‘भगवान की पूजा सभी सुखों का साधन है’- मुनि विश्रांत सागर

जैन मुनि विश्रांत सागर निवाई से मंगल विहार करते हुए पहाड़ी पहुंचे।

 

By: pawan sharma

Published: 24 May 2018, 04:26 PM IST

निवाई. मुनि विश्रांत सागर ने कहा कि भगवान की पूजन संपूर्ण सुखों का साधन है। यदि व्यक्ति को सुख में जीवन जीना है तो भगवान की भक्ति करें। विश्रांत सागर ने बुधवार को पहाड़ी में दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित शांति मंडल विधान के दौरान सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी समस्याओं का समाधान करना हैं तो भगवान के दरबार में आ जाओ, भगवान की पूजा आराधना करो।

 

अपने आप समस्या खत्म हो जाएगी। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौला व राकेश संघी ने बताया कि जैन मुनि विश्रांत सागर निवाई से मंगल विहार करते हुए पहाड़ी पहुंचे। जहां श्री दिगंबर जैन मंदिर मे सोभागमल सोगानी ने शांति मंडल विधान का आयोजन किया। शांतिनाथ मंडल विधान में सोभागमल सोगानी, अजीत काला, विमल जौला, राकेश संघी एवं विमल सोगानी के भजनों की प्रस्तुतियां दी।

 

विधान से पूर्व प्रतिष्ठाचार्य सुरेशचन्द्र शास्त्री द्वारा मंडप पर पांच मंगल कलश की स्थापना कर इंद्र प्रतिष्ठा, सकलीकरण एवं आचार्य निमंत्रण का आयोजन किया। सौधर्म इंद्र द्वारा भगवान अरहनाथ की शांतिधारा की गई। इस दौरान समाज के मंत्री महावीरप्रसाद पराना, अशोक सोगानी, शिखरचन्द काला, पदम टोंग्या, विनय कासलीवाल, त्रिलोक जैन, नितिन गोधा, पिंकू सोगानी एवं रिंकू झांझरी मौजूद थे।

 

हवन यज्ञ में दी आहुतियां

मालपुरा. शतचण्डी महायज्ञ समिति व बारादरी रामचरित मानस मण्डल की ओर से बारादरी बालाजी मन्दिर में चल रहे शतचण्डी महायज्ञ में बुधवार को श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ में आहुतियां दी। यज्ञशाला स्थल पर बाबा बालकदास त्यागी उत्तरप्रदेश के सान्निध्य में यज्ञाचार्य सन्तोष शास्त्री वाराणसी के द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कराई गई। यज्ञशाला में श्रद्धालुओं ने पूजा में भाग लेकर मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ में आहुतियां दी। वहीं श्रीराम कथा में कथावाचक श्रीरामकृष्ण पाठक अयोध्या ने भगवान राम की जीवनी के चलचित्रों का वर्णन किया।

 

कलशयात्रा निकाली

टोंक. मेहंदवास स्थित बागवाले बालाजी मन्दिर परिसर में बुधवार से सात दिवसीय श्री गोपाल महायज्ञ शुरू हुआ। इसको लेकर बुधवार को महिलाओं ने कलशयात्रा निकाली। बसस्टैण्ड स्थित गणेश मन्दिर में पूजा-अर्चना के बाद कलशयात्रा रवाना हुई। ये मुख्य बाजार होते हुए यज्ञ स्थल पहुंची।

 

मार्ग में श्रद्धालु बैण्डबाजे के भजनों पर नाचते गाते चल रहेथे। इसके बाद झण्डा, प्रधान कुण्ड व अन्य कुण्डों के लिए बोली लगाई गई। बोली में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढकऱ हिस्सा लिया। इस मौके पर संत सीतारामदास चारनेट, राजाराम यादव, रामलाल गड़द, मोहनलाल यादव, प्रभुलाल यादव, राधेश्याम पालीवाल, भंवरलाल विजय समेत कई श्रद्धालु मौजूद थे।

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