video: 80 हजार पुस्तकों वाले पुस्तकालय पर तीन साल से लटके है ताले, टोंक पीजी कॉलेज में है जिले का सबसे बड़ा पुस्तकालय

Pawan Kumar Sharma | Publish: Sep, 05 2018 10:18:47 AM (IST) Tonk, Rajasthan, India

विद्यार्थियों को यहां प्रतिदिन, सप्ताह, पखवाड़ा तथा मासिक पत्र-पत्रिकाओं से सामान्य ज्ञान मिल जाया करता था, लेकिन विद्यार्थियों को इनसे वंचित रहना पड़ रहा है।

 

जलालुद्दीन खान

टोंक. केन्द्र व राज्य सरकार जहां शिक्षा पर जोर दे रही है, वहीं टोंक के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विद्यार्थियों की सहायक 80 हजार पुस्तकें तीन साल से ताले में बंद है। ये पुस्तकें इसलिए बंद है कि महाविद्यालय के पास लाइब्रेरियन नहीं है।

 

ऐसे में पुस्तकालय का जुलाई 2015 से ताला नहीं खुला है। जबकि ये पुस्तकालय जिले का सबसे बड़ा है। ऐसे में विद्यार्थियों को पुस्तकें पढऩे के लिए अन्य पुस्तकालयों के लिए भटकना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नियुक्त लाइब्रेरियन जुलाई 2015 में सेवानिवृत्त हो गए।

 

इसके बाद से यहां किसी को भी लगाया नहीं गया। जबकि महाविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरियन नहीं होने से बंद पुस्तकालय को लेकर उच्च शिक्षा निदेशालय को एक दर्जन से अधिक बार लिखित में अवगत कराया, लेकिन उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से लाइब्रेरियन की व्यवस्था नहीं की गई।

 

हर तरह की पुस्तकें हैं

पुस्तकालय में 80 हजार से अधिक पुस्तकें हैं। इसमें विज्ञान, इतिहास, सामान्य ज्ञान, सभी प्रकार की पत्र-पत्रिकाएं समेत अन्य शामिल हैं, लेकिन तीन साल से विद्यार्थियों को इनका लाभ नहीं मिल रहा है। विद्यार्थियों को यहां प्रतिदिन, सप्ताह, पखवाड़ा तथा मासिक पत्र-पत्रिकाओं से सामान्य ज्ञान मिल जाया करता था, लेकिन विद्यार्थियों को इनसे वंचित रहना पड़ रहा है।


जवाब तक नहीं मिला
महाविद्यालय प्रशासन तीन सालों से लगातार उच्च शिक्षा निदेशालय से पत्र व्यवहार कर रहा है। कई बार दूरभाष पर भी अवगत कराया है, लेकिन उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। ऐसे में पुस्तकालय पर लगे ताले से विद्यार्थियों समेत महाविद्यालय प्रशासन भी चिंतित है।

 

पुस्तकालय में लाइब्रेरियन को संविदा पर भी रखा जा सकता है। इसमें अनुभवी, डिग्री या डिप्लोमा समेत सेवानिवृत्त लाइब्रेरियन को रखकर पुस्तकालय को चालू किया जा सकता है। इसका भी पत्र महाविद्यालय प्रशासन ने उच्च शिक्षा निदेशक को जारी किया है, लेकिन इस पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में समस्या जस की तस बनी हुई है।

 

पुस्तकालय जुलाई 2015 से बंद है। इसमें लाइब्रेरियन लगाने तथा पीटीआई के रिक्त पद को भरने के लिए कई बार उच्च शिक्षा निदेशालय को पत्र भेजा गया। दूरभाष पर भी अवगत कराया, लेकिन किसी को लगाया नहीं गया। सेवानिवृत्त तथा संविदा पर भी किसी को लगाने की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में पुस्तकालय बंद है।
डॉ. अमिता अग्रवाल, प्राचार्य, रा.स्नातकोत्तर महाविद्यालय, टोंक

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