इतिहास का झरोखा : केदारनाथ मंदिर से है झिराना की पहचान

इतिहास का झरोखा : केदारनाथ मंदिर से है झिराना की पहचान

 

By: pawan sharma

Published: 16 Oct 2020, 08:19 AM IST

पीपलू (रा.क.). झिराना ग्राम पंचायत मुख्यालय जिला मुख्यालय टोंक से 35 किमी दूर स्टेट हाइवे 117 तथा तहसील मुख्यालय पीपलू से 12 किमी दूर स्थित है। झिराना का प्राचीन नाम झरना, झराना से अपभ्रंश होते हुए झिराना हुआ है। झिराना को करीब हजार साल पहले जाट जाति के रुवाला गौत्र के बच्छ गौत्र के ब्राह्मणों ने बसाया था।

यह गांव पहले पूर्व व दक्षिण दिशा में बसा हुआ था। कई बार बसावट में बदलाव हुआ। 1301-1303 के बीच ग्रामीणों व अलाउद्दीन खिलजी की सेना के बीच युद्ध हुआ था। वर्तमान में यहां गौण मंडी, बीसलपुर प्लांट, विशाल केदारनाथ दरवाजा सहित कई विकास कार्य हुए हैं। जो गांव की शोभा बढ़ाते हैं।

गांव झिराना टोंक, टोडा, मालपुरा, निवाई से 35-35 किमी दूरी पर मध्य में स्थित हैं। उपखंड क्षेत्र के झिराना गांव में मुख्य चौराहे से टोडारायसिंह की ओर जाने वाले मार्ग पर एक किलोमीटर दूर सडक़ किनारे स्थित केदारनाथ मंदिर से झिराना की पहचान हैं तथा यह स्थान जन-जन की आस्था का केन्द्र हैं।

यहां स्वयंभू केदारनाथ शिवालय उत्तराखंड स्थित केदारनाथ की हूबहू प्रतिमूर्ति के रूप में स्थापित हैं, जो आज से करीब 500 वर्ष पूर्व खुदाई में निकले थे। यहां लगे शिलापट््ट के अनुसार भगवान केदारेश्वर के बारे में मान्यता है कि सम्वत् 1500 में भगवान केदारेश्वर प्रकट हुए है।

श्रावण मास में तो यहां धार्मिक कार्यक्रमों की धूम मची रहती है। इस मंदिर में सामने सतीजी का स्थान है, तो एक ओर बालाजी का स्थान है। यहां संतों के निवास से हमेशा शिवमय माहौल बना रहता है।

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