

इनमे निवाई ब्लॉक के करेड़ा बुजुर्ग, दतवास, राहोली, झिलाय, नोहटा, सिरस एवं टोंक ब्लॉक के घास, अरनियामाल एवं मेहंदवास शामिल है। इनमें सभी एडब्लूएस उपकरण चालू हालात में पाए गए हैं। उपकरणों द्वारा मौसम आधारित सूचना निरंतर सम्बंधित कम्पनी को भेजी जा रही है।

निरीक्षण के दौरान दतवास एवं अरनिया माल राजीव गांधी केंद्र स्थित एडब्लूएस उपकरण उपयुक्त सही स्थान पर स्थापित होना नही पाया गया, जिस पर सयुंक्त निदेशक कृषि विस्तार हरजीराम चौधरी ने सम्बंधित कम्पनी के प्रतिनिधि को एडब्लूएस उपकरण को उपयुक्त सही स्थान पर स्थापित करने के लिए निर्देशित किया।
सत्यापन में होता है उपयोग

फसल बीमा की व्यक्तिगत शिकायत के सत्यापन में एडब्लूएस उपकरण के डेटा का उपयोग होता है। बीमा कम्पनी के जिला समन्वयक अजय पांडे ने बताया की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत दो तरह से फसल बीमा मिलता है। पहला जिसमें बीमा कम्पनी को प्राप्त फसल बीमा की व्यक्तिगत शिकायत का सम्बंधित ग्राम पंचायत के एडब्लूएस द्वारा भेजे गए मौसमी डेटा के आधार पर शिकायत का सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के बाद शिकायत स्वीकार कर फसल के सर्वे की प्रक्रिया अपनाई जाती है। सर्वे के दौरान फसल में हुए नुकसान के आधार पर बीमा का निर्धारण किया जाता है।
इसी प्रकार सम्बंधित पटवार मंडल क्षेत्र के फसल विशेष में सम्पादित की गई राजस्व फसल कटाई प्रयोग में प्राप्त उपज सात साल के औसत उपज से कम प्राप्त होने पर बीमा का निर्धारण होता है, जिनमें से 2 ज्यादा खराब सालों के उत्पादन डेटा को हटाकर 5 सालों के औसत उत्पादन डेटा से कम उत्पादन प्राप्त होने पर कम्पनी द्वारा बीमा दिया जाता है।
इस दौरान जीएल गुप्ता उपनिदेशक कृषि सांख्यकी जयपुर, राधेश्याम मीणा कृषि अधिकारी, क्षेत्रीय प्रबंधक रङ्क्षवद्र ङ्क्षसह, जितेंद्र ङ्क्षसह व सम्बंधित क्षेत्र के सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षक आदि मौजूद थे।

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